🌍 इकाई-1 (ग): वन एवं वन्य प्राणी संसाधन
① 🌲 वन एवं वन्य प्राणी : जीवन के सुरक्षा कवच
- महत्व: वन पृथ्वी के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह हैं, जो पारिस्थैतिक तंत्र (Ecosystem) के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सभी जीवों के लिए खाद्य ऊर्जा (Food Energy) का प्राथमिक स्रोत वनस्पति ही है।
- 💡 परिभाषा (Terminology):
- प्राकृतिक वन: पेड़-पौधों एवं झाड़ियों से ढका वह विशाल भू-भाग जो स्वतः विकसित होता है।
- मानव निर्मित वन (वानिकी): जो वन मनुष्यों द्वारा कृत्रिम रूप से विकसित किए जाते हैं।
- 🚨 ऐतिहासिक सच: मानव सभ्यता में 'आग' के आविष्कार के बाद सबसे पहली आहुति वनों और वन्य प्राणियों की ही हुई, क्योंकि आदिमानव ने भोजन पकाने हेतु वनों की लकड़ियों (ईंधन) का और भोजन हेतु वन्य जीवों का आखेट (शिकार) करना शुरू कर दिया।
② 📊 वन विस्तार : वैश्विक और भारतीय परिदृश्य (Forest Cover Status)
Ⓐ वैश्विक स्तर पर (Global Data):
- विश्व के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 30% भाग वनों से आच्छादित है।
- प्रथम स्थान: 🇷🇺 रूस (809 करोड़ हेक्टेयर वन क्षेत्र)।
- अन्य प्रमुख देश: ब्राजील (478 करोड़ हे०), कनाडा (310 करोड़ हे०), संयुक्त राज्य अमेरिका (303 करोड़ हे०), चीन (197 करोड़ हे०)।
- 📉 एफ०ए०ओ० (FAO) की वानिकी रिपोर्ट: वर्ष 1948 में विश्व में 4 अरब हेक्टेयर वन क्षेत्र था, जो वर्ष 1990 में घटकर 3.4 अरब हेक्टेयर बचा। हालांकि, वर्ष 2005 की रिपोर्ट के अनुसार इसमें कुछ सुधार हुआ और यह 3.952 अरब हेक्टेयर हो गया।
Ⓑ भारत के संदर्भ में (Indian Context):
- वन विस्तार के नजरिए से भारत विश्व का दसवां (10th) देश है, जहाँ करीब 68 करोड़ हेक्टेयर भूमि पर वन हैं।
- भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI - 2005) के अनुसार देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 20.60% भाग वनों के अंतर्गत आता है (कुल 67.71 करोड़ हेक्टेयर)।
- राज्यवार स्थिति:
- सर्वाधिक वनाच्छादित क्षेत्र: 🏞️ मध्य प्रदेश (देश के कुल वनों का 11.22% भाग)। इसके बाद क्रमशः अरुणाचल प्रदेश (10.01%), छत्तीसगढ़ (8.25%) और ओडिशा (7.18%) का स्थान है।
- भौगोलिक प्रतिशत में सर्वाधिक: 🏝️ अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (यहाँ के 90.3% भौगोलिक क्षेत्र पर वन विकसित हैं)।
- पूर्वोत्तर भारत: पूर्वोत्तर के 7 राज्यों में देश के कुल वनाच्छादित क्षेत्र का 25.11% हिस्सा पाया जाता है। भारत के 188 आदिवासी जिलों में देश के कुल वन क्षेत्र का 60.11% भाग मौजूद है।
Ⓒ ⚠️ बिहार में वनों की स्थिति (Forest Cover in Bihar):
- बिहार विभाजन (2000 ई० में झारखंड के अलग होने) के बाद बिहार में वनों की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है, क्योंकि यहाँ की अधिकांश भूमि अब कृषि योग्य मैदानी भाग है।
- बिहार के कुल भौगोलिक क्षेत्र का मात्र 7.1% भाग ही वनाच्छादित है (मात्र 6764.14 हेक्टेयर वन क्षेत्र)।
- बिहार के 38 जिलों में से मात्र 17 जिलों में ही मुख्य रूप से वन क्षेत्र बचे हैं। इनमें पश्चिमी चम्पारण, मुंगेर, बांका, जमुई, नवादा, नालंदा, गया, रोहतास, कैमूर और औरंगाबाद की स्थिति थोड़ी बेहतर है (कुल क्षेत्रफल लगभग 3700 वर्ग किमी)। शेष जिलों में केवल झाड़-झुरमुट ही बचे हैं।
🌳 ③ वृक्षों के घनत्व के आधार पर वनों का वर्गीकरण (Classification by Canopy Density)
