अध्याय 6: कार्य, ऊर्जा और शक्ति (Work, Energy and Power)
यह अध्याय यांत्रिकी (Mechanics) के सबसे व्यावहारिक और महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है। इसमें हम बलों द्वारा किए गए कार्यों, ब्रह्मांड की सबसे महत्वपूर्ण राशि 'ऊर्जा' और कार्य करने की दर 'शक्ति' का अध्ययन करते हैं। NEET, JEE, CUET और सभी State Boards (BSEB, CBSE) की परीक्षाओं में इस अध्याय से सीधे और अत्यधिक स्कोरिंग प्रश्न पूछे जाते हैं।

1. कार्य (Work)
भौतिकी में कार्य केवल तब माना जाता है जब किसी वस्तु पर बल लगाया जाए और वस्तु में बल की दिशा में कुछ विस्थापन (Displacement) हो।
- गणितीय परिभाषा: बल और विस्थापन के अदिश (Dot) गुणनफल को कार्य कहते हैं।
- जहाँ:
, ,
- जहाँ:
- प्रकृति और मात्रक: यह एक अदिश (Scalar) राशि है। इसका SI मात्रक जूल (Joule - J) होता है और विमीय सूत्र
है। ( )
📊 कोण ( ) के आधार पर कार्य के प्रकार:
- धनात्मक कार्य (
): जब न्यूनकोण हो ( )। बल और विस्थापन एक ही दिशा में होते हैं। (जैसे: घोड़े द्वारा गाड़ी खींचना)। - ऋणात्मक कार्य (
): जब अधिककोण हो ( )। बल गति का विरोध करता है। (जैसे: घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य, )। - शून्य कार्य (
): जब बल और विस्थापन परस्पर लंबवत हों ( ) या विस्थापन शून्य हो। (जैसे: कुली द्वारा सिर पर बोझ उठाकर समतल सड़क पर चलना, या वृत्तीय गति में अभिकेंद्र बल द्वारा किया गया कार्य)।
2. परिवर्ती बल द्वारा किया गया कार्य (Work Done by a Variable Force)
यदि बल नियत न होकर लगातार बदल रहा हो (जैसे स्प्रिंग को खींचना), तो कार्य ज्ञात करने के लिए समाकलन (Integration) का उपयोग किया जाता है:
- 💡 Graph Trick: बल-विस्थापन (
) ग्राफ के नीचे का कुल क्षेत्रफल हमेशा किए गए कार्य के बराबर होता है।
3. ऊर्जा (Energy)
किसी वस्तु के कार्य करने की कुल क्षमता को उसकी ऊर्जा कहते हैं। यह एक अदिश राशि है और इसका मात्रक भी जूल होता है।
① गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy - K.E.)
किसी वस्तु में उसकी गति के कारण जो कार्य करने की क्षमता होती है, उसे गतिज ऊर्जा कहते हैं।
- 🚨 Exam Point (संवेग और गतिज ऊर्जा संबंध): यहाँ
वस्तु का रेखीय संवेग ( ) है। यदि संवेग दोगुना किया जाए, तो गतिज ऊर्जा 4 गुना हो जाएगी ( )।
🔄 कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem)
- कथन: किसी वस्तु पर लगे शुद्ध बल (Net Force) द्वारा किया गया कार्य, उस वस्तु की गतिज ऊर्जा में होने वाले परिवर्तन के बराबर होता है।
② स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy - P.E.)
