📖 इकाई-2 : कृषि
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🌾 ① भारतीय कृषि: महत्व एवं भूमि उपयोग
🔍 कृषि का महत्व (Lifeline of Economy)
- आर्थिक जीवन का प्राण: भारत एक कृषि प्रधान राष्ट्र है। देश की लगभग दो-तिहाई (2/3) आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपनी जीविका के लिए कृषि पर निर्भर है.
- खाद्य सुरक्षा और कच्चा माल: यह विशाल जनसंख्या को भोजन प्रदान करती है तथा सूती वस्त्र (कपास), चीनी (गन्ना) और जूट जैसे बड़े उद्योगों को कच्चा माल देती है.
- राष्ट्रीय आय में योगदान: देश की कुल आय में कृषि का 24% योगदान है (दस्तावेज़ के ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार).
- वैश्विक स्थिति: चाय, गन्ना, मोटे अनाज और तिलहन के उत्पादन में भारत विश्व में अग्रणी है। चावल, जूट, गेहूं और कपास में इसका स्थान दूसरा से चौथा है.
🏛️ शुष्क कृषि बनाम आर्द्र कृषि
- वर्धन काल: वर्ष भर पर्याप्त तापमान होने के कारण भारत में फसलों के लिए लंबा वर्धन काल (बोने, बढ़ने और पकने का समय) मिलता है.
- 🌧️ शुष्क कृषि (Dry Agriculture): भारत के मात्र 15% क्षेत्र पर सिंचाई उपलब्ध है, शेष भागों में वर्षा वर्ष में केवल 3-4 महीने ही होती है। वर्षा की सहायता से होने वाली इस सीमित कृषि प्रणाली को शुष्क कृषि कहते हैं (75 सेमी से कम वर्षा वाले क्षेत्र).
- 🌊 आर्द्र भूमि कृषि: 75 सेमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में की जाने वाली कृषि. भारतीय कृषि की 38.67% भूमि पूरी तरह वर्षाधीन है (जैसे—मोटे अनाज, दाल, कपास).
📊 शस्य गहनता (Cropping Intensity)
बढ़ती जनसंख्या के कारण शुद्ध बोए गए क्षेत्र को बढ़ाना असंभव है, अतः उत्पादन बढ़ाने का एकमात्र विकल्प शस्य गहनता है.
- परिभाषा: एक ही कृषि वर्ष में एक ही भूमि पर एक से अधिक फसलों को उगाकर कुल उत्पादन बढ़ाना.
- शॉर्टकट सूत्र:
- 🎯 Exam Point: शस्य गहनता की दृष्टि से पंजाब भारत का अग्रणी राज्य है, क्योंकि वहाँ सिंचाई, उर्वरक, उन्नत बीज और यंत्रीकरण (निवेश उपयोग) का स्तर बहुत ऊँचा है.
🗂️ ② कृषि के प्रकार (Types of Farming)
भारत के विविध भौगोलिक और सांस्कृतिक परिवेश के कारण यहाँ मुख्य रूप से तीन प्रकार की कृषि की जाती है:
Ⓐ प्रारंभिक जीविका कृषि (Primitive Subsistence Farming)
- स्वरूप: लकड़ी का हल, कुदाल और खुरपी जैसे परंपरागत औजारों से की जाने वाली प्राचीन खेती, जिसमें आधुनिक तकनीकों का अभाव होता है.
- 🔥 कर्तन दहन प्रणाली (Slash and Burn / झूम कृषि): इसमें किसान जंगल के टुकड़े को काटकर व जलाकर साफ करता है और खेती करता है। उर्वरता समाप्त होने पर वह दूसरे टुकड़े पर चला जाता है.
- 🗺️ झूम कृषि के स्थानीय नाम (📌 Exam Special):
- झूम: उत्तरपूर्वी राज्य (असम, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड).
- पामलू: मणिपुर.
