📖 इकाई-3 : निर्माण उद्योग
यह व्यापक, परीक्षा-केंद्रित डिजिटल नोट्स BSEB (कक्षा-10) भूगोल, CBSE, BPSC (Pre/Mains), SSC, CUET, RRB NTPC और SCERT/SBTE परीक्षाओं के नवीनतम पाठ्यक्रम तथा आपके द्वारा भेजे गए दस्तावेज़ के अनुसार तैयार किए गए हैं।
🏭 ① निर्माण उद्योग: परिचय एवं अवस्थिति के कारक
🔍 विनिर्माण उद्योग क्या है?
- परिभाषा: कच्चे मालों द्वारा रासायनिक या यांत्रिक प्रक्रियाओं से जीवनोपयोगी व मूल्यवान वस्तुएँ तैयार करना विनिर्माण (Manufacturing) उद्योग कहलाता है.
- उदाहरण: कपास से कपड़ा, गन्ने से चीनी, लौह अयस्क से लोहा-इस्पात, बॉक्साइट से एल्यूमीनियम.
- विकास का सूचक: वर्तमान समय में विनिर्माण उद्योग किसी भी राष्ट्र के आर्थिक विकास और संपन्नता का मुख्य सूचक माना जाता है.
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Timeline):
- 1854: भारत में आधुनिक औद्योगिक विकास की शुरुआत मुम्बई में प्रथम सफल सूती कपड़े की मिल की स्थापना से हुई.
- 1855: जूट का पहला कारखाना कोलकाता के निकट रिशरा नामक स्थान पर लगाया गया.
- 1951: भारत में उद्योगों का योजनाबद्ध विकास स्वतंत्रता के बाद प्रथम पंचवर्षीय योजना से प्रारंभ हुआ.
📐 उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक
उद्योगों की स्थापना किसी एक कारक पर निर्भर नहीं होती, इन्हें दो मुख्य वर्गों में बाँटा जाता है:
- भौतिक कारक: कच्चे माल की निकटता, शक्ति के साधन (कोयला/बिजली), जल की सुलभता तथा अनुकूल जलवायु.
- मानवीय/आर्थिक कारक: कुशल व सस्ते श्रमिक, विस्तृत बाजार, सुलभ परिवहन, पूँजी, बैंकिंग सुविधा तथा अनुकूल सरकारी नीतियां.
🗂️ ② उद्योगों का व्यापक वर्गीकरण (Classification Matrix)
╔═════════════════════════════════╗
║ उद्योगों का वर्गीकरण ║
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│┌───────────────────┬────────────┴───────┬───────────────────┐
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श्रम के आधार पर कच्चे माल के आधार पर स्वामित्व के आधार पर कच्चे माल के स्रोत पर- श्रम एवं पूँजी के आधार पर:
- बड़े पैमाने के उद्योग: बड़ी मात्रा में श्रमिक, भारी पूँजी निवेश और अत्यधिक उत्पादन (जैसे—सूती कपड़ा, पटसन/जूट उद्योग).
- मध्यम पैमाने के उद्योग: सीमित श्रम और मध्यम उत्पादन (जैसे—साइकिल, रेडियो, टेलीविजन उद्योग).
- छोटे पैमाने के उद्योग (घरेलू/लघु): परिवारों के सदस्यों द्वारा पारंपरिक व सरल विधियों से कम पूँजी में निर्माण (जैसे—आभूषण निर्माण, हस्तशिल्प).
- कच्चे माल के भार व आयतन के आधार पर:
- भारी उद्योग: भारी कच्चे माल का उपयोग और भारी वस्तुओं का निर्माण (जैसे—लोहा एवं इस्पात उद्योग).
- हल्के उद्योग: हल्के कच्चे माल से हल्की वस्तुओं का निर्माण (जैसे—इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सिलाई मशीन).
- स्वामित्व (Ownership) के आधार पर:
- सार्वजनिक उद्योग (Public Sector): पूर्ण सरकारी नियंत्रण और संचालन (जैसे—दुर्गापुर, भिलाई, राउरकेला इस्पात केंद्र; संस्थान: BHEL, SAIL).
