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Class 11 Psychology Chapter 9 Notes Hindi NCERT

🚀 अध्याय 9: अभिप्रेरणा एवं संवेग (Motivation and Emotion)

हम कोई भी काम क्यों करते हैं? एक छात्र रात-रात भर जागकर पढ़ाई क्यों करता है? एक धावक पैर में चोट होने के बाद भी दौड़ पूरी क्यों करता है? इन सभी 'क्यों' का उत्तर हमें अभिप्रेरणा (Motivation) से मिलता है। इसके साथ ही, हमारा जीवन केवल यांत्रिक कार्यों से नहीं बल्कि सुख, दुःख, क्रोध और भय जैसी विभिन्न भावनाओं से भी भरा है, जिन्हें मनोविज्ञान में संवेग (Emotion) कहा जाता है। आइए इस अत्यंत व्यावहारिक अध्याय को बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं।


1. अभिप्रेरणा का अर्थ और इसका चक्र (Concept & Motivation Cycle) 🤔🔄⭐⭐⭐⭐⭐

  • उत्पत्ति (Etymology) 🏛️: 'मोटिवेशन' (Motivation) शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द 'मोवेअर' (Movere) से हुई है, जिसका अर्थ है "गति करना" (To Move)
  • परिभाषा: "अभिप्रेरणा एक ऐसी आंतरिक स्थिति या शक्ति है जो हमारे व्यवहार को किसी निश्चित लक्ष्य की ओर उत्तेजित (Arouse), निर्देशित (Direct) और निरंतर बनाए (Sustain) रखती है।"

🔄 अभिप्रेरणा चक्र (The Motivation Cycle) — सबसे Important ⭐⭐⭐⭐⭐⭐:

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, अभिप्रेरणा एक सीधी रेखा में नहीं बल्कि एक चक्र (सर्किल) के रूप में काम करती है, जिसके 6 मुख्य चरण होते हैं (क्रम याद रखें):

[Image]

[1. आवश्यकता] ──> [2. अंतर्नोद / प्रणोदन] ──> [3. उत्तेजना / उद्वेलन]▲ ││ ▼[6. उत्तेजना में कमी] <── [5. लक्ष्य प्राप्ति] <── [4. लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार]

  1. आवश्यकता (Need) 🫙: शरीर में किसी चीज़ की कमी या अति होना आवश्यकता कहलाता है। (जैसे— शरीर में पानी की कमी होना = पानी की आवश्यकता)।
  2. अंतर्नोद या प्रणोदन (Drive) ⚡: आवश्यकता के कारण पैदा हुआ आंतरिक तनाव या खिंचाव जो जीव को काम करने के लिए मजबूर करता है। (जैसे— पानी की कमी से पैदा हुई 'प्यास' अंतर्नोद है; भोजन की कमी से पैदा हुई 'भूख' अंतर्नोद है) ⭐⭐⭐.
  3. उद्वेलन या उत्तेजना (Arousal): अंतर्नोद के कारण शरीर और मन में पैदा हुई बेचैनी या छटपटाहट।
  4. लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार (Goal-directed Behavior) 🏃‍♂️: लक्ष्य को पाने के लिए इधर-उधर हाथ-पैर मारना या प्रयास करना। (जैसे— पानी ढूंढना या रसोई की तरफ जाना)।
  5. लक्ष्य प्राप्ति (Goal Achievement) 🎯: वांछित वस्तु को प्राप्त कर लेना। (जैसे— पानी मिल जाना और उसे पी लेना)।
  6. उद्वेलन में कमी (Reduction of Arousal) 🧘‍♂️: लक्ष्य मिलने के बाद आंतरिक तनाव और बेचैनी का समाप्त हो जाना (प्यास बुझ जाना)। इसके बाद कुछ समय बाद एक नई आवश्यकता जन्म लेती है और यह चक्र दोबारा शुरू हो जाता है।