- दीपा: छत्तीसगढ़ का बस्तर जिला और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह.
Ⓑ गहन जीविका कृषि (Intensive Subsistence Farming)
- स्वरूप: अत्यधिक जनसंख्या दबाव वाले क्षेत्रों में की जाने वाली खेती, जहाँ जोतों (खेतों) का आकार बहुत छोटा होता है.
- विशेषता: इसमें श्रम की अधिकता होती है और मुख्य रूप से खाद्यान्न (धान) उगाया जाता है। व्यापार के लिए बहुत कम बचता है। यहाँ छिपी बेरोजगारी (Disguised Unemployment) पाई जाती है.
Ⓒ वाणिज्यिक / व्यापारिक कृषि (Commercial Farming)
- स्वरूप: फसलें मुख्य रूप से व्यापार और लाभ कमाने के लिए उपजाई जाती हैं। इसमें रासायनिक खाद, उन्नत बीज (HYV), आधुनिक यंत्र और कीटनाशकों का प्रचुर उपयोग होता है.
- रोपण कृषि (Plantation Agriculture): यह भी एक प्रकार की व्यापारिक कृषि है जो बड़े-बड़े फार्मों पर औद्योगिक तर्ज पर मैनेजर्स और मजदूरों द्वारा की जाती है.
- उदाहरण: चाय (असम, दार्जिलिंग), कॉफी (कर्नाटक), रबर (केरल), गन्ना और केला.
📅 ③ भारत का फसल प्रारूप (Cropping Pattern)
भारत की 100 सेमी की समवर्षा रेखा देश को दो बड़े कृषि क्षेत्रों में बांटती है—100 सेमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में चावल तथा कम वर्षा वाले क्षेत्रों में गेहूं मुख्य फसल है.
| फसल का प्रकार | बोने का समय | काटने का समय | प्रमुख फसलें |
|---|---|---|---|
| 🌧️ खरीफ (वर्षा ऋतु) | जून - जुलाई | सितंबर - अक्टूबर | चावल, मकई, ज्वार, बाजरा, अरहर, मूंग, कपास, जूट, मूँगफली |
| ❄️ रबी (शीत ऋतु) | अक्टूबर - दिसंबर | अप्रैल - जून | गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूर, तीसी, सरसों |
| ☀️ जायद / गर्मा (ग्रीष्म ऋतु) | मार्च - अप्रैल | मई - जून | धान, मकई, मूँग तथा सब्जियां (खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूज, कद्दू) |
🌾 ④ मुख्य फसलें एवं उनकी भौगोलिक दशाएँ
🍚 Ⓐ चावल (Rice) - भारत की प्रधान खाद्यान्न फसल
- वैश्विक स्थिति: विश्व का 22% चावल क्षेत्र भारत में है (कुल कृषि भूमि का 23%).
- तापमान: उष्णकटिबंधीय फसल। औसत तापमान कम से कम 24°C (पकते समय 27°C).
- वर्षा एवं मिट्टी: 125 सेमी से 200 सेमी वार्षिक वर्षा; चीकायुक्त उपजाऊ दोमट/जलोढ़ मिट्टी.
- श्रम: रोपनी से कटनी तक सस्ते मानव श्रम की अत्यधिक आवश्यकता.
- 📌 विशेष: अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों (जैसे पश्चिम बंगाल) में धान की तीन फसलें—ऑस, अमन और बोरो उगाई जाती हैं.
🌾 Ⓑ गेहूं (Wheat) - दूसरी प्रमुख खाद्यान्न फसल
- वैश्विक स्थिति: भारत विश्व का दूसरा बड़ा उत्पादक है (विश्व का करीब 10% उत्पादन).
- भौगोलिक दशा: उगाने के लिए 50-75 सेमी वार्षिक वर्षा (100 सेमी से अधिक वर्षा हानिकारक है)। पकते समय खिली धूप आवश्यक है.
