अध्याय 8: गुरुत्वाकर्षण (Gravitation)
यह अध्याय कक्षा 11वीं की प्रथम पाठ्यपुस्तक (Volume 1) का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है। यहाँ हम यह समझते हैं कि ब्रह्मांड में पिंड एक-दूसरे को किस प्रकार आकर्षित करते हैं, ग्रह और उपग्रह किस प्रकार निश्चित कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं, और पृथ्वी से किसी वस्तु को अंतरिक्ष में भेजने के क्या नियम हैं। NEET, JEE, CUET और सभी State Boards (BSEB, CBSE) की परीक्षाओं के लिए यह एक अत्यंत स्कोरिंग अध्याय है।

1. न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम (Newton's Universal Law of Gravitation)
- कथन: ब्रह्मांड में किन्हीं भी दो कणों के बीच लगने वाला आकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
- गणितीय रूप: यदि
और द्रव्यमान के दो पिंड परस्पर दूरी पर स्थित हों, तो उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल: - सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (
): - इसका मान पूरे ब्रह्मांड में हमेशा नियत रहता है (यह माध्यम, ताप या पिंडों की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता)।
- मान:
- विमीय सूत्र:
(🚨 परीक्षाओं में सीधे पूछा जाता है!)
2. गुरुत्वीय त्वरण ( ) और उसमें परिवर्तन (Acceleration due to Gravity)
पृथ्वी के आकर्षण बल (गुरुत्व) के कारण किसी वस्तु में उत्पन्न होने वाले त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण (
(जहाँ
📉 के मान में परिवर्तन (Variations in ):
- ऊँचाई के साथ (
ऊँचाई पर): जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह से ऊपर जाते हैं, का मान घटता है। - यदि
(ऊँचाई बहुत कम हो):
- यदि
- गहराई के साथ (
गहराई पर): पृथ्वी के भीतर जाने पर भी का मान घटता है। - 🔥 Exam Point: पृथ्वी के केंद्र पर (
), गुरुत्वीय त्वरण का मान शून्य ( ) हो जाता है।
- पृथ्वी के आकार के कारण: पृथ्वी पूर्णतः गोल नहीं है, बल्कि ध्रुवों (Poles) पर थोड़ी चपटी है (
)। - चूँकि
, इसलिए का मान ध्रुवों पर अधिकतम और भूमध्य रेखा (Equator) पर न्यूनतम होता है।
- चूँकि
- घूर्णन के कारण: पृथ्वी के अपनी अक्ष पर घूमने (कोणीय वेग
) के कारण अक्षांश पर का प्रभावी मान घट जाता है: ।
3. गुरुत्वीय क्षेत्र और विभव (Gravitational Field & Potential)
- गुरुत्वीय क्षेत्र की तीव्रता (
): किसी गुरुत्वीय क्षेत्र में एकांक द्रव्यमान पर लगने वाला बल। यह एक सदिश राशि है। - गुरुत्वीय विभव (
): एकांक द्रव्यमान को अनंत से गुरुत्वीय क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में किया गया कार्य। यह एक अदिश राशि है।
🌌 गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (Gravitational Potential Energy - )
दो द्रव्यमानों के निकाय को अनंत से एक-दूसरे के पास लाकर स्थापित करने में संचित ऊर्जा:
- 🚨 ध्यान दें: ऋणात्मक चिन्ह (
) यह दर्शाता है कि यह एक आकर्षण बल है और निकाय बंधा हुआ (Bound System) है। वस्तुओं को दूर ले जाने के लिए बाहर से ऊर्जा देनी होगी।
4. पलायन वेग (Escape Velocity - )
- परिभाषा: वह न्यूनतम वेग जिससे किसी पिंड को पृथ्वी की सतह से ऊपर फेंकने पर वह पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र को पार कर जाता है और कभी वापस लौटकर नहीं आता।
- सूत्र:
- 🚀 पृथ्वी के लिए मान: पृथ्वी की सतह से पलायन वेग का मान
होता है। - विशेषता: पलायन वेग प्रक्षेपित की जाने वाली वस्तु के द्रव्यमान (
) या प्रक्षेपण कोण पर निर्भर नहीं करता (आप चाहे सुई फेंकें या भारी रॉकेट, वेग ही चाहिए)।
