📌 कक्षा 11 भूगोल (NCERT) | अध्याय 9: सौर विकिरण, ऊष्मा संतुलन एवं तापमान (Solar Radiation, Heat Balance and Temperature)
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☀️ 1. सौर विकिरण और सूर्यताप (Solar Radiation & Insolation)
- सूर्यताप (Insolation): पृथ्वी की सतह को प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा को आने वाला सौर विकिरण या सूर्यताप कहते हैं।
- लघु तरंगें (Short Waves): सूर्य अत्यधिक गर्म पिंड है, इसलिए यह ऊर्जा का विकिरण लघु तरंगों के रूप में करता है।
- सौर स्थिरांक (Solar Constant): वायुमंडल के ऊपरी भाग पर प्राप्त होने वाली ऊर्जा की मात्रा 1.94 कैलोरी प्रति वर्ग सेमी प्रति मिनट होती है।
- अपसौर और उपसौर (Aphelion & Perihelion):
- 🛰️ उपसौर (Perihelion): 3 जनवरी को पृथ्वी सूर्य के सबसे पास (
करोड़ किमी) होती है। इस दिन सूर्यताप थोड़ा अधिक मिलता है। - 🛰️ अपसौर (Aphelion): 4 जुलाई को पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर (
करोड़ किमी) होती है।
- 🛰️ उपसौर (Perihelion): 3 जनवरी को पृथ्वी सूर्य के सबसे पास (
📊 सूर्यताप के वितरण को प्रभावित करने वाले कारक:
- सूर्यांश का कोण (Angle of Sun's rays): भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं (अधिक गर्मी), ध्रुवों पर तिरछी (कम गर्मी)।
- दिन की अवधि (Length of the day): दिन जितना लंबा होगा, सूर्यताप उतना ही अधिक मिलेगा।
- वायुमंडल की पारदर्शिता: बादल, धूलकण और गैसें सूर्यताप को रोकती या बिखेरती हैं।
🌡️ 2. वायुमंडल का गर्म और ठंडा होना (Heating and Cooling of Atmosphere)
वायुमंडल सूर्य से आने वाली सीधी किरणों से उतना गर्म नहीं होता, जितना पृथ्वी से टकराकर वापस जाने वाली गर्मी से होता है। यह 4 प्रक्रियाओं द्वारा गर्म होता है:
- चालन (Conduction): जब दो अलग-अलग तापमान वाली वस्तुएं आपस में संपर्क में आती हैं, तो गर्मी अधिक गर्म वस्तु से ठंडी वस्तु की ओर जाती है (यह केवल निचली परत को गर्म करता है)।
- संवहन (Convection): हवा गर्म होकर हल्की हो जाती है और ऊपर उठती है। ऊपर की ठंडी हवा नीचे आती है। यह चक्र केवल गैसीय और तरल माध्यमों में चलता है।
- अभिवहन (Advection): वायु के क्षैतिज (Horizontal/समानांतर) संचलन से ऊष्मा का स्थानांतरण। गर्मियों में चलने वाली स्थानीय गर्म हवा 'लू' (Loo) अभिवहन का ही उदाहरण है।
- पार्थिव विकिरण (Terrestrial Radiation) - 가장 중요: पृथ्वी सूर्य से लघु तरंगों में ऊर्जा लेकर गर्म होती है, और फिर खुद एक गर्म पिंड बनकर दीर्घ तरंगों (Long Waves) के रूप में ऊर्जा छोड़ती है। वायुमंडल इसी दीर्घ तरंग ऊर्जा को सोखकर गर्म होता है।
⚖️ 3. पृथ्वी का ऊष्मा बजट / ऊष्मा संतुलन (Heat Budget of the Earth)
पृथ्वी न तो लगातार गर्म हो रही है और न ठंडी, क्योंकि जितनी ऊर्जा सूर्य से आती है, उतनी ही वापस अंतरिक्ष में लौट जाती है। इसे ही ऊष्मा बजट कहते हैं।
मान लेते हैं कि सूर्य से कुल 100 इकाइयाँ (Units) ऊर्जा चली:
🚫 A. धरातल पर पहुंचने से पहले नष्ट (35 इकाइयाँ) - इसे पृथ्वी का 'एल्बीडो' कहते हैं:
- 27 इकाइयाँ - बादलों के ऊपरी छोर से परावर्तित।
- 2 इकाइयाँ - पृथ्वी के बर्फ से ढके क्षेत्रों द्वारा परावर्तित।
- 6 इकाइयाँ - अंतरिक्ष में बिखराव (Scattering) द्वारा। (यह 35 इकाइयाँ बिना पृथ्वी को गर्म किए वापस चली जाती हैं।)*
📥 B. अवशोषित ऊर्जा (65 इकाइयाँ):
- 14 इकाइयाँ - वायुमंडल सीधे सोख लेता है।
- 51 इकाइयाँ - पृथ्वी के धरातल तक पहुँचती हैं।
📤 C. पृथ्वी द्वारा वापस लौटाया गया बजट (51 इकाइयाँ):