- संयुक्त अथवा सहकारी उद्योग (Joint/Cooperative): दो या दो से अधिक व्यक्तियों या सहकारी समितियों का योगदान (जैसे—ऑयल इंडिया लिमिटेड [OIL], अमूल [गुजरात], महाराष्ट्र का चीनी उद्योग).
- कच्चे माल के स्रोत के आधार पर:
- कृषि आधारित उद्योग: कृषि उत्पादों को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करने वाले (सूती वस्त्र, जूट, चीनी).
- खनिज आधारित उद्योग: खनिजों पर निर्भर रहने वाले उद्योग (लौह-इस्पात, सीमेंट, रसायन).
- उपभोक्ता उद्योग (📌 Exam Point): जो सीधे उपभोक्ताओं के घरेलू उपयोग हेतु वस्तुओं का उत्पादन करते हैं (जैसे—कागज़, दंतमंजन, पंखा).
🌾 ③ कृषि आधारित प्रमुख उद्योग (Agro-Based Industries)
👕 Ⓐ सूती वस्त्र उद्योग (Cotton Textile)
- महत्व: यह भारत का सबसे विशाल उद्योग है और कृषि के बाद देश में रोजगार प्रदान करने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है. जीडीपी (GDP) में 4% तथा विदेशी आय में 17% का योगदान देता है.
- इतिहास: प्रथम सफल मिल 1854 में काबस जी नानाभाई डाबर ने मुम्बई में स्थापित की थी.
- 👑 कटन पोलिस (Cotton Polis): मुम्बई को 'सूती कपड़ों की महानगरी' कहा जाता है क्योंकि अकेला मुम्बई क्षेत्र देश का लगभग एक-चौथाई सूती वस्त्र तैयार करता है.
- विकेंद्रीकरण का कारण: सूती वस्त्र का कच्चा माल (कपास) एक 'शुद्ध कच्चा माल' है, जिसके वजन में कमी (वजन ह्रास) नहीं होती। इसी कारण यह उद्योग केवल कच्चे माल के क्षेत्र में न रहकर बाजार, विद्युत और परिवहन की सुलभता के कारण संपूर्ण भारत में फैल गया (विकेंद्रीकृत हुआ).
- 📝 विशेष तथ्य: सिले-सिलाए वस्त्रों के निर्यात को बढ़ाने के लिए देश का पहला वस्त्र पार्क (Apparel Park) तमिलनाडु के तिरूपुर (एट्टीवरम्पलायम गाँव) में स्थापित किया गया है.
- प्रमुख चुनौतियाँ: उत्तम कपास की कमी, पुरानी मशीनें, और कृत्रिम रेशों (नायलॉन, पॉलिस्टर) से कड़ी स्पर्धा.
👜 Ⓑ जूट या पटसन उद्योग (Jute Industry)
- वैश्विक स्थिति: कच्चे जूट और उससे बने सामानों के उत्पादन में भारत का विश्व में पहला स्थान है। निर्यात में यह बांग्लादेश के बाद दूसरे स्थान पर है.
- हुगली मेखला (📌 98 km × 3 km): भारत की कुल 77 जूट मिलों में से 69 मिलें अकेले पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के किनारे एक संकरी पट्टी में केंद्रित हैं.
- केंद्रण के कारण: जूट उत्पादक क्षेत्रों की निकटता, हुगली नदी का सस्ता जल परिवहन, जूट सड़ाने व धोने के लिए प्रचुर मात्रा में जल की उपलब्धता, और कोलकाता बंदरगाह की सुविधा.
- ग्राहक: संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, रूस और यूके इसके प्रमुख आयातक हैं.
🐏 Ⓒ ऊनी और रेशमी वस्त्र उद्योग
- ऊनी वस्त्र: भारत विश्व में ऊन का सातवाँ सबसे बड़ा उत्पादक है. पंजाब (धारीवाल, लुधियाना, अमृतसर) इसका मुख्य केंद्र है.
- 🐐 पसमीना ऊन: कश्मीर के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में गुर्जरों द्वारा पाली जाने वाली विशेष नस्ल की बकरियों के कोमल बालों (रोएँ) से तैयार अति-गर्म ऊन.