2. प्रेरकों के प्रकार: जैविक बनाम सामाजिक (Types of Motives) 📊🧬⭐⭐⭐⭐⭐

हमारे व्यवहार को गति देने वाले प्रेरकों (Motives) को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बाँटा जाता है:

[Image]

[ प्रेरकों का वर्गीकरण ]│————————————————-│ │क) जैविक / शारीरिक प्रेरक ख) सामाजिक-मनोवैज्ञानिक प्रेरक(Biological / Physiological) (Social / Psychological)[जन्मजात व जीवित रहने के लिए] [समाज में सीखे गए प्रेरक]

क) जैविक प्रेरक (Biological Motives) 🩺🍼:

ये प्रेरक जन्मजात (Innate) होते हैं और जीव को जीवित रखने के लिए अनिवार्य हैं। इनमें मुख्य हैं:

  • भूख (Hunger) 🍔: शरीर में ग्लूकोज का स्तर कम होने पर लीवर और मस्तिष्क का हाइपोथैलेमस सक्रिय होता है, जिससे भूख लगती है।
  • प्यास (Thirst) 💧: कोशिकाओं से पानी की कमी होने पर हाइपोथैलेमस प्यास का संकेत देता है।
  • नींद (Sleep) 💤: शरीर और मस्तिष्क की ऊर्जा को रीचार्ज करने के लिए अनिवार्य जैविक आवश्यकता।
  • कामेच्छा (Sex) 🚹🚺: यह प्रजाति के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए आवश्यक है, लेकिन यह व्यक्ति के जीवित रहने के लिए अनिवार्य नहीं है। यह अंतःस्रावी हार्मोनों (एस्ट्रोजन, टेस्टोस्टेरोन) द्वारा नियंत्रित होती है।

ख) सामाजिक-मनोवैज्ञानिक प्रेरक (Social Motives) 🤝🏆⭐⭐⭐⭐⭐⭐:

ये प्रेरक जन्मजात नहीं होते, बल्कि मनुष्य समाज और संस्कृति में रहते हुए इन्हें अनुभव के माध्यम से सीखता है। मुख्य सामाजिक प्रेरक निम्नलिखित हैं:

  1. संबद्धन की आवश्यकता (Need for Affiliation) 👨‍👩‍👧‍👦: अन्य लोगों के साथ जुड़ने, दोस्त बनाने, समूह का हिस्सा बनने और सामाजिक संबंध स्थापित करने की तीव्र इच्छा।
  2. उपलब्धि की आवश्यकता (Need for Achievement - nAch) 🥇🏆 ⭐⭐⭐⭐⭐⭐:
    • प्रतिपादक: डेविड मैक्लीलैंड (David McClelland)
    • अर्थ: जीवन में उत्कृष्टता के उच्च मानकों को प्राप्त करने, कठिन कार्यों में सफलता पाने और दूसरों से बेहतर करने की तीव्र इच्छा। जिन छात्रों में nAch उच्च होता है, वे चुनौतियों को पसंद करते हैं और कड़ी मेहनत करते हैं।
  3. शक्ति की आवश्यकता (Need for Power) 👑: दूसरों पर नियंत्रण रखने, उन्हें प्रभावित करने, अपनी बात मनवाने और नेतृत्व (Leader) करने की इच्छा।
  4. आक्रामकता (Aggression) 🪓❌: किसी को शारीरिक या मानसिक ठेस पहुँचाने का इरादा या व्यवहार। यह हताशा (Frustration) के कारण भी पैदा होता है।

3. मैस्लो का आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत (Maslow's Hierarchy of Needs) 🪜💎 [VVI Topic]

महान मानवतावादी मनोवैज्ञानिक अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) ने 1954 में मानव आवश्यकताओं को एक पिरामिड (पदानुक्रम) के रूप में व्यवस्थित किया। उनका मानना था कि मनुष्य पहले निचले स्तर की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करता है, उसके बाद ही वह उच्च स्तर की आवश्यकताओं की ओर बढ़ता है।

[Image]