- उत्पादक: देश के कुल उत्पादन का 2/3 हिस्सा पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आता है। उत्तर प्रदेश सर्वप्रमुख उत्पादक है.
🌽 Ⓒ मोटे अनाज (Millets)
- ज्वार: चावल-गेहूं के बाद तीसरी प्रमुख खाद्य फसल। पठारी भागों की मुख्य फसल। महाराष्ट्र शीर्ष उत्पादक (51%) है.
- बाजरा: निर्धनों व पशुओं का आहार। बलुआ और उथली काली मिट्टी पर उपयुक्त। गुजरात (24%) और राजस्थान (20%) अग्रणी हैं.
- रागी: शुष्क प्रदेश की फसल, जिसमें प्रचुर लोहा व कैल्शियम होता है। कर्नाटक शीर्ष उत्पादक है.
- मक्का (Maize): भोजन व चारा दोनों में उपयोगी (ग्लूकोज व मंड प्रचुर)। खरीफ फसल, 21°-27°C तापमान। कर्नाटक, यूपी, बिहार अग्रणी हैं.
🌱 Ⓓ दालें (Pulses) - प्रोटीन का मुख्य स्रोत
- खरीफ दालें: अरहर (तूर), मूंग, उड़द। रबी दालें: चना, मटर, मसूर.
- 🎯 Exam Point: अरहर को छोड़कर बाकी सभी दलहनी फसलें वायु से नाइट्रोजन लेकर भूमि को प्राकृतिक रूप से उर्वर बनाती हैं, इसलिए इन्हें फसल आवर्तन (Crop Rotation) में रोपा जाता है.
🛢️ Ⓔ व्यावसायिक व नकदी फसलें
- गन्ना: बाँस की प्रजाति का पौधा, भारत इसकी जन्मभूमि है। 21°C-27°C तापमान और गहरी दोमट मिट्टी आवश्यक। दक्षिण भारत की दशाएँ उत्तर भारत से अधिक अनुकूल हैं.
- मूँगफली: खरीफ फसल, भारत कुल तिलहन का आधा उत्पादन इसी से करता है। गुजरात उत्पादन में सर्वप्रथम है.
- सरसों: रबी उपोष्ण कटिबंधीय फसल। इसका 1/3 भाग अकेले राजस्थान उत्पादित करता है.
- सोयाबीन: मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र मिलकर देश का 90% सोयाबीन पैदा करते हैं.
☕ Ⓕ पेय व रेशेदार फसलें
- चाय: सदाबहार झाड़ी (थीन पदार्थ के कारण ताजगी देती है)। अंग्रेजों द्वारा 1840 में ब्रह्मपुत्र घाटी में शुरू की गई रोपण कृषि। ढालू ज़मीन और 200-250 सेमी वर्षा आवश्यक। भारत उपभोग में विश्व में सबसे बड़ा है.
- कॉफी: अरेबिका, लिबेरिका और रोबस्ता प्रमुख किस्में हैं। भारत की 'अरेबिका' यमन से लाकर सर्वप्रथम बाबाबुदन की पहाड़ी पर लगाई गई थी। कर्नाटक अकेला 70% कॉफी उत्पादित करता है.
- कपास: सूती वस्त्र उद्योग का आधार। इसके लिए 210 दिन पाला रहित मौसम, लावा निर्मित काली मिट्टी और चमकीली धूप अनिवार्य है.
- जूट (📌 सुनहरा रेशा - Golden Fibre): बाढ़ के मैदानों की चीकायुक्त मिट्टी और गर्म-आर्द्र जलवायु आवश्यक। पारंपरिक रूप से रस्सी, बोरा और अब आकर्षक दस्तकारी की चीजें बनती हैं.
