📖 इकाई - 2: प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधनः बाढ़ और सुखाड़ (Natural Disasters: Flood and Drought)
🎯 BSEB (कक्षा 10), BPSC, SSC, और अन्य सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष रूप से तैयार

📌 1. बाढ़ और सुखाड़: एक नजर में
- 🌧️ वर्षा से संबंध: बाढ़ और सुखाड़ दोनों ही ऐसी प्राकृतिक आपदाएँ हैं जिनका सीधा संबंध मॉनसून और वर्षा की मात्रा से है।
- 🌊 बाढ़ की स्थिति: जब मॉनसूनी वर्षा अत्यधिक होती है, तो नदियों का जलस्तर तेजी से ऊपर उठता है और बाढ़ आती है।
- ☀️ सुखाड़ की स्थिति: जब वर्षा ऋतु में बादल गायब हो जाते हैं और तेज धूप निकलती है, जिससे खेतों की सिंचाई और पीने के पानी की किल्लत हो जाती है।
- 🗺️ विभीषिका के लिए बदनाम नदियाँ:
- 🔴 बिहार: कोसी नदी
- 🟠 पश्चिम बंगाल: दामोदर और तिस्ता नदी
- 🟡 असम: ब्रह्मपुत्र नदी
- 🟢 ओडिशा: महानदी
- 🔵 आंध्र प्रदेश: कृष्णा नदी
- 🟣 गुजरात: नर्मदा नदी
🇧🇩 क्या आप जानते हैं? (बांग्लादेश): बांग्लादेश को 'बाढ़ का देश' कहा जाता है। यहाँ प्रतिवर्ष बाढ़ से भारी तबाही होती है, लेकिन बाढ़ का पानी अपने साथ उपजाऊ जलोढ़ मलबा (Humus) लाता है, जिससे यहाँ के मैदान विश्व में सर्वाधिक उपजाऊ बनते हैं।
🌊 2. बाढ़ प्रबंधन और संरचनात्मक उपाय
🏗️ क) पारंपरिक प्रबंधन (बाँध और तटबंध)
- स्वतंत्रता के बाद से ही नदियों पर बाँध (Dam) और तटबंध (Embankment) बनाकर बाढ़ रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
- ⚠️ तटबंधों की सीमा: तटबंध पूरी तरह टिकाऊ समाधान नहीं हैं। वर्ष 2008 में भारत-नेपाल सीमा पर कुसहा के पास तटबंध टूटने से कोसी नदी ने अपनी धारा बदल दी थी और भारी तबाही मचाई थी।
📦 ख) भारत के प्रमुख बाँध और कृत्रिम जलाशय (🎯 Direct Exam Points)
नदियों पर बाँध बनाने से कृत्रिम जलाशयों (Artificial Lakes) का निर्माण होता है:
| क्रमांक | बाँध का नाम | नदी का नाम | निर्मित कृत्रिम जलाशय का नाम |
|---|---|---|---|
| 1 | भाखड़ा नंगल बाँध | सतलज नदी | गोविन्द सागर 🌊 |
| 2 | नर्मदा परियोजना | नर्मदा नदी | सरदार सरोवर 🌊 |
| 3 | नागार्जुनसागर परियोजना | कृष्णा नदी | नागार्जुन सागर 🌊 |
| 4 | कावेरी परियोजना | कावेरी नदी | कृष्णा सागर 🌊 |
| 5 | रिहन्द बाँध | रिहन्द नदी | पंत सागर 🌊 |
- 🌍 विश्व रिकॉर्ड: दुनिया का सबसे ऊँचा बाँध नील नदी पर 'आस्वान' नामक स्थान पर बनाया गया है।
🛠️ 3. बाढ़ के लिए वैकल्पिक एवं पूर्व-सूचना प्रबंधन
पारिस्थितिकी के अनुरूप बाढ़ से बचने के लिए निम्नलिखित आधुनिक कदम उठाने आवश्यक हैं:
- 🏘️ भवन निर्माण तकनीक:
- मकानों की नींव और दीवारें सीमेंट और कंक्रीट की होनी चाहिए।
- मकान स्तंभ (Pillar आधारित) होने चाहिए और स्तंभों की गहराई अधिक होनी चाहिए।
- नदी के सकरी ढालों या किनारों से मकान की दूरी कम से कम 250 मीटर होनी चाहिए।
- 📡 पूर्व सूचना प्रणाली: बाढ़ का पूर्वानुमान लगाने के लिए सुदूर संवेदन (Remote Sensing) तकनीक से सूचनाएँ एकत्र की जानी चाहिए ताकि समय पर स्कूल बंद किए जा सकें और दवा-खाद्य सामग्री की व्यवस्था हो सके।
- 🏊 स्थानीय प्रशिक्षण: ग्रामीणों और विद्यार्थियों को तैरने का प्रशिक्षण देना तथा पंचायतों में स्वीमिंग जैकेट और पंप सेट की व्यवस्था करना।