▲ [5. आत्म-सिद्धि / Self-Actualization] 🧘‍♂️/ \ (अपनी क्षमताओं का पूर्ण विकास करना)// \ [4. आत्म-सम्मान की आवश्यकता] 🏆/\ (पहचान, पद, प्रतिष्ठा पाना)/ /\ [3. सम्बद्धता व प्रेम की आवश्यकता] ❤️/ \ (परिवार, दोस्त, जीवनसाथी का प्यार)/____________/ \ [2. सुरक्षा की आवश्यकता] 🏠🛡️/\ (घर, नौकरी, कानून-व्यवस्था, शारीरिक सुरक्षा)/ /\ [1. शारीरिक / जैविक आवश्यकताएँ] 🍞🍼(बुनियादी आवश्यकताएँ: भूख, प्यास, नींद, सेक्स)

  • आत्म-सिद्धि (Self-Actualization) ⭐⭐⭐⭐⭐⭐: यह पिरामिड का सर्वोच्च शिखर है। इसका अर्थ है— एक व्यक्ति जो कुछ भी बनने की क्षमता रखता है, वह सब कुछ प्राप्त कर लेना (जैसे— कबीर, महात्मा बुद्ध या आइंस्टीन का अपने क्षेत्र के चरम पर पहुँचना)।

4. संवेग: अर्थ और स्वरूप (Nature of Emotions) 🌊🧠⭐⭐⭐⭐⭐

  • उत्पत्ति: 'इमोशन' (Emotion) शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द 'इमोवेअर' (Emovere) से हुई है, जिसका अर्थ है— "उद्वेलित करना" या "हलचल पैदा करना"
  • परिभाषा: "संवेग व्यक्ति की एक ऐसी जटिल और उद्वेलित अवस्था है जिसमें शारीरिक उत्तेजना, मनोवैज्ञानिक बदलाव और प्रकट व्यवहार शामिल होते हैं।"

📊 संवेग के 3 मुख्य घटक (Components of Emotion) 🧪:

जब हमें क्रोध या डर महसूस होता है, तो हमारे शरीर में तीन स्तरों पर बदलाव आते हैं:

  1. शारीरिक परिवर्तन (Physiological Changes) 🩻: हमारे शरीर के अंदर स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (अनुकंपी भाग) सक्रिय हो जाता है। हृदय की धड़कन तेज होना, रक्तचाप (BP) बढ़ना, आँख की पुतलियाँ फैलना और पसीना आना। (अधिवृक्क ग्रंथि से एड्रिनेलिन हार्मोन का स्राव होता है) 🔋।
  2. संज्ञानात्मक अनुभव (Cognitive Appraisals) 🧠: मन में आने वाले विचार और परिस्थिति का मानसिक मूल्यांकन (जैसे— यह सोचना कि "सामने खड़ा कुत्ता मुझे काट सकता है, मुझे यहाँ से भागना चाहिए")।
  3. व्यवहारात्मक अभिव्यक्ति (Behavioral Expressions) 🏃‍♂️: हमारे चेहरे के भाव, आवाज का बदलना और शारीरिक भाषा। (जैसे— डर के मारे चीखना, या गुस्से में मुट्ठी भींचना)।

5. संवेगों के प्रमुख सिद्धांत (Theories of Emotion) 📜⚖️ [JEE / NET / CTET Hot-Topic]

वैज्ञानिकों ने यह समझाने के लिए अलग-अलग सिद्धांत दिए कि संवेग का अनुभव पहले होता है या शारीरिक बदलाव पहले:

