Skip to content

BSEB Class 10 Sanskrit Chapter 13 Summary in Hindi

📜 Page 1 (श्लोक 1) ​

🕉️ Original Sanskrit Text ​

त्रयोदशः पाठः
शुकेश्वराष्टकम्

सनातनं पुरातनं परोपकार-साधनम्,
जनस्य कामपूरकं मनोजगर्वखर्वक्रम्।
शुकेश्वरं नमाम्यहं शुकेश्वरं नमाम्यहम्
शुकेश्वरं नमाम्यहं शुकेश्वरं नमाम्यहम्॥

🌼 Simple Hindi Translation ​

तेरहवाँ पाठ: शुकेश्वराष्टकम्

जो सनातन (अनादि), पुरातन (सबसे प्राचीन), परोपकार के साधन स्वरूप, मनुष्यों की कामनाओं को पूर्ण करने वाले और मन के गर्व (अहंकार) को चूर-चूर करने वाले हैं, उन भगवान शुकेश्वर (शिव) को मैं नमन करता हूँ, शुकेश्वर को मैं नमन करता हूँ।

📖 Word Meanings ​

  • पुरातनम् — प्राचीन / पुराना
  • कामपूरकम् — इच्छाओं को पूरा करने वाले
  • मनोजगर्वखर्वकरम् — मन के अहंकार को नष्ट करने वाले
  • नमाम्यहम् — मैं नमस्कार करता हूँ (नमामि + अहम्)

💡 Meaning and Simple Explanation ​

इस परिचयात्मक श्लोक में भगवान शिव (शुकेश्वर महादेव) के शाश्वत और कल्याणकारी स्वरूप की वंदना की गई है। वे काल से परे हैं, भक्तों के कष्ट दूर करने वाले और उनके भीतर के सबसे बड़े शत्रु—अहंकार का नाश करने वाले परम आराध्य हैं।

✨ Main Message ​

भगवान शिव अनादि काल से पूरी सृष्टि का कल्याण करने वाले और भक्तों का घमंड दूर कर उन्हें शालीन बनाने वाले देवाधिदेव हैं।


📜 Page 1 (श्लोक 2 और 3) ​

🕉️ Original Sanskrit Text ​

जगत्तमोविनाशकं सदाऽव्ययप्रदायकम्
सदाशयं सहायकं, सदाशिवं सुनायकम्। शुकेश्वरं ……

सतां सदा सुरक्षकं, दुराशयप्रबाधकम्
भजन्मनोविहारिणं, सदारिवृन्दपीडकम्। शुकेश्वरं ……..

🌼 Simple Hindi Translation ​

जो संसार के अंधकार (अज्ञान) का नाश करने वाले हैं, सदा अविनाशी मोक्ष पद देने वाले हैं, उत्तम विचार वाले (सदाशय), सबके सहायक, परम कल्याणकारी (सदाशिव) और श्रेष्ठ नायक हैं, उन भगवान शुकेश्वर को मैं नमन करता हूँ।

जो सज्जनों (सतां) की सदा रक्षा करने वाले हैं, बुरे विचार वाले दुष्टों को बाधा पहुँचाने (रोकने) वाले हैं, भजन करने वाले भक्तों के मन में विहार करने वाले और शत्रुओं के समूह को पीड़ा देने वाले हैं, उन भगवान शुकेश्वर को मैं नमन करता हूँ।

📖 Word Meanings ​

  • जगत्तमोविनाशकम् — संसार के अंधकार या अज्ञान को मिटाने वाले
  • सदाऽव्ययप्रदायकम् — हमेशा मोक्ष या अक्षय पद देने वाले
  • सताम् — सज्जनों की / संतों की
  • दुराशयप्रबाधकम् — दुराचारियों या बुरों को रोकने वाले
  • सदारिवृन्दपीडकम् — हमेशा शत्रुओं के समूह को नष्ट करने वाले