वृक्षों के घनत्व के आधार पर भारतीय वनों को मुख्य रूप से पांच वर्गों में विभाजित किया गया है:
- 🪵 अत्यंत सघन वन (Very Dense Forest): जहाँ वृक्षों का घनत्व कुल भौगोलिक क्षेत्र का 70% से अधिक हो। भारत में इसका विस्तार 54.6 लाख हेक्टेयर भूमि (1.66%) पर है। (असम और सिक्किम को छोड़कर सभी पूर्वोत्तर राज्य इसी में आते हैं)।
- 🌿 सघन वन (Dense Forest): जहाँ वृक्षों का घनत्व 40% से 70% के बीच हो। इसके अंतर्गत देश की 73.60 लाख हेक्टेयर (3%) भूमि आती है। (हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, म०प्र०, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र)।
- 🍃 खुले वन (Open Forest): जहाँ वृक्षों का घनत्व 10% से 40% के बीच हो। इसका विस्तार 2.59 करोड़ हेक्टेयर भूमि (7.12%) पर है। (कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और ओडिशा)।
- 🌵 झाड़ियाँ एवं अन्य वन (Scrubs & Others): जहाँ वृक्षों का घनत्व 10% से भी कम हो। इसके अंतर्गत 2.459 करोड़ हेक्टेयर भूमि (8.68%) आती है। (राजस्थान का मरुस्थलीय क्षेत्र, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के मैदानी भाग)।
- 🌊 मैंग्रोव वन / तटीय वन (Mangrove Forest): विश्व के कुल मैंग्रोव क्षेत्र का मात्र 5% भाग (4,500 किमी) ही भारत के 12 तटीय राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में फैला है।
- सबसे बड़ा क्षेत्र: 🐅 पश्चिम बंगाल का सुंदरवन (47.6% भाग)। इसके बाद क्रमशः गुजरात (21% भाग) और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह (14% भाग) आते हैं।
👮 ④ प्रशासकीय दृष्टि से वनों का वर्गीकरण (Administrative Classification)
प्रशासनिक और सुरक्षा के दृष्टिकोण से सरकार ने वनों को तीन मुख्य श्रेणियों में बाँटा है:
- 🛡️ आरक्षित वन (Reserved Forest) [54%]: ये जलवायु, बाढ़ नियंत्रण और भूमि संरक्षण की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण और सबसे मूल्यवान वन होते हैं। इनमें लकड़ी काटना और पशुचारण पूर्णतः वर्जित (गैर-कानूनी) होता है।
- 🧱 रक्षित वन (Protected Forest) [29%]: इन वनों को अधिक नष्ट होने से बचाने के लिए सुरक्षा दी जाती है। इसमें विशेष नियमों के अधीन स्थानीय लोगों को सीमित रूप में लकड़ी काटने और पशुओं को चराने की सुविधा दी जाती है।
- 🌾 अवर्गीकृत वन (Unclassified Forest) [17%]: शेष सभी प्रकार के वन और बंजर भूमि जो सरकार, समुदायों या व्यक्तियों के स्वामित्व में होते हैं। इनमें लकड़ी काटने और पशु चराने पर सरकार की ओर से कोई प्रतिबंध नहीं होता, हालांकि सरकार इसके लिए कुछ शुल्क (टैक्स) ले सकती है।
🌟 परीक्षा का अचूक मंत्र (Exam Pointer) आरक्षित (Reserved) एवं रक्षित (Protected) वनों का सबसे अधिक विस्तार मध्य प्रदेश (M.P.) में है, जहाँ के कुल वन क्षेत्र का 75% भाग इसी श्रेणी के अंतर्गत आता है।
📉 ⑤ वन संपदा और वन्य जीवों का ह्रास (Depletion of Forests & Wildlife)
- उपनिवेश काल (ब्रिटिश शासन): अंग्रेजों ने अपने व्यापारिक और प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए रेल मार्गों और सड़कों का बड़े पैमाने पर विकास किया, जिससे भारतीय वनों का अंधाधुंध विदोहन शुरू हुआ।
- संकुचन: 20वीं सदी के मध्य तक देश के 24% क्षेत्र पर वन थे, जो 21वीं सदी के आते-आते मात्र लगभग 19% से 20% पर सिमट गए।
