📖 इकाई- 4: हमारी वित्तीय संस्थाएँ (Our Financial Institutions)
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📌 1. वित्तीय संस्थाएँ (Financial Institutions) क्या हैं?
- 🧠 अर्थ: मौद्रिक क्षेत्र में देश या राज्य की वे संस्थाएँ जो आर्थिक विकास के लिए उद्यम (Enterprise) एवं व्यवसाय (Business) की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु साख एवं मुद्रा संबंधी कार्यों का संपादन करती हैं.
- ⚖️ रीढ़ की हड्डी (Backbone): वित्तीय संस्थाएँ किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का मेरुदंड मानी जाती हैं।
- 🏢 स्वामित्व के आधार पर विभाजन:
- सरकारी वित्तीय संस्थाएँ: सरकार द्वारा स्थापित एवं संपोषित. जैसे- SBI, PNB, CBI, इलाहाबाद बैंक आदि.
- अर्द्धसरकारी वित्तीय संस्थाएँ: जो RBI के निर्देशन व स्थापित मापदंडों पर काम करती हैं. जैसे- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, बिहार राज्य कॉपरेटिव बैंक.
- सहकारिता क्षेत्र: लोगों के आपसी सहयोग पर आधारित संस्थाएं. जैसे- बिहार में बिस्कोमान (BISCOMAUN), जो कृषि क्षेत्र में ऋण उपलब्ध कराती है.
🗺️ 2. वित्तीय संस्थाओं के प्रकार (Types of Financial Institutions)
वित्तीय संस्थाएँ मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं:
# वित्तीय संस्थाएँ
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राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएँ राज्य स्तरीय वित्तीय संस्थाएँ
(National Level) (State Level - बिहार)
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भारतीय मुद्रा बाजार भारतीय पूँजी बाजार संस्थागत स्रोत गैर-संस्थागत स्रोत
(अल्प/मध्यकालीन) (दीर्घकालीन) (बैंक, नाबार्ड) (महाजन, साहुकार)🟪 क) राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएँ (National Level)
ये देश के लिए वित्तीय और साख नीतियों का निर्धारण एवं राष्ट्रीय स्तर पर वित्त प्रबंधन करती हैं. इसके दो महत्वपूर्ण अंग हैं:
- 💸 भारतीय मुद्रा बाजार (Indian Money Market): यह उद्योग और व्यवसाय के लिए अल्पकालीन एवं मध्यकालीन ऋण प्रबंध करता है.
- संगठित क्षेत्र: वाणिज्य बैंक, सार्वजनिक/निजी क्षेत्र के बैंक तथा विदेशी बैंक.
- असंगठित क्षेत्र: देशी बैंकर और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (NBFCs).
- 📈 भारतीय पूँजी बाजार (Indian Capital Market): यह बड़े उद्योग घरानों और सार्वजनिक निर्माण कार्यों के लिए दीर्घकालीन वित्तीय व्यवस्था करता है. इसके 4 हिस्से हैं— प्रतिभूति बाजार (प्राथमिक व द्वितीयक), औद्योगिक बाजार, विकास वित्त संस्थान तथा गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियां.
🏦 वित्तीय राजधानी (Financial Capital): भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई है, जहाँ का सुसंगठित पूँजी बाजार दलाल स्ट्रीट (Dalal Street) में स्थित है.
🟨 ख) देश की संगठित बैंकिंग प्रणाली के 3 अंग (Pillars)
- 1. केंद्रीय बैंक (Central Bank): भारत का केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) है, जो देश की शीर्ष बैंकिंग संस्था है.
- 2. वाणिज्य बैंक (Commercial Bank): व्यापारिक कार्यों के लिए ऋण देने वाले बैंक. ये राष्ट्रीयकृत (जैसे SBI) या निजी क्षेत्र के हो सकते हैं जिनके नाम के अंत में लिमिटेड (Ltd) जुड़ा होता है.
- 3. सहकारी बैंक (Co-operative Bank): आपसी सहयोग पर आधारित बैंक. ये RBI के दिशा-निर्देश पर काम करते हैं, परंतु इनका संचालन राज्य सरकारों के द्वारा किया जाता है.
🌾 3. राज्य स्तरीय वित्तीय संस्थाएँ (बिहार के संदर्भ में)
बिहार की 87% जनसंख्या गाँवों में रहती है और 75% आबादी कृषि पर निर्भर है. यहाँ दो प्रकार के वित्तीय स्रोत कार्यरत हैं:
🛑 क) गैर-संस्थागत स्रोत (Non-Institutional Sources)
- इसके अंतर्गत महाजन, सेठ-साहुकार, व्यापारी और रिश्तेदार आते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण देने की कुल मात्रा का लगभग 48% हिस्सा इसी स्रोत से आता है.
