📖 इकाई-2 : समाजवाद एवं साम्यवाद (Socialism and Communism)
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🏛️ 1. समाजवाद: परिचय एवं उत्पत्ति
🔍 समाजवाद क्या है?
- परि परिभाषा: समाजवाद एक ऐसी विचारधारा है जो उत्पादन के साधनों, कारखानों और विपणन (व्यापार) पर निजी स्वामित्व की जगह सामूहिक स्वामित्व (सरकार का एकाधिकार) या धन के समान वितरण पर जोर देती है। यह एक शोषण-मुक्त और वर्ग-विहीन समाज की स्थापना करना चाहता है।
- उत्पत्ति: इस भावना का उदय मूलतः 18वीं-19वीं शताब्दी में औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप हुआ। औद्योगिक क्रांति ने समाज को दो परस्पर विरोधी वर्गों में बाँट दिया:
- पूँजीपति वर्ग: मिल-मालिक, जो आर्थिक रूप से समृद्ध होते गए।
- श्रमिक वर्ग (सर्वहारा वर्ग): जिनका जीवन नारकीय बन गया और लगातार क्रूर शोषण हो रहा था।
🗂️ समाजवाद के दो ऐतिहासिक चरण (Stages)
- यूटोपियन (स्वप्नदर्शी) समाजवाद: मार्क्स से पूर्व का समाजवाद। यह आदर्शवादी और अव्यावहारिक था। ये विचारक वर्ग-संघर्ष के बदले वर्ग-समन्वय (शांतिपूर्ण बदलाव) के हिमायती थे।
- वैज्ञानिक समाजवाद: मार्क्स के पश्चात् का समाजवाद, जो पूरी तरह व्यावहारिक सिद्धांतों पर आधारित था।
📜 2. प्रमुख समाजवादी विचारक (Thinkers)
A. यूटोपियन (स्वप्नदर्शी) विचारक
- सेंट साइमन (फ्रांसीसी): प्रथम यूटोपियन समाजवादी। उसने नारा दिया—"प्रत्येक को उसकी क्षमता के अनुसार तथा प्रत्येक को उसके कार्य के अनुसार"। यह समाजवाद का मूलभूत नारा बना।
- चार्ल्स फौरियर (फ्रांसीसी): वह आधुनिक औद्योगिकवाद का विरोधी था और किसानों के लिए 'फ्लांग्स' (छोटे कस्बे) बनाने का पक्षधर था।
- लुई ब्लां (फ्रांसीसी): फ्रांसीसी चिंतकों में एकमात्र व्यक्ति जिसने राजनीति में हिस्सा लिया। उसका मानना था कि आर्थिक सुधारों के लिए पहले राजनीतिक सुधार आवश्यक हैं।
- रॉबर्ट ओवन (ब्रिटिश उद्योगपति): उसने स्कॉटलैंड के 'न्यू लूनार्क' में एक आदर्श फैक्ट्री स्थापित की। उसने मजदूरों को अच्छी मजदूरी व सुविधाएं दीं, जिससे उसका मुनाफा और बढ़ गया। उसका निष्कर्ष था—"संतुष्ट श्रमिक ही वास्तविक श्रमिक है"।
B. कार्ल मार्क्स (1818-1883) - 'वैज्ञानिक समाजवाद के जनक'
- जीवन परिचय: जन्म 5 मई, 1818 ई० को जर्मनी के राइन प्रांत के ट्रियर नगर में एक यहूदी परिवार में हुआ था। पिता हेनरिक मार्क्स एक प्रसिद्ध वकील थे। मार्क्स हीगेल के विचारों से अत्यधिक प्रभावित था। 1843 में उसने जेनी से विवाह किया।
- फ्रेडरिक एंगेल्स से मुलाकात: 1844 में पेरिस में एंगेल्स से मुलाकात हुई, जो जीवन भर के लिए गहरी मित्रता में बदल गई।
- 📜 साम्यवाद घोषणा पत्र (Communist Manifesto - 1848): मार्क्स और एंगेल्स ने मिलकर इसे प्रकाशित किया, जिसे आधुनिक समाजवाद का जनक माना जाता है।
- 📚 दास कैपिटल (Das Capital - 1867): मार्क्स द्वारा लिखित इस महान पुस्तक को "समाजवादियों की बाइबिल" कहा जाता है।
- मार्क्स के प्रमुख सिद्धांत: द्वंद्वात्मक भौतिकवाद का सिद्धांत, वर्ग-संघर्ष का सिद्धांत, मूल्य एवं अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत तथा राज्यहीन व वर्गहीन समाज की स्थापना।