- 🐇 अंगूरा ऊन: यह खरगोश के कोमल रोएँ से प्राप्त किया जाता है.
- रेशमी वस्त्र: भारत में चार प्रकार का रेशम उत्पादित होता है—मलवरी, तसर, ईरी और मूँगा. रेशम का कीड़ा शहतूत के पत्तों को खाता है. देश का 90% से अधिक रेशम कर्नाटक (मैसूर, बंगलौर, कोलार), तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल (मुर्शिदाबाद) और जम्मू-कश्मीर में तैयार होता है.
🍬 Ⓓ चीनी उद्योग (Sugar Industry)
- महत्व: भारत गुड़ और खांडसारी सहित चीनी उत्पादन में विश्व में अग्रणी है। यह एक पूर्णतः मौसमी उद्योग (Seasonal Industry) है.
- 📝 बिहार स्पेशल फैक्ट: आधुनिक आधार पर भारत में चीनी उद्योग का विकास 1903 में बिहार के सारण जिले के मढ़ौरा में पहली चीनी मिल की स्थापना के साथ हुआ था.
- अवस्थिति नियंत्रण: गन्ना कटने के बाद सूखने लगता है और उसका वजन तथा रस (सक्रोस) तेजी से घटने लगता है, अतः चीनी मिलें हमेशा गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के निकट ही स्थापित की जाती हैं.
- दक्षिण की ओर झुकाव: पिछले कुछ वर्षों से यह उद्योग उत्तर भारत से महाराष्ट्र और दक्षिणी राज्यों की ओर स्थानांतरित हो रहा है, क्योंकि दक्षिण के गन्ने में अधिक शर्करा (सक्रोस) की मात्रा होती है, वहाँ की जलवायु ठंडी (पेराई काल लंबा) होती है और वहाँ की सहकारी समितियाँ अत्यधिक सफल हैं.
🟫 ④ खनिज आधारित प्रमुख उद्योग (Mineral-Based Industries)
🏗️ Ⓐ लौह और इस्पात उद्योग (Iron & Steel) - आधारभूत उद्योग
- रीढ़ की हड्डी: इसे सभी उद्योगों का 'जनक' या 'आधारभूत उद्योग' कहा जाता है क्योंकि अन्य सभी हल्के, भारी और मध्यम उद्योग अपनी मशीनरी के लिए इसी पर निर्भर हैं.
- ऐतिहासिक साक्ष्य: दिल्ली में कुतुबमीनार के पास खड़ा लौह-स्तम्भ प्राचीन भारतीय लोहे की उत्कृष्ट गुणवत्ता का सटीक प्रमाण है.
- आधुनिक विकास: वास्तविक शुरुआत 1864 में कुल्टी (पश्चिम बंगाल) में हुई। बड़े पैमाने पर उत्पादन 1907 में जमशेदपुर (साक्ची, झारखंड) में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO) की स्थापना के साथ हुआ.
- 👑 भारत का बर्मिंघम: जमशेदपुर को 'भारत का बर्मिंघम' कहा जाता है.
- छोटा नागपुर पठार में संकेंद्रण: लौह-इस्पात एक भारी और वजन ह्रास वाला उद्योग है, जिसमें भारी कच्चे माल (लौह अयस्क, कोकिंग कोल, चूना पत्थर, मैंगनीज) की आवश्यकता होती है। चूंकि ये सभी खनिज छोटानागपुर पठार में प्रचुरता से मिलते हैं, इसलिए देश के अधिकांश संयंत्र इसी क्षेत्र में हैं.
- प्रबंधन: सार्वजनिक क्षेत्र के सभी संयंत्रों का प्रबंधन SAIL (भारतीय इस्पात प्राधिकरण) के अधीन है, जबकि TISCO निजी क्षेत्र में कार्यरत है.
- तटवर्ती संयंत्र: विशाखापत्तनम देश का एकमात्र समुद्र तट पर स्थित (तटवर्ती) लौह-इस्पात संयंत्र है.