किसी वस्तु में उसकी स्थिति (Position) या अभिन्यास (Configuration) के कारण संचित ऊर्जा को स्थितिज ऊर्जा कहते हैं। यह केवल संरक्षी बलों के लिए परिभाषित होती है।
- गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा: पृथ्वी की सतह से
ऊँचाई पर: - स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा: स्प्रिंग को
दूरी खींचने या दबाने पर संचित ऊर्जा: (जहाँ है, इसका मात्रक होता है)
4. संरक्षी और असंरक्षी बल (Conservative & Non-Conservative Forces)
| विशेषता | संरक्षी बल (Conservative Force) | असंरक्षी बल (Non-Conservative Force) |
|---|---|---|
| पथ पर निर्भरता | किया गया कार्य केवल प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, पथ पर नहीं। | किया गया कार्य तय किए गए वास्तविक पथ पर निर्भर करता है। |
| पूर्ण चक्र में कार्य | एक बंद लूप (Closed Path) में किया गया कुल कार्य हमेशा शून्य होता है। | बंद लूप में किया गया कुल कार्य शून्य नहीं होता। |
| उदाहरण | गुरुत्वाकर्षण बल, स्थिर-वैद्युत बल, स्प्रिंग बल। | घर्षण बल, श्यान बल (Viscous force), हवा का प्रतिरोध। |
5. यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण का नियम (Conservation of Mechanical Energy)
- कथन: यदि किसी निकाय पर केवल संरक्षी बल (Conservative Forces) ही कार्य कर रहे हों, तो निकाय की कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) हमेशा नियत (संरक्षित) रहती है।
- उदाहरण: किसी मीनार से मुक्त रूप से गिरती हुई गेंद की स्थितिज ऊर्जा घटती जाती है, परंतु ठीक उसी अनुपात में उसकी गतिज ऊर्जा बढ़ती जाती है, जिससे हर बिंदु पर कुल ऊर्जा समान रहती है।
6. शक्ति (Power)
- परिभाषा: कार्य करने की समय दर को शक्ति कहते हैं (यानी कोई एजेंट कितनी तेजी से कार्य करता है)।
- मात्रक: इसका SI मात्रक वाट (Watt - W) होता है। (
) - अन्य व्यावहारिक मात्रक:
- 1 अश्व शक्ति (Horse Power - HP) =
- किलोवाट-घंटा (kWh - विद्युत ऊर्जा का मात्रक) =
- 1 अश्व शक्ति (Horse Power - HP) =
7. संघट्ट / टक्कर (Collisions)
जब दो या दो से अधिक पिंड आपस में टकराते हैं और उनके वेग बदल जाते हैं, तो इस घटना को संघट्ट कहते हैं। सभी प्रकार के संघट्टों में कुल रेखीय संवेग हमेशा संरक्षित रहता है।
- पूर्णतः प्रत्यास्थ संघट्ट (Perfectly Elastic Collision): इसमें रेखीय संवेग और कुल गतिज ऊर्जा दोनों संरक्षित रहते हैं। (जैसे: उप-परमाण्विक कणों की टक्कर)।
- अप्रत्यास्थ संघट्ट (Inelastic Collision): इसमें संवेग तो संरक्षित रहता है, परंतु गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती (ऊर्जा ध्वनि, ऊष्मा आदि में बदल जाती है)।
- पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट: टक्कर के बाद दोनों पिंड आपस में चिपक जाते हैं और एक ही उभयनिष्ठ वेग से गति करते हैं।
📐 प्रत्यवस्थान गुणांक (Coefficient of Restitution - )
यह टक्कर के बाद दूर जाने के आपेक्षिक वेग और टक्कर से पहले पास आने के आपेक्षिक वेग का अनुपात है:
- पूर्णतः प्रत्यास्थ टक्कर के लिए:
- पूर्णतः अप्रत्यास्थ टक्कर के लिए:
- वास्तविक/व्यावहारिक टक्कर के लिए:
💡 Exam Points & Tips-Tricks (NEET / JEE Special)
- 🚨 Super Spring Proportionality Trick: यदि किसी स्प्रिंग को
से तक खींचा जाए, तो किया गया कार्य होता है। सीधे का होल स्क्वायर न करें, यह अक्सर छात्र परीक्षा में गलत करते हैं। - Water Pump Power Trick: यदि एक पंप
अनुप्रस्थ काट की पाइप से वेग से पानी बाहर फेंकता है, तो पानी को दी गई शक्ति (वेग के घन के समानुपाती) होती है। यह NEET में कई बार पूछा गया है। - प्रतिशत परिवर्तन शॉर्टकट (If
): यदि किसी वस्तु का संवेग बढ़ाया जाए, तो उसकी गतिज ऊर्जा में प्रतिशत वृद्धि लगभग होगी (समीकरण के अवकलन से)।
📝 अध्याय का सारांश (Conclusion)
कार्य, ऊर्जा और शक्ति अध्याय हमें यह सिखाता है कि बल और विस्थापन मिलकर कार्य को जनम देते हैं, जिसे ब्रह्मांड कभी नष्ट नहीं करता बल्कि ऊर्जा के रूप में सहेज लेता है। कार्य-ऊर्जा प्रमेय यांत्रिकी की जटिल गुत्थियों को बिना न्यूटन के कठिन त्वरण समीकरणों के, केवल शुरुआती और अंतिम ऊर्जाओं की तुलना करके चुटकियों में हल करने की शक्ति देता है।
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