- 17 इकाइयाँ - सीधे अंतरिक्ष में वापस चली जाती हैं।
- 34 इकाइयाँ - वायुमंडल द्वारा अवशोषित की जाती हैं (9 चालन/संवहन से + 19 संघनन की गुप्त ऊष्मा से + 6 सीधे विकिरण से)।
🧮 कुल संतुलन: वायुमंडल की अपनी 14 + पृथ्वी से मिली 34 = 48 इकाइयाँ वायुमंडल से अंतरिक्ष में वापस जाती हैं। कुल मिलाकर
इकाइयाँ वापस चली गईं। आया 65, गया 65 ➔ संतुलन = 0।
📈 4. तापमान का वितरण और उसे प्रभावित करने वाले कारक (Temperature Distribution)
🌍 तापमान को प्रभावित करने वाले तत्व:
- अक्षांश (Latitude): भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर तापमान घटता है।
- उत्तुंगता / ऊंचाई (Altitude): समुद्र तल से ऊपर जाने पर तापमान घटता है (165 मीटर पर 1°C)। यही कारण है कि गर्मी में भी शिमला-ऊटी ठंडे रहते हैं।
- समुद्र से दूरी: समुद्र के पास समकारी जलवायु (न ज्यादा गर्मी, न ठंड) होती है, जबकि अंदरूनी भागों (जैसे दिल्ली) में विषम जलवायु होती है।
- कोष्ण एवं शीत महासागरीय धाराएँ: गर्म धाराएं तटीय तापमान बढ़ा देती हैं और ठंडी धाराएं घटा देती हैं।
🔄 5. तापमान का व्युत्क्रमण / प्रतिलोमन (Inversion of Temperature)
- सामान्य नियम: ऊपर जाने पर तापमान घटता है।
- विशेष स्थिति (व्युत्क्रमण): जब विशेष परिस्थितियों में ऊंचाई के साथ तापमान घटने के बजाय बढ़ने लगता है, तो उसे तापमान का व्युत्क्रमण कहते हैं। यानी नीचे ठंडी हवा और ऊपर गर्म हवा की परत।
- शर्तें: लंबी और ठंडी रातें, साफ आसमान, शांत हवा और बर्फ से ढकी जमीन।
- घाटी व्युत्क्रमण (Valley Inversion): सर्दियों में पहाड़ियों की ठंडी और भारी हवा ढलान से नीचे उतरकर घाटी की तली में जमा हो जाती है, जिससे घाटियों में पाला (Frost) पड़ता है। इसलिए पहाड़ी लोग बस्तियां ढलानों पर बनाते हैं, घाटी में नहीं।
🔥 6. Exam-Points: परीक्षा के लिए अति महत्वपूर्ण तथ्य (BSEB, CUET, SSC)
- ✅ पृथ्वी का एल्बीडो (Albedo) कितना है? ➔ 35% (या 35 इकाइयाँ)।
- ✅ वायुमंडल मुख्य रूप से किस विकिरण से गर्म होता है? ➔ दीर्घ तरंग पार्थिव विकिरण (Long-wave Terrestrial Radiation) से।
- ✅ उत्तर भारत में चलने वाली 'लू' (Loo) किसका उदाहरण है? ➔ अभिवहन (Advection) का।
- ✅ उपसौर (Perihelion) की घटना किस तिथि को होती है? ➔ 3 जनवरी को।
- ✅ तापमान प्रतिलोमन के लिए सबसे आदर्श स्थिति क्या है? ➔ जाड़े की लंबी रातें और साफ आसमान।
- ✅ समताप रेखाएं (Isotherms) क्या हैं? ➔ समान तापमान वाले स्थानों को मिलाने वाली काल्पनिक रेखाएं।
📝 7. त्वरित सारांश (Quick Summary)
सूर्य से आने वाली लघु किरणें पृथ्वी को गर्म करती हैं, जिसे सूर्यताप कहते हैं। पृथ्वी इस गर्मी को दीर्घ तरंगों के रूप में वापस अंतरिक्ष में छोड़ती है। इसी जाने वाली गर्मी (पार्थिव विकिरण) से हमारा वायुमंडल गर्म होता है। पृथ्वी का ऊष्मा बजट एकदम सटीक है; 35% गर्मी तो बिना छुए बर्फ और बादलों से वापस भाग जाती है (एल्बीडो), और बाकी 65% आकर वापस लौट जाती है। कभी-कभी पहाड़ों पर रात में नियम बदल जाता है और नीचे ठंड व ऊपर गर्मी हो जाती है, जिसे तापमान का पलटना (व्युत्क्रमण) कहते हैं।
🏁 8. निष्कर्ष (Conclusion)
सौर विकिरण और ऊष्मा संतुलन पृथ्वी के थर्मास्टैट (Thermostat) की तरह काम करते हैं। यदि यह बजट बिगड़ा, तो पृथ्वी या तो पूरी बर्फ की गेंद बन जाएगी या धधकती हुई आग। वर्तमान में मानवीय गतिविधियों और प्रदूषण के कारण वातावरण इस बजट को रोक रहा है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं।
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