📖 इकाई - 5: आपदा काल में वैकल्पिक संचार व्यवस्था (Alternative Communication Systems During Disasters)
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📌 1. आपदा और भारत की भौगोलिक संवेदनशीलता
हमारा देश भारत अपनी विशिष्ट भौगोलिक बनावट के कारण विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है:
- 🗺️ चक्रवात प्रभावित क्षेत्र: भारत का पूर्वी तटीय भाग, गुजरात का तटीय क्षेत्र तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह.
- 🌊 बाढ़ प्रभावित क्षेत्र: गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी बड़ी नदी घाटियाँ बाढ़ से सर्वाधिक ग्रसित रहती हैं.
- 🌋 भूकंपीय संवेदनशीलता: भारत का 56 प्रतिशत भू-क्षेत्र भूकंप प्रभावित क्षेत्र के अंतर्गत आता है.
- ☀️ सुखाड़ का प्रकोप: भारत के 16 राज्यों का लगभग 16 प्रतिशत भाग नियमित रूप से सूखे की चपेट में रहता है.
- 🏔️ भूस्खलन एवं हिमस्खलन: भूस्खलन मुख्य रूप से हिमालय क्षेत्र और पश्चिमी घाट में होता है, जबकि हिमस्खलन केवल उच्च हिमालयी क्षेत्रों तक सीमित है.
🛑 2. सामान्य संचार व्यवस्था के बाधित होने के कारण
प्राकृतिक आपदाओं के समय सबसे पहले सामान्य संचार व्यवस्था (जैसे मोबाइल नेटवर्क, लैंडलाइन) ठप हो जाती है, जिससे प्रभावित क्षेत्र का संपर्क पूरी दुनिया से कट जाता है और राहत कार्य रुक जाते हैं. इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- 🔌 केबल/तारों का टूट जाना.
- ⚡ बिजली आपूर्ति (Power Supply) का पूरी तरह ठप होना.
- 🏢 संचार भवनों के ध्वस्त होने से उनके भीतर रखे मुख्य उपकरणों का नष्ट हो जाना.
- 🗼 ट्रांसमिशन टावरों (Transmission Towers) का क्षतिग्रस्त हो जाना.
📜 ऐतिहासिक उदाहरण (कुसहा त्रासदी): 2 अगस्त, 2008 को नेपाल के कुसहा के पास कोसी बांध टूटने से उत्तरी बिहार में भयंकर बाढ़ आई थी. इस आपदा में बिहार के 16 जिले, 92 प्रखंड और 1598 गाँव प्रभावित हुए थे तथा लगभग 27 लाख लोग बेघर हो गए थे. उस समय सभी सरकारी टेलीफोन केंद्र जलमग्न हो जाने के कारण जिला मुख्यालयों का संपर्क राज्य मुख्यालय (पटना) से पूरी तरह टूट गया था.
📞 3. मुख्य पारंपरिक संचार साधन और उनकी सीमा
☎️ PSTN (पब्लिक स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क)
- यह सामान्य दिनों में ध्वनि, फैक्स और डेटा भेजने का सबसे लोकप्रिय सार्वजनिक साधन है, जो थानों, अस्पतालों, कार्यालयों और घरों को जोड़ता है.
- ⚠️ नेटवर्क जाम (अवरोध) का कारण: PSTN प्रणाली इस प्रकार डिज़ाइन की जाती है कि सामान्य स्थिति में इससे जुड़े केवल 5 प्रतिशत फोन ही एक समय में बात कर सकें. संकट या आपदा के समय जब अचानक सभी लोग फोन करने लगते हैं, तो क्षमता से अधिक भार पड़ने के कारण यह नेटवर्क पूरी तरह फेल हो जाता है.
📡 4. प्रमुख वैकल्पिक संचार साधन (Alternative Communication Systems)
जब सामान्य संचार माध्यम नष्ट हो जाते हैं, तब आपदा काल में निम्नलिखित वैकल्पिक साधन जीवन रक्षक की भूमिका निभाते हैं:
📻 क) रेडियो संचार (Radio Communication)
- इसमें एंटीना द्वारा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडियो तरंगों को प्रेषित किया जाता है.
- लंबी दूरी के संपर्क के लिए उच्च फ्रीक्वेंसी (High Frequency) तरंगों का तथा कम दूरी (5 से 50 किमी) के लिए अत्यधिक उच्च फ्रीक्वेंसी तरंगों का उपयोग किया जाता है.
- 🪪 वाकी-टॉकी: अत्यधिक उच्च फ्रीक्वेंसी (EHF) बैंड पर काम करने वाले हाथ के वायरलेस उपकरणों (वाकी-टॉकी) का प्रयोग आपदा में बेहद कारगर होता है.
