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🕉️ Original Sanskrit Text
तृतीयः पाठः अच्युताष्टकम्
अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम् । श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे ॥1॥
🌼 Simple Hindi Translation
तीसरा पाठ: अच्युताष्टकम्
मैं अच्युत (जो कभी अपने स्वरूप से च्युत न हों), केशव, राम, नारायण, कृष्ण, दामोदर, वासुदेव, हरि, श्रीधर (लक्ष्मी जी को धारण करने वाले), माधव, गोपियों के प्रिय (गोपिकावल्लभ) और माता जानकी के स्वामी रामचंद्र जी की आराधना/भजन करता हूँ।
📖 Word Meanings
- अच्युतम् — अविनाशी / जो अपने स्वरूप से कभी अलग न हो
- गोपिकावल्लभम् — गोपियों के प्रिय स्वामी
- जानकीनायकम् — सीता जी के स्वामी
- भजे — मैं भजन या आराधना करता हूँ
💡 Meaning and Simple Explanation
इस प्रथम श्लोक में भगवान विष्णु के दो प्रमुख अवतारों—श्री राम और श्री कृष्ण के कल्याणकारी नामों का संकीर्तन किया गया है। भक्त प्रभु को उनके विविध मधुर नामों से पुकारते हुए उनके दिव्य स्वरूप में मन लगाता है।
✨ Main Message
सृष्टि के कण-कण में व्याप्त भगवान राम और कृष्ण एक ही परमेश्वर के रूप हैं, जिनका निरंतर भजन करना जीव के कल्याण का मार्ग है।
📜 Page 1 (श्लोक 2)
🕉️ Original Sanskrit Text
अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम् । इन्दिरामन्दिरं चेतसा सुन्दरं देवकीनन्दनं नन्दजं सन्दधे ॥2॥
🌼 Simple Hindi Translation
मैं अच्युत, केशव, सत्यभामा के स्वामी (माधव), लक्ष्मीपति (श्रीधर), श्री राधा जी द्वारा पूजित (राधिकारोधित), लक्ष्मी जी के निवास स्थान (इन्दिरामन्दिर), मन से परम सुंदर, देवकी के पुत्र और नंद जी से उत्पन्न (नन्दज) श्रीकृष्ण का अपने हृदय में ध्यान करता हूँ।
📖 Word Meanings
- सत्यभामाधवम् — सत्यभामा के पति (श्रीकृष्ण)
- राधिकाराधितम् — राधा जी द्वारा पूजे गए
- इन्दिरामन्दिरम् — इंदिरा (लक्ष्मी जी) के निवास स्थान
- नन्दजम् — नंद जी के पुत्र
- सन्दधे — मैं हृदय में धारण या ध्यान करता हूँ
💡 Meaning and Simple Explanation
इस श्लोक में भगवान कृष्ण के वैभवशाली और प्रेमपूर्ण स्वरूप को दर्शाया गया है। वे जहाँ एक ओर लक्ष्मी और सत्यभामा के स्वामी हैं, वहीं दूसरी ओर राधा जी के प्रेमपूर्ण आराध्य भी हैं। वे देवकी और नंदबाबा दोनों के आनंद का कारण हैं।
✨ Main Message
भगवान अपने भक्तों के प्रेम के वश में होकर विविध रूप धारण करते हैं और मन को एकाग्र करके उनका ध्यान करना ही सच्ची साधना है।
📜 Page 1 (श्लोक 3)
🕉️ Original Sanskrit Text
विष्णवे जिष्णवे शङ्खिखने चक्रिणे रुक्मिणीरागिणे जानकीजानये । बल्लवी-वल्लभाया र्चितायात्मने कंसविध्वंसिने वंशिने ते नमः ॥३॥
🌼 Simple Hindi Translation
सर्वव्यापी विष्णु, सर्वविजेता (जिष्णु), शंखधारी, चक्रधारी, रुक्मिणी से प्रेम करने वाले, जानकी के पति (श्रीराम), गोपियों के प्रिय, पूजनीय परमात्मा, कंस का विनाश करने वाले और बांसुरी धारण करने वाले आपको (हे प्रभु!) मेरा नमस्कार है।
📖 Word Meanings
- जिष्णवे — विजय शील या सर्वविजेता भगवान को