⚠️ ह्रास के मुख्य कारण:
- 🌾 कृषि भूमि का फैलाव: 1951 से 1980 के बीच लगभग 26,200 वर्ग किमी वन क्षेत्र को कृषि भूमि में बदल दिया गया।
- 🔥 स्थानान्तरी (झूम) खेती / स्लैश और बर्न: पूर्वोत्तर और मध्य भारत के जनजातीय क्षेत्रों में वनों को जलाकर की जाने वाली खेती से बड़े पैमाने पर वन नष्ट हुए।
- 🏗️ बड़ी विकास परियोजनाएँ: 1952 ई० से अब तक नदी घाटी परियोजनाओं के कारण 5,000 वर्ग किमी से अधिक वन क्षेत्रों को साफ करना पड़ा है।
- ⛏️ अंधाधुंध खनन (Mining): पश्चिम बंगाल में डोलोमाइट के खनन के कारण वहाँ का बक्सा टाइगर रिजर्व (Buxa Tiger Reserve) गंभीर खतरे में आ गया है।
- 🪵 व्यावसायिक संवर्धन (Enrichment Plantation): वाणिज्यिक लाभ के लिए जब किसी क्षेत्र में केवल एक ही प्रजाति के पौधे लगाए जाते हैं (जैसे सागवान का एकल रोपण), तो वनों की अन्य प्राकृतिक प्रजातियाँ नष्ट हो जाती हैं। उदाहरण: दक्षिण भारत में सागवान के रोपण से प्राकृतिक वन नष्ट हुए और हिमालय में चीड़ पाइन (Chir Pine) के रोपण से हिमालयन ओक और रोडोडेंड्रोन (Rhododendron) वनों को भारी नुकसान पहुँचा।
🧪 ⑥ संकट में वनस्पतियाँ और जीव : रेड डेटा बुक (Red Data Book & IUCN)
- जैव-विविधता का भंडार: भारत में लगभग 81,000 वन्य प्राणी उपजातियाँ और 47,000 वनस्पति उपजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से 15,000 उपजातियाँ केवल भारतीय मूल की ही हैं।
- विलुप्ति का संकट: भारत में अब तक 744 प्रजातियाँ पूर्णतः विलुप्त हो चुकी हैं (जिसमें चीता और गिद्ध प्रमुख उदाहरण हैं) और 22,531 प्रजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर हैं।
| प्रजाति (Species) | विलुप्त हो चुकी संख्या | विलुप्त होने का खतरा (संकटग्रस्त) |
|---|---|---|
| 🌱 पेड़-पौधे | 384 | 19079 |
| पक्षी | 133 | 1037 |
| 🦫 स्तनपाई | 83 | 497 |
| 🦎 सरीसृप (Reptiles) | 21 | 170 |
| 🐟 मछलियाँ | 21 | 343 |
🍁 केस स्टडी : हिमालयन यव (Himalayan Yew) संकट में
- क्या है?: यह चीड़ के प्रकार का एक सदाबहार औषधीय वृक्ष है, जो हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश में पाया जाता है।
- महत्व: इसकी छाल, पत्तियों और जड़ों से 'टैकसोल' (Taxol) नामक रसायन निकाला जाता है, जिसका उपयोग कैंंसर रोग के उपचार के लिए दवा बनाने में होता है। यह विश्व में सबसे अधिक बिकने वाली कैंसर रोधी औषधि है।
- संकट: अत्यधिक निष्कासन (Over-exploitation) के कारण पिछले एक दशक में इसके हजारों पेड़ सूखकर विलुप्त हो चुके हैं और इस वनस्पति का अस्तित्व ही खतरे में है।
🌐 आई०यू०सी०एन० (IUCN) द्वारा प्रजातियों का वर्गीकरण:
अंतर्राष्ट्रीय प्राकृतिक संरक्षण संघ (IUCN) ने पौधों और प्राणियों को निम्नलिखित मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया है:
- 🦏 सामान्य जातियाँ: जिनकी संख्या जीवित रहने के लिए सामान्य मानी जाती है (जैसे- पशु, साल, चीड़, रोडेंट्स)।
- 🦌 संकटग्रस्त जातियाँ (Endangered): जिनके लुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। यदि इनकी संख्या कम होने वाले नकारात्मक कारक जारी रहे, तो इनका बचना कठिन है (जैसे- काला हिरण, मगरमच्छ, भारतीय जंगली गधा, गेंडा, शेर की पूँछ वाला बंदर, संगाई यानी मणिपुरी हिरण)।
- 🐘 सुभेद्य जातियाँ (Vulnerable): जिनकी संख्या तेजी से घट रही है। यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो ये जल्द ही संकटग्रस्त श्रेणी में आ जाएंगी (जैसे- नीली भेड़, एशियाई हाथी, गंगा की डॉल्फिन)।
