🌍 इकाई-1 (ङ): शक्ति (ऊर्जा) संसाधन (Energy Resources)
① ⚡ ऊर्जा संसाधन का अर्थ एवं महत्व (Meaning & Importance)
- विकास की कुंजी: शक्ति या ऊर्जा किसी भी देश के विकास और औद्योगिकीकरण का मुख्य आधार स्तंभ है.
- ऐतिहासिक क्रम: मानव ने शुरुआत में शारीरिक शक्ति का प्रयोग किया, फिर पशुओं का, और 18वीं शताब्दी की औद्योगिक क्रांति के बाद कोयले से वाष्प-शक्ति का विकास हुआ. इसके बाद पेट्रोलियम और वर्तमान में परमाणु ऊर्जा का विकास हुआ.
- वाणिज्यिक ऊर्जा स्रोत (Commercial Energy): कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जल विद्युत और आणविक ऊर्जा को व्यावसायिक कार्यों में उपयोग के कारण वाणिज्यिक ऊर्जा स्रोत कहा जाता है.
② 📊 ऊर्जा संसाधनों का वर्गीकरण (Classification of Energy)
ऊर्जा संसाधनों को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया गया है:
Ⓐ उपयोग स्तर के आधार पर:
- ☀️ सतत्/अक्षय ऊर्जा: जो कभी समाप्त नहीं होती (जैसे- सौर किरणें, पवन, भूमिगत ऊष्मा, प्रवाहित जल).
- ⛽ समापनीय ऊर्जा: जो उपयोग के बाद समाप्त हो जाती है (जैसे- कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस).
Ⓑ उपयोगिता के आधार पर:
- 🔥 प्राथमिक ऊर्जा: जो सीधे प्रकृति से प्राप्त ईंधन हैं (जैसे- कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, रेडियोधर्मी खनिज).
- 💡 गौण (Secondary) ऊर्जा: जैसे विद्युत, क्योंकि इसे प्राथमिक ऊर्जा स्रोतों की मदद से तैयार किया जाता है.
Ⓒ स्रोत की स्थिति के आधार पर:
- 🛑 क्षयशील: कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, आणविक खनिज.
- 🔄 अक्षयशील: प्रवाहित जल, पवन, लहरें, सौर शक्ति.
Ⓓ संरचनात्मक गुणों के आधार पर:
- 🧬 जैविक: मानव एवं प्राणी शक्ति.
- 🪨 अजैविक: जल शक्ति, पवन, सौर और खनिज ऊर्जा.
Ⓔ समय के आधार पर (💡 सबसे महत्वपूर्ण वर्गीकरण):
- 🏭 पारंपरिक ऊर्जा (Conventional): जीवाश्म ईंधन जो वर्षों से उपयोग हो रहे हैं और समाप्य हैं (जैसे- कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस).
- 🌀 गैर-पारंपरिक ऊर्जा (Non-Conventional): आधुनिक, नवीकरणीय और प्रदूषण मुक्त स्रोत (जैसे- सूर्य, पवन, ज्वार, परमाणु ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा).
🏭 ③ पारंपरिक ऊर्जा स्रोत (Conventional Energy Resources)
Ⓐ कोयला (Coal)
- भंडार: 1 जनवरी 2008 तक भारत में 1200 मीटर की गहराई तक कुल अनुमानित कोयला भंडार 26,454 करोड़ टन था.
- भूगर्भिक दृष्टि से वर्गीकरण (भारत के समस्त कोयला भंडार को दो मुख्य कालों में बाँटा जाता है):
- 🪵 गोंडवाना समूह: यह लगभग 20 करोड़ वर्ष पुराना है. भारत का 96% कोयला भंडार और 99% उत्पादन इसी समूह से होता है. यह मुख्यतः 4 नदी-घाटियों में पाया जाता है—दामोदर घाटी, सोन घाटी, महानदी घाटी, और वर्धा-गोदावरी घाटी.
- 🍂 टर्शियरी समूह: यह नया कोयला है (लगभग 5.5 करोड़ वर्ष पुराना) और घटिया किस्म का होता है. यह मुख्यतः असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नागालैंड में पाया जाता है.
🧪 कार्बन की मात्रा के आधार पर कोयले का वर्गीकरण:
- 💎 ऐंथ्रासाइट (Anthracite): सर्वोच्च कोटि (Best Quality) का कोयला है, जिसमें कार्बन 90% से अधिक होता है. यह जलने पर धुआँ नहीं देता और अत्यधिक ऊष्मा प्रदान करता है. इसे 'कोकिंग कोयला' भी कहते हैं जो धातु गलाने के काम आता है.