- शङ्खिखने — शंख धारण करने वाले को
- रुक्मिणीरागिणे — रुक्मिणी जी से अनुराग रखने वाले को
- बल्लवी-वल्लभाय — गोपियों के प्रियतम को
- कंसविध्वंसिने — कंस का समूल नाश करने वाले को
- ते नमः — आपको नमस्कार है
💡 Meaning and Simple Explanation
यहाँ भगवान के ऐश्वर्य और पराक्रम का वर्णन है। वे दुष्टों का संहार करने के लिए सुदर्शन चक्र और शंख धारण करते हैं तथा भक्तों को आनंद देने के लिए मुरली बजाते हैं। वे ही राम रूप में जानकी के पति और कृष्ण रूप में रुक्मिणी के प्रिय हैं।
✨ Main Message
दुष्टों का नाश करने वाले और धर्म की रक्षा करने वाले पराक्रमी व करुणामयी परमेश्वर को बारंबार नमन है।
📜 Page 1 (श्लोक 4)
🕉️ Original Sanskrit Text
कृष्ण गोविन्द हे राम नारायण श्रीपते वासुदेवाजित श्रीनिधे । अच्युतानन्त हे माधवाधोक्षज द्वारकानायक द्रौपदीरक्षक ॥4॥
🌼 Simple Hindi Translation
हे कृष्ण! हे गोविंद! हे राम! हे नारायण! हे लक्ष्मीपति (श्रीपते)! हे वासुदेव! हे अजेय (अजित)! हे शोभा के भंडार (श्रीनिधे)! हे अच्युत! हे अनंत! हे माधव! हे अधोक्षज (इंद्रियों से परे)! हे द्वारका के स्वामी! हे द्रौपदी की लाज बचाने वाले (रक्षक)!
📖 Word Meanings
- श्रीपते — श्री (लक्ष्मी जी) के स्वामी
- श्रीनिधे — दिव्य संपदा या कांति के भंडार
- अधोक्षज — जिनका ज्ञान इंद्रियों द्वारा न हो (परमेश्वर)
- द्रौपदीरक्षक — संकट के समय द्रौपदी की रक्षा करने वाले
💡 Meaning and Simple Explanation
यह श्लोक भगवान को संकट के समय पुकारने वाले मधुर नामों का संकलन है। विशेष रूप से 'द्रौपदीरक्षक' कहकर यह याद दिलाया गया है कि जब भी कोई भक्त संकट में व्याकुल होकर प्रभु को पुकारता है, वे उसकी रक्षा के लिए तुरंत चले आते हैं。
✨ Main Message
ईश्वर असीम और अजेय हैं, जो संकट के समय पुकारने पर अपने शरणागत भक्तों की रक्षा अवश्य करते हैं।
📜 Page 2 (श्लोक 5)
🕉️ Original Sanskrit Text
राक्षसक्षोभितः सीतया शोभितो दण्डकारण्य-भूपुण्यता-कारणः । लक्ष्मणेनान्वितो वानरैः सेवितो- ऽगस्त्यसम्पूजितो राघवः पातु माम् ॥5॥
🌼 Simple Hindi Translation
जो राक्षसों को भयभीत करने वाले हैं, माता सीता के साथ सुशोभित हैं, जिन्होंने दंडकारण्य की धरती को पवित्र किया, जो भाई लक्ष्मण के साथ रहते हैं, वानरों द्वारा जिनकी सेवा की जाती है और महर्षि अगस्त्य द्वारा जो पूजे गए हैं—वे रघुकुल शिरोमणि श्री रामचंद्र जी मेरी रक्षा करें।
📖 Word Meanings
- राक्षसक्षोभितः — राक्षसों को उद्वेलित/भयभीत करने वाले
- दण्डकारण्य-भूपुण्यता-कारणः — दंडक वन की भूमि को पवित्र करने वाले
- लक्ष्मणेनान्वितः — लक्ष्मण जी के साथ रहने वाले
- पातु माम् — मेरी रक्षा करें
💡 Meaning and Simple Explanation
इस श्लोक में भगवान श्री राम के वनवास काल के दिव्य चरित्र का स्मरण कराया गया है। उन्होंने वन में जाकर संतों (जैसे अगस्त्य मुनि) की रक्षा की, राक्षसों के आतंक को समाप्त किया और साधारण वानरों को भी अपनी सेवा का सौभाग्य दिया।
✨ Main Message
दुष्टों का भय दूर करने वाले और संतों व पवित्र भूमि का उद्धार करने वाले प्रभु श्री राम सदा हमारी रक्षा करते हैं।