💡 Meaning and Simple Explanation ​

इन श्लोकों में शिवजी को न्यायप्रिय और रक्षक रूप में दर्शाया गया है। वे केवल आंतरिक अज्ञान का नाश नहीं करते, बल्कि सांसारिक जीवन में भी सज्जनों की रक्षा करते हैं और दुष्ट प्रवृत्ति के लोगों का दमन करते हैं। जो सच्चे मन से उनका भजन करता है, वे उसके हृदय में निवास करते हैं।

✨ Main Message ​

ईश्वर सत्य और न्याय के रक्षक हैं, जो सज्जनों का कल्याण करते हैं और दुष्टों का दमन कर धर्म की स्थापना करते हैं।


📜 Page 1 (श्लोक 4 और 5) ​

🕉️ Original Sanskrit Text ​

उमापतिं सतीपतिं, नमामि तं महागतिम्
नमामि कालिकापतिं, नमामि तारिकापतिम्। शुकेश्वरं……..

जटायुतं त्रिलोचनं त्रिमार्गगार्द्रमस्तकम्
गजस्य चर्मधारिणं त्रिशूलशस्त्रधारिणम्। शुकेश्वरं ……

🌼 Simple Hindi Translation ​

जो माता उमा के पति हैं, सती के पति हैं, उन परम आश्रय (महागति) स्वरूप को मैं नमन करता हूँ। मैं कालिका के पति और तारिका के पति को नमन करता हूँ, उन भगवान शुकेश्वर को मैं नमन करता हूँ।

जो जटाओं से युक्त हैं, तीन आँखों वाले (त्रिलोचन) हैं, जिनका मस्तक तीन मार्गों से बहने वाली गंगा जी (त्रिमार्गगा) के जल से भीगा हुआ है, जो हाथी की खाल (गजचर्म) धारण करने वाले और त्रिशूल रूपी अस्त्र धारण करने वाले हैं, उन भगवान शुकेश्वर को मैं नमन करता हूँ।

📖 Word Meanings ​

  • महागतिम् — अंतिम आश्रय या परम मोक्ष का मार्ग
  • त्रिमार्गगार्द्रमस्तकम् — तीनों लोकों में बहने वाली गंगा जी से भीगे मस्तक वाले
  • त्रिलोचनम् — तीन आँखों वाले
  • शस्त्रधारिणम् — हथियार धारण करने वाले

💡 Meaning and Simple Explanation ​

यहाँ शिवजी के विभिन्न दिव्य नामों (उमापति, सतीपति) और उनके अलौकिक रूप का काव्यात्मक चित्रण है। जटाओं में गंगा को धारण करना, त्रिशूल धारण करना और हाथी की खाल लपेटना—यह सब उनके वैरागी और संहारक दोनों रूपों की दिव्यता को प्रकट करता है।

✨ Main Message ​

भगवान शिव आदिशक्ति के स्वामी और अलौकिक वेशभूषा धारण करने वाले चराचर जगत के परम नियंता हैं।


📜 Page 1 (श्लोक 6 और 7) ​

🕉️ Original Sanskrit Text ​

नवेन्दुना सुभोभितं सुदिव्यपुष्पपूजितम्
मयूरगीततोषितं, सुभक्तिगीतकीर्तितम्। शुकेश्वरं ……

जलप्रियं महेश्वरं कृषेः फलप्रदायकम्
जनेश्वरं शुकेश्वरं, सुभूमिनित्यपालकम्। शुकेश्वरं ……

🌼 Simple Hindi Translation ​

जो बाल चंद्रमा (नवेन्दु) से सुशोभित हैं, दिव्य पुष्पों द्वारा पूजे जाते हैं, मोरों के गीतों (ध्वनि) से प्रसन्न होते हैं और सुंदर भक्ति गीतों द्वारा जिनका यशगान किया जाता है, उन भगवान शुकेश्वर को मैं नमन करता हूँ।

जिन्हें जल अत्यंत प्रिय है (अभिषेक प्रिय), जो महान ईश्वर (महेश्वर) हैं, खेती का उत्तम फल देने वाले हैं, मनुष्यों के स्वामी और इस सुंदर पृथ्वी का नित्य पालन करने वाले हैं, उन भगवान शुकेश्वर को मैं नमन करता हूँ।