- 🧱 बिटुमिनस (Bituminous): इसमें 70% से 90% कार्बन होता है. भारत का अधिकतर कोयला इसी श्रेणी का है.
- 🟤 लिग्नाइट (Lignite): इसे 'भूरा कोयला' भी कहते हैं. इसमें कार्बन 30% से 70% होता है, यह कम ऊष्मा और अधिक धुआँ देता है. इसका 94% सुरक्षित भंडार तमिलनाडु के नेवेली में है.
- 🪵 पीट (Peat): सबसे निम्न कोटि का कोयला, जिसमें कार्बन 30% से भी कम होता है. यह पूर्व के दलदली भागों में पाया जाता है.
🗺️ भारत के मुख्य कोयला उत्पादक राज्य:
- झारखंड (प्रथम स्थान): देश का 30% से अधिक सुरक्षित भंडार और 23% से अधिक उत्पादन यहीं होता है. मुख्य क्षेत्र: झरिया, बोकारो, गिरिडीह, कर्णपुरा और रामगढ़ (दामोदर घाटी क्षेत्र). यहाँ से लोहा-इस्पात कारखानों को कोकिंग कोल भेजा जाता है.
- छत्तीसगढ़: देश का 15% सुरक्षित भंडार और उत्पादन में दूसरा बड़ा राज्य. मुख्य क्षेत्र: चिरिमिरी, कुरसिया, विश्रामपुर, कोरबा, और मांड-रायगढ़.
- ओडिशा: देश का 1/4 (25%) कोयला भंडार यहीं है. मुख्य क्षेत्र: तालचर (यहाँ का कोयला भाप और गैस बनाने के काम आता है).
- मध्य प्रदेश: मुख्य क्षेत्र: सिंगरौली (सबसे बड़ी कोयला परत), सोहागपुर, और उमरिया.
Ⓑ पेट्रोलियम (Petroleum) / खनिज तेल
- महत्व: यह आधुनिक युग का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और व्यापक रूप से उपयोगी ईंधन है, जिसके बिना कोई राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता. इससे गैसोलीन, डीजल, केरोसिन, स्नेहक (Lubricants), और प्लास्टिक/कृत्रिम रेशा का कच्चा माल प्राप्त होता है.
- इतिहास: भारत में पहली बार 1866 में ऊपरी असम घाटी में तेल के कुएँ खोदे गए। 1890 में डिगबोई में पहली बार व्यावसायिक तेल मिला. 1975 में मुम्बई हाई तेल क्षेत्र की खोज हुई.
🗺️ प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्र:
- उत्तरी-पूर्वी प्रदेश: देश का सबसे पुराना तेल क्षेत्र (असम घाटी, अरुणाचल, नागालैंड). मुख्य केंद्र: डिगबोई, नहरकटिया, मोरान और रुद्रसागर.
- गुजरात क्षेत्र: खम्भात बेसिन और गुजरात के मैदान में विस्तृत. मुख्य केंद्र: अंकलेश्वर, कलोल, नवगाँव और मेहसाना.
- मुम्बई हाई क्षेत्र: मुम्बई तट से 176 किमी दूर अरब सागर में स्थित है. यहाँ पानी के भीतर तेल के कुएँ खोदने के लिए 'सागर सम्राट' नामक विशाल तैरता हुआ जलयान मंच बनाया गया है. यह क्षेत्र भारत के कुल तेल उत्पादन का 66% भाग उत्पादित करता है.
- पूर्वी तट प्रदेश: कृष्णा-गोदावरी और कावेरी नदी बेसिन में विस्तृत. मुख्य केंद्र: नारीमनम और कोविलत्पल.
- बाड़मेर बेसिन: राजस्थान का मंगला तेल क्षेत्र (सितंबर 2009 से उत्पादन शुरू).
🧪 तेल परिष्करण (Oil Refining):
कुओं से निकला कच्चा तेल अशुद्ध होता है, जिसे रिफाइनरी में साफ किया जाता है. भारत का प्रथम तेल शोधक कारखाना 1901 में असम के डिगबोई में और दूसरा 1954 में मुम्बई में स्थापित हुआ. वर्तमान में देश में 18 से अधिक तेल परिष्करण केंद्र कार्य कर रहे हैं, जिसमें बिहार का बरौनी तेल शोधक कारखाना अत्यंत प्रसिद्ध है.
Ⓒ प्राकृतिक गैस (Natural Gas)
- उपयोग: मशीन चलाने, विद्युत उत्पादन, घरेलू रसोई गैस (LPG/PNG) और गाड़ियों में (CNG). भारत में इसका संचित भंडार 700 अरब घन मीटर है.