5. उपग्रहों की गति (Motion of Satellites)
जब कोई उपग्रह पृथ्वी के चारों ओर
- कक्षीय वेग (Orbital Velocity -
): उपग्रह को अपनी कक्षा में बने रहने के लिए आवश्यक वेग। - यदि उपग्रह पृथ्वी की सतह के बहुत निकट हो (
):
- यदि उपग्रह पृथ्वी की सतह के बहुत निकट हो (
- 🚨 पलायन वेग और कक्षीय वेग में संबंध:
(यानी यदि किसी उपग्रह के कक्षीय वेग को गुना या बढ़ा दिया जाए, तो वह अपनी कक्षा छोड़कर अंतरिक्ष में पलायन कर जाएगा!) - परिक्रमण काल (Time Period -
): एक चक्कर पूरा करने में लगा समय।
📡 भू-स्थिर उपग्रह (Geo-stationary / Geo-synchronous Satellite)
- यह उपग्रह पृथ्वी के घूर्णन की दिशा में (पश्चिम से पूर्व) चक्कर लगाता है।
- इसका परिक्रमण काल पृथ्वी के समान यानी 24 घंटे होता है।
- पृथ्वी पर खड़े व्यक्ति को यह हमेशा स्थिर दिखाई देता है (इसका उपयोग दूरसंचार/टीवी सिग्नलों के लिए होता है)।
- इसकी पृथ्वी की सतह से ऊँचाई लगभग
होती है।
🪐 6. केप्लर के ग्रहों की गति के नियम (Kepler's Laws of Planetary Motion)
जोहान्स केप्लर ने ग्रहों की गति से संबंधित तीन महत्वपूर्ण नियम दिए:
- कक्षाओं का नियम (Law of Orbits): प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों ओर एक दीर्घवृत्ताकार (Elliptical) कक्षा में चक्कर लगाता है, तथा सूर्य इस दीर्घवृत्त के किसी एक फोकस (Focus) पर स्थित होता है।
- क्षेत्रीय चाल का नियम (Law of Areas): सूर्य तथा ग्रह को मिलाने वाली रेखा समान समय अंतरालों में समान क्षेत्रफल तय करती है। अर्थात ग्रह की क्षेत्रीय चाल (
) नियत रहती है। - 🔥 Exam Point: यह नियम कोणीय संवेग संरक्षण (Conservation of Angular Momentum) पर आधारित है। जब ग्रह सूर्य के पास होता है तो उसकी चाल (
) बढ़ जाती है, और दूर होने पर घट जाती है।
- 🔥 Exam Point: यह नियम कोणीय संवेग संरक्षण (Conservation of Angular Momentum) पर आधारित है। जब ग्रह सूर्य के पास होता है तो उसकी चाल (
- परिक्रमण कालों का नियम (Law of Periods): किसी ग्रह के परिक्रमण काल का वर्ग (
), उसकी दीर्घवृत्ताकार कक्षा के अर्ध-दीर्घ अक्ष (Semi-major axis - ) के घन के समानुपाती होता है।
💡 Exam Points & Tips-Tricks (NEET / JEE Special)
- 🚨 Super Height-Depth Graph Trick: गुरुत्वीय त्वरण (
) का दूरी ( ) के साथ ग्राफ बहुत बार पूछा जाता है: - पृथ्वी के अंदर (
): (सरल रेखा) - पृथ्वी की सतह पर (
): - पृथ्वी के बाहर (
): (परवलयाकार कमी)
- पृथ्वी के अंदर (
- Total Energy of Satellite Trick: किसी कक्षा में घूमते उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा (
), उसकी गतिज ऊर्जा ( ) और स्थितिज ऊर्जा ( ) में यह जादुई संबंध होता है: (यानी यदि गतिज ऊर्जा है, तो स्थितिज ऊर्जा होगी और कुल ऊर्जा होगी)। - Weightlessness Trick: अंतरिक्ष यान में अंतरिक्ष यात्री भारहीनता का अनुभव करते हैं क्योंकि यान मुक्त रूप से गिरती हुई स्थिति में होता है, जिससे वहाँ कोई अभिलंब प्रतिक्रिया बल (
) नहीं होता।
📝 अध्याय का सारांश (Conclusion)
गुरुत्वाकर्षण अध्याय हमें यह अनोखी समझ देता है कि जो बल सेब को जमीन पर गिराता है, वही बल चंद्रमा को पृथ्वी की कक्षा में थामे रखता है और पृथ्वी को सूर्य के चक्कर लगवाता है। केप्लर के नियमों से लेकर उपग्रहों की रहस्यमयी कक्षाओं तक, यह अध्याय हमें यह सिखाता है कि ब्रह्मांड का हर भारी पिंड एक अदृश्य बंधन से बंधा है। इसके साथ ही कक्षा 11वीं की यांत्रिकी (Mechanics) का यह मुख्य खंड समाप्त होता है।
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