📖 Word Meanings ​

  • नवेन्दुना — नए या बाल चंद्रमा के द्वारा
  • तोषितम् — संतुष्ट या प्रसन्न होने वाले
  • कृषेः फलप्रदायकम् — कृषि (खेती) का उत्तम फल देने वाले
  • सुभूमिनित्यपालकम् — इस सुंदर धरा का रोज़ पालन करने वाले

💡 Meaning and Simple Explanation ​

इन श्लोकों में शिवजी का प्रकृति से गहरा नाता दिखाया गया है। वे केवल कैलाश पर एकांत में नहीं रहते, बल्कि वे किसानों की फसलों को सींचने वाले, वर्षा और जल के प्रेमी तथा पूरी पृथ्वी का भरण-पोषण करने वाले व्यावहारिक देव भी हैं।

✨ Main Message ​

प्रकृति के रक्षक शिवजी संपूर्ण सृष्टि और कृषि व्यवस्था के आधार हैं, जो पूरी धरती का निरंतर पोषण करते हैं।


📜 Page 2 (श्लोक 8 और फलश्रुति) ​

🕉️ Original Sanskrit Text ​

सुबोधवं सुभक्तिवं सुभुक्तिमुक्तिदायकम्
चतुष्फलप्रदायकं, विशालम्भारकम्। शुकेश्वरं ……

इदं शुकेश्वराष्टकं तु वैद्यनाथकीर्तितम्
पठन्नरः सभक्ति यः, शिवो ददाति वाञ्छितम्। शुकेश्वरं ……

🌼 Simple Hindi Translation ​

जो सुंदर ज्ञान (सुबोध), उत्तम भक्ति, उत्तम भोग और मोक्ष प्रदान करने वाले हैं, चारों फलों (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) को देने वाले हैं तथा संसार के विशाल कष्टों का हरण करने वाले हैं, उन भगवान शुकेश्वर को मैं नमन करता हूँ।

वैद्यनाथ द्वारा रचित (कीर्तित) इस कल्याणकारी 'शुकेश्वराष्टकम्' का जो भी मनुष्य भक्ति के साथ पाठ करता है, भगवान शिव उसे उसका मनचाहा (वांछित) फल प्रदान करते हैं, उन भगवान शुकेश्वर को मैं नमन करता हूँ।

📖 Word Meanings ​

  • सुभुक्तिमुक्तिदायकम् — सुंदर सांसारिक सुख और मोक्ष दोनों देने वाले
  • चतुष्फलप्रदायकम् — चारों पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) को देने वाले
  • वैद्यनाथकीर्तितम् — वैद्यनाथ द्वारा रचा या गाया गया
  • वाञ्छितम् — मनचाहा फल या इच्छा

💡 Meaning and Simple Explanation ​

यह इस स्तोत्र की फलश्रुति (महत्व बताने वाला भाग) है। इसके रचयिता वैद्यनाथ जी हैं। इस श्लोक में बताया गया है कि शिव जी की आराधना से न केवल परलोक सुधरता है (मोक्ष), बल्कि इस लोक के सभी सुख और चार पुरुषार्थ भी सहज ही प्राप्त हो जाते हैं [0.1.26-0.1.27]।

✨ Main Message ​

सच्ची श्रद्धा से शिव आराधना करने वाले मनुष्य को जीवन के सभी भौतिक सुख और अंत में परम मोक्ष की प्राप्ति अवश्य होती है [0.1.26-0.1.27]।


📝 Brief Summary ​

इस 'शुकेश्वराष्टकम्' स्तोत्र में आठ श्लोकों के माध्यम से भगवान शुकेश्वर महादेव की महिमा, उनके स्वरूप (त्रिलोचन, जटाधारी) और उनके कृपालु स्वभाव का वर्णन है [0.1.26-0.1.27]। वे दुष्टों के नाशक, प्रकृति व कृषि के पोषक तथा धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष रूपी चारों फलों को देने वाले हैं। इसका पाठ करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं [0.1.26-0.1.27]।