- 🎯 ऐतिहासिक भौतिकवाद: मार्क्स के अनुसार इतिहास की प्रत्येक घटना के मूल में आर्थिक (उत्पादन) शक्तियां हैं। इतिहास उत्पादन के साधनों पर नियंत्रण के लिए दो वर्गों के बीच चल रहे निरंतर संघर्ष की कहानी है। उसने इतिहास के 6 चरण बताए: (i) आदिम साम्यवादी युग, (ii) दासता का युग, (iii) सामंती युग, (iv) पूँजीवादी युग, (v) समाजवादी युग, (vi) साम्यवादी युग।
🌐 3. प्रथम एवं द्वितीय अंतरराष्ट्रीय संघ
- प्रथम अंतरराष्ट्रीय संघ (1864): कार्ल मार्क्स के प्रयासों से स्थापना हुई। मार्क्स ने नारा बुलंद किया—"अधिकार के बिना कर्तव्य नहीं और कर्तव्य के बिना अधिकार नहीं"। उसने कहा कि मजदूरों का अंतिम लक्ष्य पूँजीवाद का विनाश होना चाहिए।
- द्वितीय अंतरराष्ट्रीय संघ (14 जुलाई 1889): पेरिस में 20 देशों के 400 प्रतिनिधियों का ऐतिहासिक सम्मेलन हुआ। इसका अंतरराष्ट्रीय सचिवालय ब्रूसेल्स में बनाया गया।
- 📅 मजदूर दिवस की शुरुआत: इस संघ में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक वर्ष 1 मई को 'मजदूर वर्ग की एकता दिवस' के रूप में मनाया जाएगा तथा मजदूरों के लिए 8 घंटे का कार्य-दिवस तय होगा। 1 मई 1890 से पूरे विश्व में 'अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस' मनाया जाने लगा।
🇷🇺 4. 1917 की रूसी (बोल्शेविक) क्रांति
बीसवीं शताब्दी की सबसे युगांतकारी घटना रूस की बोल्शेविक क्रांति थी, जिसने विश्व में सर्वप्रथम सर्वहारा वर्ग (किसान, मजदूर व गरीब लोग) की सत्ता स्थापित की।
🔍 क्रांति के प्रमुख कारण (Causes)
- जार की निरंकुशता: रोमनोव राजवंश का शासक जार निकोलस II दैवीय अधिकारों में विश्वास रखता था तथा अकुशल व भ्रष्ट अफसरशाही के कारण स्वेच्छाचारी था।
- कृषकों की दयनीय स्थिति: 1861 में जार अलेक्जेंडर द्वितीय द्वारा कृषि दासता समाप्त करने के बाद भी किसानों के खेत छोटे थे, करों का बोझ अधिक था और वे पुराने ढंग से खेती करने को मजबूर थे।
- मजदूरों की बदहाली: कम मजदूरी, अधिक काम के घंटे और कोई राजनीतिक या हड़ताल का अधिकार न होना।
- रूसीकरण की नीति: जार निकोलस II ने गैर-रूसी अल्पसंख्यकों (फिन, पोल, यहूदी) पर जबरन रूसी भाषा और संस्कृति लादने का प्रयास किया, जिससे असंतोष फैला।
- विदेशी घटनाओं का प्रभाव: क्रीमिया युद्ध में रूस की हार ने सुधारों को जन्म दिया। 1904-05 के रूस-जापान युद्ध में रूस एशिया के एक छोटे से देश (जापान) से बुरी तरह हार गया, जिसने जारशाही की महानता का भ्रम तोड़ दिया।
🩸 खूनी रविवार (Bloody Sunday - 22 जनवरी 1905)
रूस-जापान युद्ध की हार से क्षुब्ध होकर 9 जनवरी 1905 (नए कैलेंडर में 22 जनवरी 1905) को लोगों का समूह 'रोटी दो' के नारे के साथ सेंट पीटर्सबर्ग स्थित महल की ओर जा रहा था। जार की सेना ने इन निहत्थे लोगों पर अंधाधुंध गोलियाँ बरसाईं, जिसमें हजारों लोग मारे गए। इतिहास में इसे खूनी रविवार (लाल रविवार) कहा जाता है। इस क्रांति के दबाव में जार को एक प्रतिनिध्यात्मक संस्था 'ड्यूमा' (संसद) का गठन करना पड़ा।
🗂️ रूसी मार्क्सवाद का विभाजन (1903)
1898 में प्लेखानोव ने 'रशियन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी' बनाई। 1903 में अनुशासन के मुद्दे पर यह दल दो भागों में बँट गया:
- बोल्शेविक (Majority): बहुमत वाला दल, जिसका नेता लेनिन था। ये सर्वहारा वर्ग की पूर्ण क्रांति के पक्षधर थे।
- मेनशेविक (Minority): अल्पमत वाला दल, जो केवल मध्यवर्गीय सुधारों के पक्ष में था।
⚡ 5. मार्च और नवंबर 1917 की क्रांतियाँ