- ⚠️ शोषक प्रवृत्ति: महाजन जेवर या जमीन गिरवी रखकर कर्ज देते हैं. इनकी ब्याज दर सरकारी दर से बहुत अधिक (जैसे दीनदयाल की कहानी में 10% प्रतिमाह) होती है. कर्ज न चुका पाने पर वे गरीबों की जमीन हड़प लेते हैं.
🏢 ख) संस्थागत वित्तीय स्रोत (Institutional Sources)
- 🏦 सहकारी बैंक: बिहार में सहकारी साख व्यवस्था त्रिस्तरीय है— (A) गाँवों में प्राथमिक सहकारी साख समितियाँ (PACS), (B) जिला स्तर पर केंद्रीय सहकारी बैंक (बिहार में कुल 25 हैं), (C) राज्य स्तर पर 'बिहार राज्य सहकारी बैंक'.
- 🌾 प्राथमिक सहकारी समितियाँ (PACS): कम से कम 10 व्यक्ति मिलकर इसे बना सकते हैं. यह कृषि कार्यों के लिए अल्पकालीन (1 वर्ष के लिए) ऋण देती है (विशेष परिस्थिति में 3 वर्ष). दसवीं पंचवर्षीय योजना के अनुसार बिहार में 6,842 पैक्स कार्यरत हैं.
- 🗺️ भूमि विकास बैंक (पूर्व नाम- भूमि बंधक बैंक): यह किसानों की भूमि बंधक रखकर ट्रैक्टर, पंपिंग सेट खरीदने या स्थायी भूमि सुधार के लिए 15 से 20 वर्षों तक का दीर्घकालीन ऋण देता है.
- 📊 व्यावसायिक बैंक: 1969 में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद इनका कृषि ऋण बढ़ा. बिहार में 1972 में कृषि साख ₹7.30 करोड़ थी, जो 2001 में बढ़कर ₹548 करोड़ हो गई (यद्यपि बिहार की कुल जरूरत ₹700 करोड़ से अधिक की है).
- 🖨️ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB): छोटे किसानों और कारीगरों के लिए 1975 ई० में स्थापित किए गए. वर्तमान में देश में 196 ग्रामीण बैंक हैं.
- 🐂 नाबार्ड (NABARD - राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक): यह देश में कृषि और ग्रामीण विकास के लिए पुनर्वित्त (Refinancing) प्रदान करने वाली शिखर (शीर्ष) संस्था है. यह व्यावसायिक व ग्रामीण बैंकों को फंड देती है, जो आगे किसानों की मदद करते हैं.
🏭 4. व्यावसायिक बैंक के 4 प्रमुख कार्य (Functions of Commercial Banks)
सामान्य बोलचाल में 'बैंक' शब्द का अर्थ व्यावसायिक बैंक से ही होता है. इसके मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
1. 💰 जमा राशि को स्वीकार करना (Accepting Deposits) - इसके 4 प्रकार हैं:
- (i) स्थायी जमा (Fixed Deposits / सावधि जमा): एक निश्चित अवधि (जैसे 1 वर्ष या अधिक) के लिए धन जमा रखना. इस पर बैंक आकर्षक और सबसे ऊँचा ब्याज देते हैं. इसे टाइम डिपॉजिट भी कहते हैं.
- (ii) चालू जमा (Current Deposits): इच्छानुसार कितनी भी बार रुपया जमा करने या निकालने की छूट. यह व्यापारियों के लिए उपयोगी है और इसे माँग जमा (Demand Deposits) भी कहते हैं.
- (iii) संचयी जमा (Saving Deposits / बचत खाता): आम जनता के लिए। रुपया जमा कभी भी कर सकते हैं, पर निकालने की सीमा सीमित होती है. इसमें चेक की सुविधा मिलती है.
- (iv) आवर्ती जमा (Recurring Deposits / RD): हर महीने एक निश्चित राशि निश्चित अवधि (जैसे 60 या 72 माह) तक जमा करना.
2. 💸 ऋण प्रदान करना (Providing Loans) - इसके प्रकार:
- (i) अभियाचित एवं अल्पकालिक ऋण: अति अल्पकाल (1 दिन से 1 सप्ताह) के लिए माँगने पर वापस करने की शर्त पर दिया जाने वाला ऋण.
- (ii) नकद साख (Cash Credit): बॉण्ड्स या व्यापारिक माल की सिक्योरिटी पर ऋण देना.
- (iii) अधिविकर्ष (Overdraft): खाते में जमा रकम से अधिक रकम निकालने की सुविधा देना (इस पर बैंक बहुत ऊँचा ब्याज लेता है).
- (iv) विनिमय बिलों को भुनाना: बिल ऑफ एक्सचेंज पर कुछ कटौती करके नकद भुगतान करना.
- (v) ऋण एवं अग्रिम: पूर्व-निश्चित अवधि के लिए दी जाने वाली अग्रिम राशि.
3. 🛠️ सामान्य उपयोगिता संबंधी कार्य:
- यात्री चेक (Traveller's Cheque) और साख प्रमाण पत्र जारी करना.