- 🦦 दुर्लभ जातियाँ (Rare): जिनकी संख्या विश्व में बहुत कम है। ये विषम परिस्थितियों के कारण आसानी से संकटग्रस्त श्रेणी में आ सकती हैं।
- 🐦 स्थानिक जातियाँ (Endemic): जो प्राकृतिक या भौगोलिक सीमाओं के कारण केवल किसी विशेष क्षेत्र में ही पाई जाती हैं (जैसे- अंडमानी टील, निकोबारी कबूतर, अंडमानी जंगली सुअर, अरुणाचल का मिथुन)।
- 🦕 लुप्त जातियाँ (Extinct): जो अपने प्राकृतिक आवासों में पूरी तरह अनुपस्थित पाई गई हैं यानी पृथ्वी से समाप्त हो चुकी हैं (जैसे- एशियाई चीता, गुलाबी सिर वाली बत्तख, डोडो पक्षी)।
🛡️ ⑦ वन एवं वन्य जीवों का संरक्षण : आंदोलन और प्रयास
Ⓐ ऐतिहासिक और पारंपरिक प्रयास:
- सम्राट अशोक (तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व): सम्राट अशोक ने वन्य जीवों के शिकार पर रोक लगाई और प्रकृति संरक्षण के नियमों को अपने शिलालेखों में अंकित कराया। यह प्रकृति संरक्षण का विश्व का पहला ऐतिहासिक साक्ष्य माना जाता है।
- मुगल काल: बाबर और जहाँगीर के आलेखों में भी प्रकृति संरक्षण वाद का उल्लेख मिलता है।
- 🏵️ अमृता देवी का बलिदान (1731 ई०): राजस्थान के जोधपुर जिले के बिश्नोई गाँव की अमृता देवी बिश्नोई ने राजा के महल निर्माण हेतु पेड़ काटने आए आदमियों का कड़ा विरोध किया और पेड़ों को बचाने के लिए गाँव वालों के साथ आंदोलन किया। इस जन-विरोध को देखकर महाराजा ने वनों की कटाई पर पूर्ण रोक लगा दी थी।
- 🌳 चिपको आंदोलन (1972): उत्तर प्रदेश (वर्तमान उत्तराखंड) के टिहरी-गढ़वाल पर्वतीय जिले में सुन्दर लाल बहुगुणा के नेतृत्व में अनपढ़ जनजातियों द्वारा शुरू किया गया। जब ठेकेदार पेड़ काटने आते थे, तो स्थानीय लोग कुल्हाड़ी के आगे पेड़ों से चिपक (आगोश में लेकर) जाते थे।
Ⓑ 🐯 बाघ परियोजना (Project Tiger) : विश्व की सबसे सफल परियोजना
- शुरुआत: 1973 ई० में भारत सरकार द्वारा शुरू की गई।
- पृष्ठभूमि: 20वीं शताब्दी के आरंभ में भारत में बाघों की संख्या लगभग 5500 थी, जो अवैध शिकार, खाल व हड्डियों की तस्करी और आवासों के सिकुड़ने के कारण 1973 में घटकर मात्र 1827 रह गई थी। (चूँकि भारत और नेपाल में दुनिया के दो-तिहाई बाघ रहते हैं, इसलिए ये तस्करों के मुख्य निशाने पर रहते हैं)।
- लक्ष्य: बाघों को विलुप्त होने से बचाना तथा बड़े आकार के संपूर्ण जैव तंत्र को सुरक्षित रखना।
- प्रमुख बाघ अभ्यारण्य (Tiger Reserves):
- कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (उत्तराखंड)
- सुन्दरवन राष्ट्रीय उद्यान (पश्चिम बंगाल)
- बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान (मध्य प्रदेश)
- सरिस्का वन्य जीव पशुविहार (राजस्थान)
- मानस बाघ रिजर्व (असम)
- पेरियार बाघ रिजर्व (केरल)
Ⓒ ⚖️ कानूनी और संस्थागत प्रावधान:
- रेड डेटा बुक (Red Data Book): भारत की संकटापन्न पादप प्रजातियों की सूची बनाने का कार्य सर्वप्रथम 1970 में बॉटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (BSI) और वन अनुसंधान संस्थान (FRI, देहरादून) ने मिलकर किया, जिसे 'रेड डेटा बुक' नाम दिया गया। असाधारण और दुर्लभ पौधों के लिए 'ग्रीन बुक' (Green Book) तैयार की गई।
- कानून: वन्य जीव सुरक्षा एक्ट 1972, नियमावली 1973 तथा संशोधित एक्ट 1991 के तहत शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। वन संरक्षण एक्ट 1980 और जैव विविधता अधिनियम 2002 के तहत स्थानीय स्तर पर संरक्षण समितियाँ बनाई गई हैं।