रूस में दो चरणों में क्रांति पूर्ण हुई (पुराने जूलियन कैलेंडर और नए ग्रेगोरियन कैलेंडर में 13 दिनों का अंतर था):
❄️ A. मार्च (फरवरी) की क्रांति: राजतंत्र का अंत
- घटनाक्रम: नए कैलेंडर के अनुसार 8 मार्च 1917 (पुराने कैलेंडर में 23 फरवरी) को पेट्रोग्राड की सड़कों पर 'रोटी दो' के नारे के साथ महिला मिल मजदूरों ने ऐतिहासिक हड़ताल का नेतृत्व किया। जब सेना को गोली चलाने का आदेश दिया गया, तो प्रैओब्राशेंसकी रेजीमेंट सहित सेना की टुकड़ियों ने विद्रोह कर दिया और जनता का साथ दिया।
- राजतंत्र का खात्मा: विवश होकर 12 मार्च 1917 को जार निकोलस II ने गद्दी त्याग दी और रोमनोव वंश के निरंकुश शासन का अंत हुआ।
- अस्थायी सरकार: पहले लोबाव और बाद में केरेन्सकी के नेतृत्व में उदार समाजवादियों की बुर्जुआ (मध्यमवर्गीय) सरकार बनी, जो युद्ध जारी रखना चाहती थी।
- 📌 विशेष तथ्य: सन् 1975 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा इसी 8 मार्च की याद में 'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' घोषित किया गया।
🍁 B. नवंबर (अक्टूबर) की बोल्शेविक क्रांति
- लेनिन का आगमन: जार द्वारा निर्वासित लेनिन स्विट्जरलैंड से जर्मनी की सहायता से अप्रैल 1917 में पेट्रोग्राड पहुँचा। उसने अपनी प्रसिद्ध 'अप्रैल थीसिस' पेश की और तीन ऐतिहासिक नारे दिए—भूमि, शांति और रोटी।
- तख्तापलट: नए कैलेंडर के अनुसार 7 नवंबर 1917 (पुराने कैलेंडर में 25 अक्टूबर, इसीलिए इसे अक्टूबर क्रांति भी कहते हैं) को लेनिन के नेतृत्व में बोल्शेविकों ने पेट्रोग्राड के रेलवे स्टेशन, बैंकों, डाकघरों और सरकारी भवनों पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया। केरेन्सकी देश छोड़कर भाग गया।
- सर्वहारा की सत्ता: विश्व में पहली बार शासन सत्ता सर्वहारा वर्ग के हाथों में आई, जिसके अध्यक्ष लेनिन बने तथा ट्रॉटस्की विदेश मंत्री बने।
🛠️ 6. लेनिन का शासन और नई आर्थिक नीति (NEP)
सत्ता में आने के बाद लेनिन ने दृढ़ता से अनेक नीतिगत सुधार किए:
- युद्ध से बाहर होना: उसने जर्मनी के साथ ब्रेस्टलिटोवस्क की संधि (1918) की और रूस को प्रथम विश्व युद्ध से अलग किया।
- गृहयुद्ध का सामना: विदेशी हस्तक्षेपकारियों (ब्रिटेन, फ्रांस, अमेरिका) से लड़ने के लिए ट्रॉटस्की के नेतृत्व में 'लाल सेना' का गठन किया गया तथा आंतरिक विद्रोहियों को कुचलने के लिए 'चेका' नामक गुप्त पुलिस संगठन बनाया गया।
- नया संविधान (1918): इसके तहत देश का नाम U.S.S.R. (सोवियत समाजवादी गणराज्यों का संघ) किया गया तथा हँसुए और हथौड़े से सुशोभित लाल झंडा राष्ट्रीय प्रतीक बना। 18 वर्ष से ऊपर के सभी कामकाजी नागरिकों को मताधिकार मिला तथा 'काम के अधिकार' को संवैधानिक अधिकार बनाया गया। उद्योगों और बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ।
📉 नई आर्थिक नीति (NEP - 1921)
शुरुआत में लेनिन ने 'युद्धरत साम्यवाद' के तहत किसानों से जबरन अनाज की वसूली की, जिससे कृषि उत्पादन गिर गया और भीषण भुखमरी फैल गई। एक व्यावहारिक राजनीतिज्ञ होने के नाते लेनिन ने मार्क्सवादी सिद्धांतों से थोड़ा समझौता करते हुए 1921 ई० में नई आर्थिक नीति (NEP) की घोषणा की:
- किसानों से जबरन अनाज लेने के स्थान पर एक निश्चित कर (Tax) लगाया गया, शेष अनाज बेचने की छूट मिली।
- सिद्धांत रूप में जमीन राज्य की रही, पर व्यावहारिक रूप से किसान की हो गई।