🌟 Overall Summary ​

शुकेश्वराष्टकम् भगवान शिव को समर्पित एक परम पावन और भक्तिपूर्ण स्तोत्र है [0.1.26-0.1.27]। इसमें शिवजी को केवल संहारक के रूप में नहीं, बल्कि सृष्टि के पालनकर्ता, प्रकृति प्रेमी और कृषि के रक्षक के रूप में दिखाया गया है। उनके पारंपरिक स्वरूप (त्रिनेत्र, गंगाधर, पीतांबर/गजचर्म) की स्तुति करते हुए कवि स्पष्ट करते हैं कि वे भक्तों के अहंकार को दूर कर उन्हें ज्ञान और मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं। यह स्तोत्र जीवन के दुखों को हरने वाला और मनुष्य को चारों पुरुषार्थ प्रदान करने वाला एक दिव्य माध्यम है [0.1.26-0.1.27]।


📌 Main Teachings ​

  1. अहंकार की निवृत्ति: ईश्वर की शरण में जाने का पहला लाभ यह है कि मनुष्य के मन का घमंड (गर्व) नष्ट हो जाता है, जिससे अंतःकरण शुद्ध होता है।
  2. प्रकृति और कृषि का सम्मान: शिवजी को 'कृषेः फलप्रदायकम्' कहना यह सिखाता है कि हमारी अन्न व्यवस्था और प्रकृति भगवान शिव की ही कृपा पर आश्रित है, अतः हमें पर्यावरण का सम्मान करना चाहिए।
  3. संतुलित जीवन (भोग और मोक्ष): भगवान शिव केवल त्याग नहीं सिखाते; वे जीवन में उत्तम आजीविका (भुक्ति) भी देते हैं और अंत में मुक्ति भी प्रदान करते हैं।

📚 Important Sanskrit Words ​

Sanskrit WordSimple Hindi Meaning
मनोजगर्वमन के भीतर का घमंड या अहंकार
अव्ययप्रदायकम्कभी नष्ट न होने वाला मोक्ष पद देने वाले
त्रिमार्गगातीन रास्तों से बहने वाली (गंगा जी)
नवेन्दुःनया या द्वितीय तिथि का बाल चंद्रमा
चतुष्फलम्चार फल (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) [0.1.26-0.1.27]
वाञ्छितम्मनपसंद या चाही गई वस्तु [0.1.26-0.1.27]

Join the Discussion

Show Comments

No comments

No comments yet.

Post a Comment

Popular Post

हिंदी व्याकरण Ch 1 Important Questions & PYQ नोट्स

1. भाषा 📙 Book Based Questions ⚡ Competitive exam 📋 Bihar Board - Class 12 2. वर्ण-विचार 📚 Books Based Questions ⚡ Competitive exam 📋 Bihar Board - Class 10 📋 Bihar Board - Class 10 PYQ 📋 Bihar Board - Class 12 📋 Bihar Board - Class 12 PYQ Bihar Board - Class 12 Arts PYQ 3. वर्तनी ⚡ Competitive exam 4. विराम-चिह्ना 📙 Book Based Questions ⚡ Competitive exam Bihar Board - Class 12 Arts PYQ 🏁 निष्कर्ष (Conclusion) 1. भाषा ​ 📙 Book Based Questions ​ प्रश्‍न 1 : हिन्दी भाषा का प्रादुर्भाव किस भाषा से हुआ? पालि संस्कृत अपभ्रंश प्राकृत उत्तर : सही विकल्प (c) है। प्रश्‍न 2 : भारतीय आर्य भाषाओं को कितनी भाषाओं में विभाजित किया गया है? तीन चार पाँच दो उत्तर : सही विकल्प (a) है। प्रश्‍न 3 : प्राचीन भारतीय आर्य भाषा के अन्तर्गत कौन-सी भाषा आती है? वैदिक संस्कृत लौकिक संस्कृत अवहट्ठ 'a' तथा 'b' दोनों उत्तर : सही विकल्प (d) है। प्रश्‍न 4 : बौद्ध साहित्य की रचना किस भाषा से हुई? संस्कृत प्राकृत पालि अपभ्रंश उत्तर : सही विकल्प (c) है। प्रश्‍न 5 : मध्यकालीन आर्य भाषा की ती...
By Guddu Kumar
Class 11 Chemistry Chapter 1 Important Questions Hindi