- संरक्षण के तरीके:
- इन सीटू (In-Situ / स्व-स्थाने): जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में ही विस्तृत भूखंड को आरक्षित कर सुरक्षित करना (जैसे- राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभ्यारण्य, जैवमंडल रिजर्व)।
- एक्स सीटू (Ex-Situ / बाह्य-स्थाने): संकटग्रस्त जीवों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर कृत्रिम आवासीय सुरक्षा प्रदान करना (जैसे- चिड़ियाघर, जीन बैंक, बोटेनिकल गार्डन)।
📊 भारत के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारण्य एवं जैवमंडल रिजर्व
- राष्ट्रीय उद्यान (National Park): बाहरी मानवीय हस्तक्षेप (पशुचारण, कृषि) पूर्णतः वर्जित होता है। (कुल संख्या: 85)
- अभ्यारण्य (Sanctuary): निजी संपत्ति हो सकती है, वन्य जीवों को नुकसान पहुँचाए बिना सीमित मानवीय गतिविधियों (जैसे सूखी लकड़ी चुनना, मछली पकड़ना) की छूट होती है। (कुल संख्या: 448)।
- बिहार के मुख्य अभ्यारण्य: काँवर झील पक्षी विहार (बेगूसराय) और कुशेश्वर स्थान पक्षी विहार (दरभंगा - यहाँ यूनेस्को क्लब के सहयोग से प्रवासियों के शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध है और वॉच टावर भी बनाया गया है)।
- जैवमंडल रिजर्व (Biosphere Reserves): अनुवांशिक विविधता को बनाए रखने वाले विशाल क्षेत्र। (भारत में कुल संख्या: 14)। उदाहरण: नीलगिरि (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक), नन्दा देवी (उत्तराखंड), नोकरेक (मेघालय), मन्नार की खाड़ी (तमिलनाडु), पंचमढ़ी (म०प्र०), अचानकमार-अमरकंटक (म०प्र०/छत्तीसगढ़) आदि।
🎯 परीक्षा उपयोगी विशेष बिंदु (Exam High-Yield Pointers)
- टैकसोल (Taxol) = हिमालयन यव (वृक्ष) से निकलने वाला कैंसर रोधी रसायन।
- प्रोजेक्ट टाइगर = 1973 में शुरू हुई देश की सबसे बड़ी वन्यजीव परियोजना।
- बिश्नोई आंदोलन (1731) = अमृता देवी द्वारा पेड़ों की रक्षा हेतु किया गया ऐतिहासिक बलिदान।
- काँवर झील = बिहार के बेगूसराय में स्थित प्रसिद्ध पक्षी अभ्यारण्य।
- इन सीटू (In-situ) = प्राकृतिक आवास में संरक्षण (जैसे राष्ट्रीय उद्यान)।
- जैव अपहरण (Bio Piracy) = किसी देश की जैव संपदा या अनुवांशिक गुणों को बिना अनुमति के व्यावसायिक लाभ हेतु हेराफेरी करना (जैसे अमेरिका द्वारा बासमती चावल या मक्का के जीन में बदलाव का प्रयास)।
- आरोग्यपाचा (Arogyapacha) = केरल के पश्चिमी घाट में कानी आदिवासियों द्वारा खोजा गया एक रहस्यमयी तनाव-रोधक और ऊर्जावान औषधीय पौधा, जिससे 'जीवानी' (Jeevani) नामक दवा बनाई गई।
📌 निष्कर्ष (Conclusion)
वन एवं वन्य प्राणी केवल हमारे आर्थिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि वे भूमंडल के फेफड़े और पारिस्थैतिक संतुलन के आधार स्तंभ हैं। औद्योगिकीकरण, खनन और मानवीय लिप्सा के कारण हिमालयन यव जैसी मूल्यवान औषधियाँ और बाघ जैसे गौरवशाली जीव संकट में हैं। अमृता देवी बिश्नोई और सुन्दर लाल बहुगुणा के पारंपरिक आंदोलनों से सीख लेकर, संयुक्त वन प्रबंधन (Joint Forest Management) और इन-सीटू/एक्स-सीटू जैसी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से ही हम अपनी समृद्ध जैव-विविधता की रक्षा कर सकते हैं।
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