🏛️ ⑤ कृषि में सुधार, वैश्वीकरण एवं खाद्य सुरक्षा
🛠️ प्रौद्योगिकीय और संस्थागत सुधार
- स्वतंत्रता के बाद जोतों की चकबंदी, जमींदारी प्रथा की समाप्ति और हरित क्रांति (HYV संकर बीज, रासायनिक खाद और सिंचाई का पैकेज) के माध्यम से गेहूं-चावल में देश स्वावलंबी बना.
- श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड): सहकारिता के माध्यम से दुग्ध उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि.
- 📝 बिहार स्पेशल: बिहार में 'सुधा दुग्ध सहकारी समिति' इस क्षेत्र में ग्रामीण उत्थान के लिए कार्यरत है.
- सरकारी योजनाएँ: किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना (PAIS), और बिचौलियों से रक्षा के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा.
🌐 वैश्वीकरण और भारतीय कृषि की चुनौतियाँ
वैश्वीकरण (देश की अर्थव्यवस्था का विश्व के साथ जुड़ना) से सरकारी नियंत्रण ढीला हुआ है और विदेशी कृषि उत्पाद भारतीय बाजारों में आसानी से आ रहे हैं. भारतीय किसानों के सामने निम्न उत्पादकता एक बड़ी चुनौती है (भारत में प्रति इकाई उत्पादन जापान का 1/3 और अमेरिका का 1/4 ही है).
- कम उत्पादकता के मुख्य कारण: खेतों का छोटा आकार, मानसूनी अनिश्चितता, मिट्टी का निम्नीकरण (अत्यधिक रसायनों से) और कम पूंजी निवेश.
- दुष्परिणाम: मुफ्त बिजली के कारण अत्यधिक सिंचाई से पंजाब-हरियाणा में जलाक्रांतता (Water Logging) और लवणता बढ़ी है, जिससे नलकूप सूख रहे हैं और सीमांत किसान खेती छोड़ने पर मजबूर हैं.
🍎 खाद्य सुरक्षा (Food Security)
निर्धनता और भुखमरी के निराकरण के लिए सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा प्रणाली बनाई है, जिसके दो मुख्य अंग हैं:
- बफर स्टॉक: भारतीय खाद्य निगम (FCI) न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदकर सुरक्षित भंडारण करता है.
- जन वितरण प्रणाली (PDS): राशन कार्डों के माध्यम से नागरिकों को दो वर्गों में बांटकर सस्ती दरों पर अनाज दिया जाता है—BPL (गरीबी रेखा से नीचे) और APL (गरीबी रेखा से ऊपर).
💡 Quick Exam Shortcuts & Tricks (याद रखने के सूत्र)
- झूम कृषि के स्थान: असम में झूमते हैं, मणिपुर में पालते हैं (पामलू), और अंडमान के दीपक (दीपा) जलते हैं.
- धान की तीन किस्में: अमन, ऑस और बोरो (ट्रिक: 'अमन आस लगाकर सो रहा है, बोर मत करो').
- कॉफी का गढ़: क से कॉफी, क से कर्नाटक (70% उत्पादन) और बाबाबुदन की पहाड़ी.
- सुनहरा रेशा: जूट को ही सुनहरा रेशा (Golden Fibre) कहा जाता है.
📝 निष्कर्ष (Conclusion)
भारतीय कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ (नींव का पत्थर) है. यद्यपि हरित क्रांति ने हमें खाद्यान्न सुरक्षा दी, परंतु अत्यधिक कीटनाशकों और सक्षम जल प्रबंधन के अभाव में आज मिट्टी के निम्नीकरण और घटते जलस्तर जैसी गंभीर समस्याएं खड़ी हो गई हैं. वैश्वीकरण के इस दौर में जैव प्रौद्योगिकी (Bio-technology), राष्ट्रीय बाजार के एकीकरण, बुनियादी ढांचे (सड़क, बिजली) के सुधार और दुग्ध/बागबानी कृषि जैसे पूरक विकल्पों को अपनाकर ही हम छोटे और सीमांत किसानों को सुरक्षित कर सकते हैं.
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