- संस्था: देश में प्राकृतिक गैस के परिवहन, वितरण और विपणन के लिए 1984 में प्राकृतिक गैस प्राधिकरण (GAIL) की स्थापना की गई.
⚡ ④ विद्युत शक्ति (Electric Power)
प्रति-व्यक्ति विद्युत उपभोग को आधुनिक विश्व में विकास का सूचकांक माना जाता है.
Ⓐ जल विद्युत (Hydro-Electricity):
यह बहते हुए जल की गतिज ऊर्जा से टरबाइन चलाकर बनाई जाती है, जो पूरी तरह अक्षयशील, नवीकरणीय और प्रदूषण मुक्त है. भारत में पहला जल विद्युत संयंत्र 1897 में दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) में तथा दूसरा शिवसमुद्रम् (कावेरी नदी, कर्नाटक) में स्थापित हुआ था.
🌊 भारत की प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ:
- भाखड़ा-नांगल परियोजना: सतलज नदी पर स्थित भारत की सबसे बड़ी परियोजना है. इसके बाँध की ऊँचाई 225 मीटर है. इससे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तराखंड लाभान्वित होते हैं.
- दामोदर घाटी परियोजना: दामोदर नदी पर झारखंड और पश्चिम बंगाल को बाढ़ से बचाने और 1300 मेगावाट बिजली उत्पादन हेतु बनाई गई. इसके तहत तिलैया, मैथन, कोनार और पंचेत पहाड़ियों पर बाँध बनाए गए हैं.
- कोशी परियोजना (उत्तर बिहार का गौरव): कोशी नदी पर नेपाल के हनुमान नगर में बाँध बनाकर 20,000 किलोवाट बिजली बनाई जाती है, जिसका आधा हिस्सा नेपाल को और आधा बिहार को मिलता है.
- रिहन्द परियोजना: सोन की सहायक रिहन्द नदी (उत्तर प्रदेश) पर स्थित है. इसके तहत बनी कृत्रिम झील का नाम 'गोविन्द बल्लभ पंत सागर' है. इसकी बिजली का उपयोग रेणुकूट के एल्यूमिनियम उद्योग में होता है.
- हीराकुड परियोजना: ओडिशा में महानदी पर स्थित विश्व का सबसे लम्बा बाँध (4801 मीटर) है.
Ⓑ ताप शक्ति (Thermal Power) & परमाणु शक्ति (Nuclear Power):
- ताप विद्युत (NTPC): कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को जलाकर बनाई जाने वाली बिजली. भारत में सर्वाधिक बिजली (लगभग 85%) तापीय स्रोतों से ही आती है.
- परमाणु ऊर्जा: उच्च अणुभार वाले रेडियोधर्मी खनिजों (यूरेनियम, थोरियम, मोनाजाइट) के विखंडन से प्राप्त ऊर्जा. मोनाजाइट बालू केरल के तटों पर प्रचुरता से मिलती है. यूरेनियम का विशाल भंडार झारखंड के जादूगोड़ा की खानों में है.
⚛️ भारत के 6 प्रमुख परमाणु विद्युत गृह (Most Important for Exams):
- 📍 तारापुर (महाराष्ट्र): 1955 में स्थापित एशिया का सबसे बड़ा परमाणु विद्युत गृह.
- 📍 राणाप्रताप सागर (कोटा, राजस्थान): चंबल नदी के किनारे कनाडा के सहयोग से स्थापित.
- 📍 कलपक्कम (तमिलनाडु): पूरी तरह स्वदेशी प्रयास से निर्मित रिएक्टर.
- 📍 नरौरा (उत्तर प्रदेश): बुलंदशहर के पास स्थित परमाणु केंद्र.
- 📍 ककरापारा (गुजरात): तटीय क्षेत्र में स्थित परमाणु विद्युत गृह.
- 📍 कैगा (कर्नाटक): कर्नाटक राज्य में स्थित परमाणु शक्ति केंद्र. (विशेष: तमिलनाडु में कुडनकूलम परमाणु गृह का निर्माण रूस के सहयोग से किया गया है)।
🌀 ⑤ गैर-पारंपरिक ऊर्जा के स्रोत (Non-Conventional Energy)
जीवाश्म ईंधनों के सीमित भंडार और बढ़ते प्रदूषण के कारण नवीकरणीय गैर-पारंपरिक स्रोतों का विकास अनिवार्य है:
- ☀️ सौर ऊर्जा: फोटोवोल्टाइक सेलों (Photovoltaic Cells) द्वारा सूर्य की किरणों को सीधे विद्युत में बदला जाता है. भारत के पश्चिमी भागों (गुजरात और राजस्थान) में इसकी असीम संभावनाएँ हैं.