📜 Page 2 (श्लोक 6)
🕉️ Original Sanskrit Text
धेनुकारिष्टकोऽनिष्टकृद् द्वेषीणां केशिहा कंसहृद्वंशिकावादकः । पूतनाकोपकः सूरजाखेलनो बालगोपालकः पातु मां सर्वदा ॥6॥
🌼 Simple Hindi Translation
जो धेनुकासुर और अरिष्टासुर जैसे शत्रुओं का अनिष्ट (विनाश) करने वाले हैं, केशी नामक राक्षस का वध करने वाले (केशिहा), कंस के हृदय को कंपाने वाले, सुंदर बांसुरी बजाने वाले, पूतना पर क्रोध करने वाले (उसका वध करने वाले), यमुना नदी (सूरजा) के तट पर क्रीड़ा करने वाले वे बालगोपाल (श्रीकृष्ण) सदा मेरी रक्षा करें।
📖 Word Meanings
- केशिहा — केशी नामक राक्षस का वध करने वाले
- कंसहृद् — कंस के हृदय को भयभीत करने वाले
- सूरजाखेलनो — सूर्य-पुत्री यमुना जी के जल या तट पर खेलने वाले
- सर्वदा — हमेशा / सब समय
💡 Meaning and Simple Explanation
यहाँ भगवान श्री कृष्ण की बाल-लीलाओं और उनके द्वारा किए गए असुर-वध की घटनाओं का स्मरण है। बालगोपाल रूप में भी वे इतने शक्तिशाली हैं कि पूतना, धेनुक और कंस जैसे भयंकर असुर उनका नाम सुनकर कांपते थे।
✨ Main Message
लीलाधारी बालगोपाल बाह्य रूप से जितने कोमल और आनंदमयी हैं, आंतरिक रूप से वे अधर्म का नाश करने वाले उतने ही सर्वशक्तिमान हैं।
📜 Page 2 (श्लोक 7)
🕉️ Original Sanskrit Text
विद्युदुद्योतवत्प्रस्फुरद्वाससं प्रावृडम्भोदवत्प्रोल्लसद्विग्रहम् । वन्यया मालया शोभितोरः स्थलं लोहिताङ्घ्रिद्वयं वारिजाक्षं भजे ॥7॥
🌼 Simple Hindi Translation
आकाश में चमकने वाली बिजली के समान देदीप्यमान (पीतांबर) वस्त्र धारण करने वाले, वर्षा ऋतु के बादलों (सघन मेघ) की तरह परम सुशोभित श्याम शरीर वाले, गले में जंगली फूलों की वैजयंती माला से सुशोभित वक्षस्थल वाले, लाल कोमल चरणों वाले और कमल के समान सुंदर नेत्रों (वारिजाक्ष) वाले भगवान श्रीकृष्ण का मैं भजन करता हूँ।
📖 Word Meanings
- विद्युदुद्योतवत् — बिजली की चमक के समान
- प्रावृडम्भोदवत् — वर्षा ऋतु के मेघों के समान
- शोभितोरःस्थलम् — सुंदर वक्षस्थल (छाती) वाले
- लोहिताङ्घ्रिद्वयम् — दो लाल कोमल चरणों वाले
- वारिजाक्षम् — कमल जैसी आँखों वाले (वारिज + अक्ष)
💡 Meaning and Simple Explanation
इस श्लोक में भगवान श्री कृष्ण के दिव्य और मनमोहक सौंदर्य का अनुपम काव्यात्मक वर्णन है। उनके श्याम वर्ण की तुलना सावन के मेघों से और उनके पीले वस्त्रों की तुलना बिजली की चमक से की गई है। वनमाला उनके सौंदर्य को और अलौकिक बनाती है।
✨ Main Message
परमेश्वर का दिव्य रूप परम सौंदर्यमयी है, जो भक्त के हृदय को शीतलता और असीम आनंद प्रदान करता है।
📜 Page 2 (श्लोक 8)
🕉️ Original Sanskrit Text
कुञ्चितैः कुन्तलैर्भाजमानाननं रत्नमौलिं लसत्कुण्डलं गण्डयोः । हारकेयूरकं कङ्कणप्रोज्ज्वलं किङ्किणीमञ्जुलं श्यामलं तं भजे ॥8॥ (तुम अगर साथ देने का वादा करो - इति लयेन)
🌼 Simple Hindi Translation