📊 प्रमुख लौह-इस्पात संयंत्र और सहयोगी देश (📌 Direct Exam Point)
| कंपनी / संयंत्र | राज्य | स्थान | विदेशी सहयोग (यदि लागू हो) |
|---|---|---|---|
| TISCO (टाटा स्टील) | झारखंड | जमशेदपुर | — (पूर्णतः स्वदेशी प्रयास) |
| भिलाई इस्पात संयंत्र | छत्तीसगढ़ | भिलाई | 🇷🇺 रूस |
| बोकारो इस्पात संयंत्र | झारखंड | बोकारो | 🇷🇺 रूस |
| राउरकेला इस्पात संयंत्र | उड़ीसा | राउरकेला | 🇩🇪 जर्मनी |
| दुर्गापुर इस्पात संयंत्र | पश्चिम बंगाल | दुर्गापुर | 🇬🇧 ब्रिटेन |
✈️ Ⓑ एल्यूमीनियम और ताँबा प्रगलन उद्योग
- एल्यूमीनियम: भारत का दूसरा महत्वपूर्ण धातु उद्योग है। इसका अयस्क बॉक्साइट है. यह हल्का, जंगरोधी और बिजली का सुचालक होने के कारण हवाई जहाज, बर्तन और बिजली के तार बनाने में उपयोगी है. एक टन एल्यूमीनियम बनाने में 6 टन बॉक्साइट और 18,600 किलोवाट बिजली लगती है, अतः यह उद्योग बॉक्साइट और सस्ती बिजली के स्रोतों के निकट (जैसे उड़ीसा के नालको व बालको) स्थापित होता है.
- ताँबा प्रगलन: भारत का पहला संयंत्र झारखंड के घाटशिला (मऊभंडार) में लगाया गया था. देश में एकमात्र उत्पादन संस्थान हिन्दुस्तान ताँबा लिमिटेड (HCL) है, जिसके दो मुख्य केंद्र घाटशिला (झारखंड) और खेतड़ी (राजस्थान - भारत की सबसे पुरानी ताँबे की खान) हैं. भारत अपनी आवश्यकता का 50% ताँबा विदेशों (जाम्बिया, चिली, अमेरिका, कनाडा) से आयात करता है.
🧪 Ⓒ रासायनिक एवं उर्वरक उद्योग
- रसायन उद्योग: आकार में भारत विश्व का 12वाँ तथा एशिया में तीसरा स्थान रखता है.
- अकार्बनिक रसायन: गंधक का तेजाब (सल्फ्यूरिक एसिड), सोडा ऐश (काँच, साबुन हेतु), कास्टिक सोडा.
- कार्बनिक रसायन: पेट्रो-रसायन (कृत्रिम रबर, प्लास्टिक, दवाइयाँ)। ये हमेशा तेल शोधक कारखानों के निकट स्थापित होते हैं.
- उर्वरक उद्योग: भारत नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का विश्व का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है. पहला संयंत्र 1906 में रानीपेट (तमिलनाडु) में लगा, परंतु वास्तविक विकास 1951 में सिंदरी (झारखंड) में भारतीय उर्वरक निगम द्वारा संयंत्र स्थापना से हुआ. भारत नाइट्रोजन व फास्फेट में आत्मनिर्भर है, परंतु पोटाश (Potash) उर्वरक के लिए भारत पूरी तरह आयात पर निर्भर है.
🧱 Ⓓ सीमेंट उद्योग (Cement Industry)
- भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक देश है.
- कच्चा माल: चूना पत्थर, कोयला, सिलिका, एल्युमिनियम और जिप्सम. भारी कच्चे माल के कारण यह उद्योग भी स्रोतों के निकट स्थापित होता है। पहला संयंत्र 1904 में चेन्नई में स्थापित किया गया था.
🚂 ⑤ तैयार माल एवं उपकरण आधारित उद्योग (Engineering & Tech)
🚄 Ⓐ परिवहन उपकरण उद्योग
- रेलवे: बड़ी लाइन के विद्युत रेल इंजन पश्चिम बंगाल के चितरंजन (लोकोमोटिव वर्क्स) में तथा डीजल इंजन वाराणसी में बनते हैं. सवारी डिब्बे (Coaches) पेराम्बूर (तमिलनाडु), कपूरथला (पंजाब) और बंगलौर में बनते हैं.