- 20 से कम कर्मचारियों वाले उद्योगों को निजी तौर पर चलाने का अधिकार मिला।
- उद्योगों का विकेंद्रीकरण हुआ और विदेशी पूँजी को सीमित तौर पर आमंत्रित किया गया।
- लेनिन का प्रसिद्ध कथन: "तीन कदम आगे बढ़कर एक कदम पीछे हटना, फिर भी दो कदम आगे रहने के समान है"।
👑 7. स्टालिन का दौर एवं रूसी क्रांति के प्रभाव
- उत्तराधिकार संघर्ष: 1924 में लेनिन की मृत्यु के बाद सत्ता के लिए संघर्ष हुआ, जिसमें स्टालिन (कम्युनिस्ट पार्टी का महासचिव) विजयी हुआ। उसने 1929 में ट्रॉटस्की को देश से निर्वासित कर दिया और 1953 तक अपनी क्रूर तानाशाही चलाई, जिससे राजनीतिक स्वतंत्रता और लोकतंत्र पूरी तरह नष्ट हो गए।
- महान शक्ति के रूप में उदय: स्टालिन की तीन पंचवर्षीय योजनाओं के फलस्वरूप रूस का तीव्र औद्योगिकीकरण और कृषि का सामूहिकरण हुआ, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध से पहले रूस विश्व की एक महाशक्ति (Superpower) बन गया।
🌐 रूसी क्रांति के 5 वैश्विक प्रभाव (Global Impacts)
- सर्वहारा वर्ग की प्रतिष्ठा: विश्वभर में मजदूर वर्ग को शासन संभालने का आत्मविश्वास मिला।
- विश्व का दो खेमों में विभाजन: विश्व वैचारिक स्तर पर दो गुटों — साम्यवादी विश्व (नेतृत्व: सोवियत रूस) और पूँजीवादी विश्व (नेतृत्व: अमेरिका) में विभाजित हो गया, जिसने आगे चलकर शीत युद्ध (Cold War) को जन्म दिया।
- आर्थिक नियोजन मॉडल: सोवियत संघ के पंचवर्षीय योजनाओं के आर्थिक मॉडल को आगे चलकर कई पूँजीवादी व विकासशील देशों ने अपने परिवर्तित रूप में अपनाया।
- उपनिवेश मुक्ति को बढ़ावा: सोवियत रूस ने एशिया और अफ्रीका के राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलनों को वैचारिक व नैतिक समर्थन दिया, जिससे वैश्विक उपनिवेशवाद का अंत तेज हुआ।
- 📌 नोट: दिसंबर 1991 ई० में अंततः सोवियत संघ (USSR) का विघटन हो गया, जिसके पूर्व राष्ट्रपति मिखाइल गोर्वाचोव (1985) ने पेरेस्त्रेइका (पुनर्गठन) और ग्लासनोस्त (खुलापन) की नीतियां चलाई थीं।
💡 Quick Exam Shortcuts & Tricks (याद रखने के सूत्र)
- बाइबिल की कैपिटल: समाजवादियों की बाइबिल = दास कैपिटल (1867, कार्ल मार्क्स)।
- नारा और क्षमता: सेंट साइमन = "क्षमता के अनुसार काम, कार्य के अनुसार दाम"।
- कैलेंडर का फेरा: पुराने रूसी कैलेंडर के कारण फरवरी की क्रांति मार्च (12 मार्च) में और अक्टूबर की क्रांति नवंबर (7 नवंबर) में दर्ज हुई।
- तीन ऐतिहासिक नारे: लेनिन = भूमि, शांति और रोटी (अप्रैल थीसिस)।
- पुलिस और सेना: चेका = लेनिन की गुप्त पुलिस, लाल सेना = ट्रॉटस्की की सेना।
📝 निष्कर्ष (Conclusion)
समाजवाद और साम्यवाद की विचारधारा ने औद्योगिक क्रांति के शोषणात्मक पूँजीवाद के विरुद्ध शोषित सर्वहारा वर्ग को एक सशक्त वैश्विक आवाज दी। कार्ल मार्क्स के वैज्ञानिक सिद्धांतों से सीखकर लेनिन ने 1917 की बोल्शेविक क्रांति के माध्यम से विश्व की पहली साम्यवाद-आधारित सरकार की स्थापना की। यद्यपि आगे चलकर स्टालिन के क्रूर अधिनायकवाद के कारण सोवियत संघ में राजनीतिक स्वतंत्रता का ह्रास हुआ और अंततः 1991 में इसका विघटन हो गया, फिर भी इस क्रांति द्वारा प्रस्तुत आर्थिक नियोजन (पंचवर्षीय योजनाएं) और उपनिवेश-मुक्ति के वैश्विक संदेश ने संपूर्ण विश्व के सामाजिक-आर्थिक ढांचे को हमेशा के लिए बदल दिया।
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