Class 11 Chemistry Chapter 1 Important Questions Hindi

JEE Main, NDA, CBSE, BSEB, UP, PYQ, Sample Questions, Model Paper Question द्रव्य के गुणधर्म और उनका मापन (Properties of Matter and their Measurement) मापन में अनिश्चितता (Uncertainty in Measurement) परमाणु द्रव्यमान और आण्विक द्रव्यमान (Atomic and Molecular Masses) मोल-संकल्पना और मोलर द्रव्यमान (Mole Concept and Molar Masses) प्रतिशत संघटन (Percentage Composition) स्टॉइकियोंमीट्री और स्टॉइकियोंमीट्रिक परिकलन (Stoichiometry and Stoichiometric Calculations) 📝 निष्कर्ष (Conclusion) द्रव्य के गुणधर्म और उनका मापन (Properties of Matter and their Measurement) ​ 1995 प्रश्‍न 1 : दाब के विमा समान है- बल प्रति इकाई आयतन ऊर्जा प्रति इकाई आयतन बल ऊर्जा उत्तर : सही विकल्प () है। मापन में अनिश्चितता (Uncertainty in Measurement) ​ 1998 प्रश्‍न 2 : 161 cm, 0.161 cm तथा 0.0161 cm के लिए सार्थक संख्याएँ हैं- क्रमशः 3, 4 और 5 क्रमशः 3, 4 और 4 क्रमशः 3, 3 और 4 क्रमशः 3, 3 और 3 उत्तर : सही विकल्प () है। 2014 प्रश्‍न 3 : समान द्रव्यमान में H₂, O₂ और मिथेन को एक आयतन V के पात्र में 27°C पर समान परिस्थि...
By Guddu Kumar
निबंध-लेखन: Hindi Grammar Essay Format for BSEB & CBSE

निबंध-लेखन: Hindi Grammar Essay Format for BSEB & CBSE

✍️ 25. निबंध-लेखन (Essay Writing) ​ यह अध्याय BSEB (कक्षा 9, 10, 11, 12), CBSE, State Boards और अन्य सभी अकादमिक परीक्षाओं के लेखन खंड (Writing Section) का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा अंक दिलाने वाला विषय है। बोर्ड परीक्षाओं में यह प्रश्न प्रायः 8 से 10 अंकों के लिए पूछा जाता है। इस डिजिटल नोट्स में दी गई संरचना और ब्रह्मास्त्र ट्रिक्स की मदद से आप निबंध में अधिकतम अंक सुनिश्चित कर सकते हैं। CBSE, BSEB, UP, PYQ, Sample Questions, Model Paper Question ✍️ 25. निबंध-लेखन (Essay Writing) 🗺️ निबंध-लेखन का मास्टर माइंड मैप 🏗️ ① निबंध के तीन मुख्य स्तम्भ (The Ideal 3-Step Structure) 🧲 Ⓐ प्रस्तावना / भूमिका (Introduction) 📈 Ⓑ विषय-विस्तार (Body of the Essay) 🏁 Ⓒ उपसंहार (Conclusion) ⚙️ ② परीक्षा में पूरे अंक पाने के 5 सुनहरे नियम (Golden Rules) 📝 ③ लाइव मॉडल उदाहरण (Live Model Essay Segment) Bihar Board Class 12 Science PYQ 1. कोई अविस्मरणीय घटना 2. मेरा भारत महान् 3. पर्यटन का महत्व 4. मेरे प्रिय कवि 5. शहरी जीवन 6. यदि मैं प्रधानमंत्री हो जाऊँ 7. मेरे सपनों का भारत 8. भ्रष्टाचार का दान...
By Guddu Kumar

AvN Learn English

AvN Learn English

No blogs found in this list.

Share