- 📝 बिहार स्पेशल: पटना के मोकामा में 'भारत वैगन एंड इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड' रेल डिब्बे (वैगन) बनाती है. मुंगेर का जमालपुर वर्कशॉप एशिया का सबसे पुराना रेलवे वर्कशॉप है. वर्तमान में छपरा में पहिया कारखाना और हरनौत (नालंदा) में कोच मरम्मत कारखाना स्थापित हैं.
- मोटर गाड़ी: मारुति उद्योग गुड़गाँव (हरियाणा) में, TELCO (टाटा) भारी व्यावसायिक वाहनों के लिए, और महिंद्रा एंड महिंद्रा नासिक में कार्यरत है. भारत तिपहिया स्कूटरों के निर्माण में विश्व में प्रथम स्थान पर है.
- पोत निर्माण (Shipbuilding): देश में पाँच प्रमुख केंद्र हैं—विशाखापत्तनम, कोलकाता, कोच्चि, मुम्बई और मझगाँव पोत प्रांगण (भारतीय नौसेना हेतु).
- वायुयान उद्योग: पूर्ण सरकारी नियंत्रण में। 1940 में बंगलूर में स्थापित फैक्ट्री को अब HAL (हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) कहा जाता है. बंगलूर, कानपुर, नासिक (ओझर) और कोरापुट (उड़ीसा) इसके मुख्य केंद्र हैं.
💻 Ⓑ सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक उद्योग (IT Sector)
- ज्ञान आधारित उद्योग: इसे ज्ञान आधारित या उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग भी कहते हैं, क्योंकि इसमें निरंतर शोध, अनुसंधान और विशिष्ट नए ज्ञान की आवश्यकता होती है.
- 👑 सिलिकन वैली / इलेक्ट्रॉनिक राजधानी: बंगलौर (बेंगलुरु) को भारत के इलेक्ट्रॉनिक उद्योग की राजधानी और 'सिल्कन नगर' (Silicon City) कहा जाता है.
- 🎯 फुटलूज / स्वच्छंद उद्योग (Footloose Industry): चूंकि इलेक्ट्रॉनिक उद्योग किसी विशिष्ट भारी कच्चे माल पर आधारित नहीं होता, इसलिए इसे स्वच्छंद या फुटलूज उद्योग कहते हैं। इसे देश में कहीं भी स्थापित किया जा सकता है.
- BPO (Business Process Outsourcing): व्यवसाय प्रक्रिया वाह्यस्रोतीकरण के तेजी से बढ़ने के कारण इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को 'ज्ञान अर्थव्यवस्था' कहा जाता है, जहाँ रोजगार पाने वालों में 30% महिलाएं हैं.
🌐 ⑥ वैश्वीकरण, आर्थिक सुधार एवं औद्योगिक प्रदूषण
📉 आर्थिक सुधार और वैश्वीकरण का प्रभाव
- उदारीकरण (Liberalization): उद्योग और व्यापार को लालफीताशाही व अनावश्यक प्रशासनिक प्रतिबंधों से मुक्त करके अधिक प्रतियोगी बनाना.
- निजीकरण (Privatization): सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों का स्वामित्व, नियंत्रण और प्रबंध निजी हाथों में सौंपना ताकि सरकारी एकाधिकार समाप्त हो.
- वैश्वीकरण (Globalization): देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ना, जिसके तहत पूँजी, तकनीक और व्यापार का बिना किसी प्रतिबंध के आदान-प्रदान होता है.
- नकारात्मक प्रभाव: वैश्वीकरण और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आने से भारतीय स्वदेशी लघु एवं कुटीर उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। खिलौना उद्योग (चीन के इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के कारण) पूरी तरह ह्रास का शिकार हुआ है.
😷 औद्योगिक प्रदूषण एवं पर्यावरण क्षरण
विनिर्माण उद्योगों ने देश को आर्थिक संपन्नता तो दी, परंतु इसके साथ ही चार भयानक प्रकार के प्रदूषणों को जन्म दिया है:
- 🌬️ वायु प्रदूषण: उद्योगों के धुएँ से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) को 'दमघोंट गैस' कहा जाता है, जो हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन वहन क्षमता को समाप्त कर देती है. सल्फर डाइऑक्साइड (
) से दमा, खाँसी और फेफड़ों के रोग होते हैं. - 🚨 ऐतिहासिक त्रासदी: 3 दिसंबर 1984 को भोपाल गैस त्रासदी घटित हुई, जहाँ यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) नामक अत्यंत विषैली गैस का रिसाव हुआ, जिससे हजारों लोग मौत के शिकार हुए.