घुंघराले बालों से सुशोभित मुखमंडल वाले, सिर पर रत्नों का मुकुट धारण किए हुए, जिनके गालों (गण्डयोः) पर सुंदर कुंडल डोल रहे हैं, जो सुंदर हार, बाजूबंद (केयूर) और चमकदार कंगन पहने हुए हैं तथा जिनकी करधनी (किङ्किणी) की आवाज़ अत्यंत मधुर है, उन श्यामवर्ण भगवान का मैं भजन करता हूँ। (नोट: इस स्तोत्र को "तुम अगर साथ देने का वादा करो…" गीत की लय पर गाया जा सकता है)
📖 Word Meanings
- कुञ्चितैः कुन्तलैः — घुंघराले केशों (बालों) से
- रत्नमौलिम् — रत्नों से जड़ित मुकुट वाले
- गण्डयोः — दोनों गालों पर
- हारकेयूरकम् — गले का हार और बाजूबंद
- किङ्किणीमञ्जुलम् — घुंघरुओं/करधनी की मधुर ध्वनि वाले
💡 Meaning and Simple Explanation
अच्युताष्टकम् के इस अंतिम श्लोक में श्री कृष्ण के श्रृंगारिक रूप का वर्णन है [0.1.6-0.1.7]। उनके घुंघराले बाल, कानों के झिलमिलाते कुंडल और अंगों पर सजे आभूषण उनके श्याम रंग पर अत्यंत आकर्षक लगते हैं।
✨ Main Message
भगवान का मनोहारी आभूषण-युक्त स्वरूप हर जीव के कष्टों को दूर कर मन में सात्विक आनंद का संचार करता है।
📝 Brief Summary
इस संपूर्ण अच्युताष्टकम् स्तोत्र में आदिगुरु शंकराचार्य जी ने भगवान विष्णु के अच्युत, राम और कृष्ण अवतारों के मधुर नामों, उनके शौर्य, उनकी शरणागत-रक्षणशीलता (जैसे द्रौपदी की रक्षा), और उनके अलौकिक आभूषणमयी सौंदर्य का आठ श्लोकों में अत्यंत भावपूर्ण गान किया है [0.1.6-0.1.7]।
🌟 Overall Summary
अच्युताष्टकम् भगवान श्री विष्णु, श्री राम और श्री कृष्ण की स्तुति का एक अत्यंत पावन और प्रसिद्ध स्तोत्र है [0.1.6-0.1.7]। इन आठ श्लोकों के माध्यम से भक्त प्रभु के विभिन्न कल्याणकारी रूपों और लीलाओं का स्मरण करता है [0.1.6-0.1.7]। इसमें जहाँ एक ओर प्रभु राम द्वारा दंडकारण्य को पवित्र करने और राक्षसों का संहार करने का प्रसंग है, वहीं दूसरी ओर श्री कृष्ण द्वारा कंस, पूतना आदि असुरों के वध और उनकी अनुपम बाल-लीलाओं व श्रृंगार का सुंदर वर्णन है [0.1.6-0.1.7]। यह स्तोत्र ईश्वर की सर्वव्यापकता, दयालुता और परम सौंदर्य को प्रकट करते हुए जीव को नाम-स्मरण के लिए प्रेरित करता है [0.1.6-0.1.7]।
📌 Main Teachings
- नाम-संकीर्तन की महिमा: ईश्वर के पवित्र नामों (गोविंद, माधव, नारायण) का श्रद्धापूर्वक गान करने से मन शांत और शुद्ध होता है।
- अभयदान और शरणागति: भगवान अजेय और सर्वशक्तिमान हैं, जो द्रौपदी जैसी परम भक्तों की पुकार सुनकर उनकी लाज और प्राणों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
- राम-कृष्ण की एकता: यह स्तोत्र स्पष्ट संदेश देता है कि श्री राम और श्री कृष्ण एक ही परम चेतना (विष्णु) के विभिन्न रूप हैं, इसलिए दोनों ही समान रूप से पूजनीय हैं [0.1.6-0.1.7]।
📚 Important Sanskrit Words
| Sanskrit Word | Simple Hindi Meaning |
|---|---|
अच्युतम् | जो कभी नष्ट न हो / अविनाशी |
श्रीपतिः | लक्ष्मी जी के स्वामी (भगवान विष्णु/कृष्ण) |
जिष्णुः | सदैव विजयी होने वाले |
अधोक्षजः | जो इंद्रियों की पहुंच से परे हों |
पातु माम् | मेरी रक्षा करें |
वारिजाक्षम् | कमल के समान सुंदर नेत्रों वाले |
किङ्किणी | कमर में बांधी जाने वाली घंटी/करधनी |
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