- 🩺 महामारी नियंत्रण: बाढ़ का पानी उतरते ही फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए D.D.T. और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करना।
☀️ 4. सुखाड़: प्रभाव एवं भौगोलिक क्षेत्र
🚫 क) सुखाड़ से उत्पन्न तीन मुख्य समस्याएँ:
- 🌾 फसलों के न होने से खाद्यान्न की कमी
- 💧 मनुष्यों के लिए पेयजल की कमी
- 🐂 मवेशियों (पशुओं) के लिए चारे की कमी
🗺️ ख) भारत में सूखा प्रभावित क्षेत्र:
- भारत सरकार ने देश में ऐसे 77 जिलों की पहचान की है जहाँ प्रतिवर्ष सूखे की संभावना रहती है।
- ये जिले मुख्यतः राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में हैं।
- 📊 सिंचाई आयोग का आँकड़ा: प्रत्येक वर्ष देश के लगभग 16% भूभाग पर सुखाड़ की स्थिति उत्पन्न होती है।
- ⏳ ऐतिहासिक सूखा वर्ष: 19वीं सदी में 1877, 1899 और 20वीं सदी में 1918, 1966, 1987 में भयंकर सूखा पड़ा था।
🚰 5. सुखाड़ प्रबंधन की रणनीतियाँ
सुखाड़ से निपटने के लिए दो प्रकार की योजनाएँ आवश्यक हैं:
⏳ क) दीर्घकालीन योजनाएँ
- जल संचयन संरचनाएं: नहर, तालाब, कुआँ, पाइन और आहर का विकास करना।
- 🌾 पंजाब और हरियाणा मॉडल: इन राज्यों ने नहरों का जाल बिछाकर सुखाड़ की समस्या का स्थायी समाधान निकाला है।
- 🏗️ बिहार का प्रयास: सुखाड़ के प्रभाव को कम करने के लिए बिहार में कोसी कमांड क्षेत्र, गंडक कमांड क्षेत्र, और चांदन-किउल-बरूआ कमांड क्षेत्र का विकास किया गया है।
💧 ख) आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकें
- बोरिंग और ट्यूबवेल की सीमा: इनके अत्यधिक प्रयोग से भूमिगत जल स्तर में भारी गिरावट आ रही है, जो पारिस्थितिक असंतुलन को जन्म दे रही है।
- 🌧️ वर्षा जल संग्रहण (Rainwater Harvesting): छतों पर गिरने वाले वर्षा जल को पाइप के माध्यम से नीचे बनी बड़ी टंकियों या कुंडों में इकट्ठा करना।
- 🚿 ड्रिप और छिड़काव सिंचाई (Sprinkler Irrigation): 75 सेमी से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इस तकनीक से कम पानी में फल, फूल, सब्जी और दलहन जैसी फसलें उगाई जाती हैं। कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान में इसे ग्रामीण विकास योजना का हिस्सा बनाया गया है।
- 🌳 वाटर शेड प्रबंधन (Water Shed Management): इसके अंतर्गत मृदा क्षरण को कम करने, घास-वन लगाने और भूमिगत जल स्तर को बढ़ाने के लिए छोटे स्तर पर (जैसे राजस्थान में 50 हेक्टेयर तक के क्षेत्र) योजनाएँ चलाई जा रही हैं।
💡 Quick Exam Tips & Tricks
- नदी मिलान ट्रिक: भाखड़ा → सतलज (गोविन्द), नागार्जुन → कृष्णा (नागार्जुन), सरदार सरोवर → नर्मदा।
- बाढ़ रोकने का सूत्र: पिलर वाले मकान + नदी से 250 मीटर की सुरक्षित दूरी।
- नदी जोड़ो परियोजना: भारत सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य बाढ़ ग्रस्त नदियों के अतिरिक्त जल को सूखा ग्रस्त क्षेत्रों तक पहुँचाना है।
🏁 निष्कर्ष (Conclusion)
बाढ़ और सुखाड़ दोनों ही भारत की मौसमी अनिश्चितता के परिणाम हैं। चूँकि बाढ़ को पूर्णतः रोकना असंभव है, इसलिए "बाढ़ की विभीषिका में भी हँस-खेल कर जीने की कला" और पारम्परिक नवीन शैलियों को अपनाना ही इसका सबसे बड़ा प्रबंधन है। वहीं सुखाड़ से निपटने के लिए वर्षा जल संग्रहण और आधुनिक ड्रिप सिंचाई तकनीकों को जन-आंदोलन बनाना होगा।
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