- 💧 जल प्रदूषण: चर्म (चमड़ा) उद्योग, तेल शोधक कारखाने, और पेपर उद्योग मुख्य प्रदूषक हैं.
- उदाहरण: बरौनी तेलशोधक कारखाने का कचरा गंगा नदी को प्रदूषित करता है. मोकामा का बाटा जूता और शराब कारखाना प्रतिदिन 2,50,000 गैलन विषाक्त अपशिष्ट गंगा में विसर्जित करता है.
- 🌡️ तापीय प्रदूषण (Thermal Pollution): उद्योगों और तापघरों से बिना ठंडा किए गर्म जल को सीधे नदियों/तालाबों में छोड़ने से जलीय सूक्ष्म जीव-जन्तु जलकर नष्ट हो जाते हैं.
- 🔊 ध्वनि प्रदूषण: आरा मिलों, जेनरेटरों और खराब मशीनों के असहनीय शोर से बहरापन, हृदयगति में वृद्धि और चिड़चिड़ापन होता है.
🛠️ प्रदूषण नियंत्रण के तीन स्तरीय वैज्ञानिक उपाय
उद्योगों से निकलने वाले गंदे द्रवों को तीन स्तरों पर उपचारित (Treat) किया जाता है:
- प्राथमिक उपचार: यांत्रिक प्रक्रियाओं द्वारा छंटाई, पिसाई, निथारना और गंदगी को तली में बैठाना.
- द्वितीयक उपचार: जैविक विधाओं और प्रक्रियाओं द्वारा शोधन.
- तृतीयक उपचार: जैविक, रासायनिक और भौतिक प्रक्रियाओं द्वारा जल का पुनः चक्रण (Recycling) कर उसे उपयोगी बनाना.
- वायु प्रदूषण हेतु: कारखानों की चिमनियों में पृथककारी छन्ना, बैगफिल्टर तथा स्क्रबर यंत्र लगाना अनिवार्य है.
💡 Quick Exam Master-Tricks (याद रखने के सूत्र)
- लोहा-इस्पात विदेशी सहयोग ट्रिक:
- भीरु = भीलाई संयंत्र ➡️ रूस के सहयोग से.
- बोरा = बोकारो संयंत्र ➡️ रास/रूस के सहयोग से.
- राज = राउरकेला संयंत्र ➡️ जर्मनी के सहयोग से.
- दुब = दुर्गापुर संयंत्र ➡️ ब्रिटेन के सहयोग से.
- सिल्कन सिटी / इलेक्ट्रॉनिक कैपिटल: बंगलौर = इलेक्ट्रॉनिक उद्योग का गढ़.
- दमघोंट गैस: CO (कार्बन मोनोऑक्साइड) मनुष्य का दम घोट देती है.
- पूर्ण आयातित उर्वरक: पोटाश उर्वरक के निर्माण के लिए कच्चा माल पूरी तरह विदेशों से मँगाना पड़ता है.
📝 निष्कर्ष (Conclusion)
विनिर्माण उद्योग किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति की आधारशिला हैं। सूती वस्त्र, चीनी, और लौह-इस्पात जैसे उद्योगों ने भारत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई है. परंतु वैश्वीकरण के इस दौर में जहाँ एक ओर हमें निम्न उत्पादकता और कुटीर उद्योगों के ह्रास जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक प्रदूषण और भोपाल गैस त्रासदी जैसी विभीषिकाएं हमारे पर्यावरण पर आपदा की काली छाया मंडरा रही हैं. राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धा परिषद के कड़े मानकों, उद्योगों में तीन स्तरीय जल उपचार संयंत्रों (Recycling) और स्वच्छंद उद्योगों के वैज्ञानिक विकेंद्रीकरण को अपनाकर ही हम पर्यावरण को बिना क्षति पहुँचाए एक समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर सकते हैं.
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