- 💨 पवन ऊर्जा: पवन चक्कियों द्वारा टरबाइन चलाकर गतिज ऊर्जा को विद्युत में बदला जाता है. गुजरात के कच्छ में स्थित 'लाम्बा' का पवन ऊर्जा संयंत्र एशिया का सबसे बड़ा संयंत्र है. दूसरा बड़ा संयंत्र तमिलनाडु के तूतीकोरिन में है.
- 🌊 ज्वारीय तथा तरंग ऊर्जा: समुद्री ज्वार से बिजली बनाना. भारत में इसके लिए सर्वाधिक अनुकूल क्षेत्र खम्भात की खाड़ी (7000 मेगावाट की संभावना), कच्छ की खाड़ी और सुंदरवन हैं.
- 🌋 भूतापीय ऊर्जा: पृथ्वी के आंतरिक भाग के उच्च ताप (मैग्मा/गर्म चश्मों) से प्राप्त ऊर्जा. इसके मुख्य संयंत्र हिमाचल प्रदेश के मनीकरण और लद्दाख की पुगा/दुर्गा घाटी में स्थापित हैं.
- 🪵 बायोगैस (जैव ऊर्जा): ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि अपशिष्ट और पशुओं के गोबर के अपघटन से बनाई जाने वाली गैस, जिसे 'गोबर गैस प्लांट' भी कहते हैं. कचरे से ऊर्जा बनाने की बड़ी परियोजना दिल्ली के ओखला में शुरू की गई है.
🛡️ ⑥ ऊर्जा संसाधनों का संरक्षण (Conservation of Energy)
ऊर्जा संकट एक वैश्विक समस्या बन चुका है। इसके समाधान हेतु 4 मुख्य रणनीतियाँ अपनानी चाहिए
- मितव्ययिता (Efficiency): ऊर्जा के उपयोग में फिजूलखर्ची रोकना, जैसे गैर-जरूरी लाइटें बंद करना और अधिक माइलेज देने वाले वाहनों का उपयोग.
- नवीन क्षेत्रों की खोज: सुदूर संवेदी सूचना प्रणाली (Remote Sensing) की मदद से नए तेल और गैस भंडारों का पता लगाना.
- वैकल्पिक साधनों का उपयोग: पारंपरिक कोयला/पेट्रोलियम के स्थान पर सौर, पवन और बायोगैस जैसे पर्यावरण अनुकूल साधनों को प्राथमिकता देना.
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: वैश्विक मंचों (जैसे OPEC, WTO, UNO) के माध्यम से आपसी भेदमिटाकर नीति निर्धारण करना.
🎯 परीक्षा उपयोगी विशेष बिंदु (Exam High-Yield Pointers)
- ऐंथ्रासाइट = सर्वश्रेष्ठ कोयला (90%+ कार्बन, धुआँ रहित).
- गोंडवाना समूह = भारत का 96% कोयला देने वाला प्राचीन भूगर्भिक क्षेत्र.
- सागर सम्राट = मुम्बई हाई में समुद्र के भीतर तेल कुएँ खोदने वाला तैरता जहाज.
- गोविन्द बल्लभ पंत सागर = रिहन्द परियोजना (U.P.) के तहत बनी भारत की बड़ी कृत्रिम झील.
- तारापुर = एशिया का सबसे बड़ा और भारत का पहला परमाणु ऊर्जा केंद्र.
- लाम्बा (गुजरात) = एशिया का सबसे बड़ा पवन ऊर्जा संयंत्र.
- मनीकरण (H.P.) = भारत का प्रसिद्ध भूतापीय ऊर्जा (गर्म झरना) केंद्र.
📌 निष्कर्ष (Conclusion)
शक्ति या ऊर्जा संसाधन किसी भी आधुनिक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा हैं. जहाँ गोंडवाना समूह का कोयला, मुम्बई हाई का पेट्रोलियम और तारापुर की परमाणु शक्ति भारत की पारंपरिक ऊर्जा रीढ़ हैं, वहीं भविष्य की सुरक्षा गैर-पारंपरिक स्रोतों में निहित है. लाम्बा का पवन फार्म और मनीकरण की भूतापीय ऊर्जा सतत विकास (Sustainable Development) के नए मार्ग खोलते हैं। ऊर्जा की मितव्ययिता और नवीकरणीय विकल्पों का चयन ही देश को आगामी ऊर्जा संकट से सुरक्षित रख सकता है.
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