  1. जेम्स-लांगे सिद्धांत (James-Lange Theory) 🐻🏃‍♂️🔔 가장 Important ⭐⭐⭐⭐⭐⭐:
    • यह सिद्धांत पारंपरिक सोच को पूरी तरह उलट देता है। सामान्यतः हम सोचते हैं कि "हमें भालू को देखकर डर लगा (संवेग), इसलिए हम भागे (शारीरिक क्रिया)"।
    • लेकिन जेम्स-लांगे के अनुसार: "शारीरिक प्रतिक्रिया पहले होती है, और उस शारीरिक बदलाव को महसूस करने के बाद हमें संवेग का अनुभव होता है।"
    • अर्थात: "हम रोते हैं इसलिए हमें दुःख होता है; हम काँपते हैं इसलिए हमें डर लगता है।"
  2. कैनन-बार्ड सिद्धांत (Cannon-Bard Theory) 🧠🔄:
    • इन्होंने जेम्स-लांगे का विरोध किया और कहा कि शारीरिक बदलाव और संवेगात्मक अनुभव दोनों एक ही समय पर एक साथ (Simultaneously) होते हैं। जब उद्दीपक सामने आता है, तो मस्तिष्क का थैलेमस सक्रिय होकर दोनों प्रणालियों को एक साथ संदेश भेजता है।
  3. शैक्टर-सिंगर या द्वि-कारक सिद्धांत (Schachter-Singer Two-Factor Theory) 🧪🧠⭐⭐⭐⭐⭐:
    • इस सिद्धांत के अनुसार, संवेग के अनुभव के लिए दो चीजें अनिवार्य हैं— पहली शारीरिक उत्तेजना (Physiological arousal) और दूसरा उस उत्तेजना का संज्ञानात्मक मूल्यांकन (Cognitive label)। हम अपने आस-पास की परिस्थिति को देखकर तय करते हैं कि हमारी तेज धड़कन डर के कारण है या खुशी के कारण।

6. संवेगों का प्रबंधन और नकारात्मक संवेग (Management of Emotions) 🧘‍♂️🍃

संवेग हमारे जीवन को सुंदर बनाते हैं, लेकिन यदि क्रोध, ईर्ष्या या अत्यधिक डर (चिंता) नियंत्रण से बाहर हो जाएं, तो वे हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को नष्ट कर देते हैं।

  • संवेगात्मक बुद्धि (Emotional Intelligence - EQ) 🧠🤝⭐⭐⭐⭐⭐:
    • प्रतिपादक: डेनियल गोलमैन (Daniel Goleman)
    • अर्थ: अपने खुद के संवेगों को पहचानना व प्रबंधित करना तथा दूसरों की भावनाओं को समझकर (सहानुभूति/Empathy) उनके साथ बेहतर सामाजिक संबंध बनाने की क्षमता को संवेगात्मक बुद्धि (EQ) कहते हैं। जीवन में सफलता के लिए IQ से ज्यादा EQ का होना आवश्यक माना जाता है।
  • क्रोध प्रबंधन (Anger Management) 😡 स्थिर: क्रोध आने पर तुरंत प्रतिक्रिया न करना, उल्टी गिनती गिनना (10 से 1 तक), गहरी सांस लेना (Deep breathing), या कुछ समय के लिए उस स्थान से हट जाना।

🚀 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण शार्टकट की-पॉइंट्स (Quick Revision Guide)

  • अभिप्रेरणा चक्र का सही क्रम: आवश्यकता अंतर्नोद उद्वेलन लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार लक्ष्य प्राप्ति उद्वेलन में कमी।
  • मास्टर ग्रंथि / आपातकालीन हार्मोन: मास्टर ग्रंथि = पीयूष ग्रंथि; आपातकालीन हार्मोन = एड्रिनेलिन
  • उपलब्धि की आवश्यकता (nAch): सीधे डेविड मैक्लीलैंड का नाम याद रखें।
  • आवश्यकता का पिरामिड (पदानुक्रम): अब्राहम मैस्लो का सिद्धांत (शिखर पर आत्म-सिद्धि है)।
  • जेम्स-लांगे सिद्धांत: शारीरिक प्रतिक्रिया पहले, संवेग बाद में (We cry, so we are sad).
  • इमोशनल इंटेलिजेंस (EQ): सीधे डेनियल गोलमैन पर टिक करें।

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