- कीमती सामानों के लिए लॉकर की सुविधा (Locker Facilities) देना.
- ATM और क्रेडिट कार्ड की सुविधा प्रदान करना.
4. 🦺 एजेंसी संबंधी कार्य:
- ग्राहकों की ओर से चेक-बिल का संकलन, ब्याज/लाभांश का वितरण, तथा बीमे की किस्त का भुगतान करना.
🌱 5. सहकारिता एवं स्वयं-सहायता समूह (SHGs)
🤝 क) सहकारिता (Co-operation)
- अर्थ: "एक साथ मिल-जुलकर कार्य करना". सहकारिता वह संगठन है जिसमें दो या दो से अधिक व्यक्ति स्वेच्छापूर्वक समान स्तर पर अपने आर्थिक हितों और नैतिक विकास के लिए कार्य करते हैं. इसका मूल सिद्धांत है— "सब प्रत्येक के लिए और प्रत्येक सबके लिए है।" (All for each and each for all).
- 📜 इतिहास: भारत में सर्वप्रथम 1904 ई० में "सहकारिता साख समिति विधान" पारित हुआ, जिसके तहत 10 व्यक्ति मिलकर समिति बना सकते थे. 1919 के राजनीतिक सुधारों के बाद सहकारिता प्रांतीय सरकारों का हस्तांतरित विषय बन गई.
- 🌾 बिहार में भूमिका: बंटवारे के बाद बिहार में खनिज संपदा चली गई, केवल कृषि बची. वर्तमान में ग्रामीण स्तर पर धनकुट्टी, अगरबत्ती निर्माण, बीड़ी निर्माण, जूता और ईंट बनाने जैसे रोजगार सहकारिता के सहयोग से फल-फूल रहे हैं.
👩👩👧👧 ख) स्वयं-सहायता समूह (Self Help Group - SHG)
- अर्थ: ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य रूप से 15-20 व्यक्तियों (विशेषकर महिलाओं) का एक अनौपचारिक स्वैच्छिक समूह होता है, जो नियमित रूप से मिलते हैं और ₹25 से ₹100 तक की बचत करते हैं.
- 🚀 सूक्ष्म वित्त (Micro-Financing): यह समूह सदस्यों की पारिवारिक जरूरतों (बीज, खाद, घर बनाने, मवेशी खरीदने) के लिए साहुकार से कम ब्याज पर ऋण देता है. लगातार बचत करने पर समूह को बिना ऋणाधार (Security/Collateral) के सीधे बैंक से ऋण मिल जाता है.
- 🇧🇩 वैश्विक प्रेरणा: बांग्लादेश में सूक्ष्म वित्त संस्थाओं की सफलता और वहाँ के नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो० मोहम्मद यूनुस के प्रयासों से प्रेरित होकर भारत में भी इसका विस्तार हुआ. 1990 के दशक में नाबार्ड (NABARD) की विशेष पहल से यह पूरे देश में फैला.
- 🧺 नवादा के 'दर्शन' गाँव की कहानी: बिहार के नवादा जिले के गोविंदपुर प्रखंड के 'दर्शन' गाँव की 20 महिलाओं ने एक समूह बनाया. उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक से ₹15,000 का लघु ऋण लेकर टोकरी बनाने का स्वरोजगार शुरू किया, जिससे प्राप्त मुनाफे से प्रत्येक महिला आत्मनिर्भर बनी और अपने परिवार की दशा सुधारी.
💡 Quick Revision Tips & Tricks
- Financial Capital: भारत की वित्तीय राजधानी = मुंबई (दलाल स्ट्रीट) 🗼.
- NREGA vs PACS Member Limit: पैक्स (PACS) या सहकारिता समिति बनाने के लिए न्यूनतम 10 व्यक्ति चाहिए 👥.
- NABARD Role: ग्रामीण विकास का सुप्रीम कमांडर → सभी बैंकों को पुनर्वित्त (Refinance) देने वाली शीर्ष संस्था 👑.
- 4 'Cs' of SHGs/Credit: SHG वास्तव में ऋणाधार (Collateral) की कमी को दूर करने का सबसे बेहतरीन साधन है.
🏁 निष्कर्ष (Conclusion)
आर्थिक और औद्योगिक विकास की गति को बनाए रखने के लिए सुसंगठित वित्तीय संस्थाओं का होना अनिवार्य है. जहाँ राष्ट्रीय स्तर पर संगठित बैंकिंग और पूँजी बाजार अर्थव्यवस्था को तरलता प्रदान करते हैं, वहीं बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में सहकारी बैंक और स्वयं-सहायता समूह (SHG) ग्रामीण ऋणग्रस्तता और महाजनी शोषण को समाप्त कर जमीनी स्तर पर महिला सशक्तिकरण और समावेशी आर्थिक खुशहाली लाने में क्रांति सिद्ध हो रहे हैं.
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