🎙️ ख) एमेच्योर अथवा हेम रेडियो (HAM Radio)
- विशेषता: यह एक गैर-वाणिज्यिक (गैर-व्यापारिक) रेडियो संचार व्यवस्था है, जिसके संचालन के लिए किसी बड़े आधारीय इन्फ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता नहीं होती.
- ऊर्जा: यह बहुत सीमित ऊर्जा पर काम करता है, जिसे सामान्य बैटरी या छोटे जनरेटर से चलाया जा सकता है.
- 🏛️ प्रबंधन: भारत में इसका नियंत्रण संचार मंत्रालय के अधीन 'बेतार प्रयोजना एवं समन्वय स्कंध' द्वारा अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अनुसार किया जाता है. इसका उपयोग केवल अनुसंधान, शिक्षा और व्यक्तिगत शौक (Creative Hobby) के लिए होता है. वर्तमान में भारत में लगभग 15,000 लाइसेंस होल्डर हैम ऑपरेटर्स हैं.
- 🚀 ISRO का योगदान: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने हैम रेडियो के लिए एक विशेष सूक्ष्म तरंग वाले सैटेलाइट का निर्माण किया है.
🌟 संदीप बरूआ का ऐतिहासिक योगदान: 2004 की सुनामी के समय जब सभी सरकारी एजेंसियाँ विफल हो गई थीं, तब नई दिल्ली के लाइसेंस प्राप्त हैम ऑपरेटर संदीप बरूआ ने अपने घर से अंडमान-निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर से संपर्क स्थापित कर लिया. उन्होंने द्वीप समूह में फंसे लोगों के संदेशों को मुख्य भूमि पर मौजूद उनके परिवारों तक पहुँचाया. इसके अतिरिक्त 1999 के ओडिशा सुपर साइक्लोन और 2001 के गुजरात भूकंप में भी हेम रेडियो सबसे प्रभावशाली साबित हुआ था.
🛰️ ग) उपग्रह संचार (Satellite Communication)
यह आपदा प्रबंधन में सबसे अधिक विश्वसनीय और आधुनिक माध्यम है. चूंकि इसका मुख्य रिले स्टेशन (सैटेलाइट) अंतरिक्ष में होता है, इसलिए पृथ्वी पर आने वाली किसी भी आपदा से इसे कोई नुकसान नहीं पहुँचता.
- 📡 INSET (इंडियन नेशनल सैटेलाइट): इसका उपयोग मुख्य रूप से दूरदर्शन, मौसम विज्ञान तथा आपदा संबंधी अग्रिम चेतावनी देने के लिए किया जाता है.
- 🔍 IRS (इंडियन रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट): इसका उपयोग पृथ्वी के संसाधनों की खोज और उनके आपदा प्रबंधन के लिए किया जाता है.
- 📶 ट्रांसपोंडर (Transponder): एक उपग्रह में हजारों ट्रांसपोंडर होते हैं, जो पृथ्वी से आने वाली निश्चित फ्रीक्वेंसी की बातचीत/डेटा को पकड़ते हैं, उन्हें एम्प्लीफाई (विस्तारित) करते हैं और दूसरी फ्रीक्वेंसी के माध्यम से वापस पृथ्वी पर भेजते हैं.
- 📱 उपग्रह फोन (Satellite Phone): आपदा प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण साधन है. यह बिना किसी मोबाइल टावर के सीधे सैटेलाइट से जुड़कर बेहद साफ आवाज और डेटा की सुविधा देता है. भारत सरकार वर्तमान में सभी संवेदनशील जिलों को पोर्टेबल उपग्रह फोन से लैस कर रही है.
💡 Quick Exam Tips & Tricks
- 5% Limit Rule: सामान्य टेलीफोन नेटवर्क (PSTN) के केवल 5% फोन ही एक समय में काम कर सकते हैं, यही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है.
- HAM Radio Controller: भारत में हैम रेडियो का नियंत्रण संचार मंत्रालय का 'बेतार प्रयोजना एवं समन्वय स्कंध' करता है.
- Most Reliable Tool: आपदा के समय सबसे भरोसेमंद और अटूट संचार साधन उपग्रह फोन (Satellite Phone) होता है.
🏁 निष्कर्ष (Conclusion)
प्राकृतिक आपदाओं के समय सूचनाओं का सही और तीव्र आदान-प्रदान ही किसी भी बड़े विनाश को रोक सकता है. जहाँ पारंपरिक संचार नेटवर्क आपदा के पहले झटके में ही ध्वस्त हो जाते हैं, वहीं हेम रेडियो और सैटेलाइट फोन जैसे वैकल्पिक माध्यम संकट के समय शेष दुनिया से संपर्क बनाए रखने और राहत कार्यों को सही दिशा देने में मील का पत्थर साबित होते हैं.
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